राजनीति

बढ़ते अंतर्विरोध, बढ़ती निरंकुशता

मोदी-शाह की सरकार कभी इस पार्टी तो कभी उस पार्टी के नेताओं को हैरान-परेशान कर रही है। कभी किसी पार्टी के नेता को ई डी हिरासत में ले रही है तो कभी किसी पार्टी के। भाजपा की इन पार्टियों को ध्वस्त कर

मर्ज कुछ, इलाज कुछ

उच्चतम न्यायालय के चुनाव आयुक्त के चयन संबंधी फैसले ने एक हलचल सी पैदा कर दी। 2 मार्च को उच्चतम न्यायालय की पांच सदस्यीय संवैधानिक पीठ ने फैसला सुनाया कि चुनाव आयुक्त की नियुक्ति प्रधानमंत्री की अध

अडाणी और संसद

भारत के शीर्ष पूंजीपति गौतम अडाणी के शेयरों में हिंडनबर्ग रिपोर्ट से शुरू हुआ गिरावट का दौर जारी है। इस बीच अडाणी व हिंडनबर्ग के बीच के आरोप-प्रत्यारोप अब भारत की संसद व सर्वोच्च न्यायालय तक पहुंच

असम में बाल विवाह को रोकने का भाजपा का तरीका

असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने असम में बाल विवाह पर रोक लगाने का ऐलान किया है। असम के मुख्यमंत्री ने फरमान जारी करते हुए कहा कि ‘‘जो युवक 14 साल से कम उम्र की लड़की से शादी करेगा, सरकार उनक

मोदी सरकार बनाम उच्चतम न्यायालय

हमारे देश में आजकल एक दिलचस्प मुकदमा चल रहा है। यह मुकदमा देश की संसद से लेकर मीडिया तक में चल रहा है। मुकदमा मोदी सरकार बनाम उच्चतम न्यायालय है। इस मुकदमे की कुछ अनूठी खासियतें हैं। कुछ एकदम वैसी

प्रज्ञा ठाकुर: हिन्दू फासीवादियों की रोल मॉडल

प्रज्ञा ठाकुर अपने बयानों को लेकर एक बार फिर चर्चा में हैं। इस बार उन्होंने लव जिहाद की ओर इशारा करते हुए हिन्दू समुदाय के लोगों को अपनी बेटियों की रक्षा के लिए घर में हथियार रखने या चाकू तेज करने

आलेख

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अमरीकी साम्राज्यवादी और इजरायली शासक सोचते थे कि ईरान के शीर्ष नेतृत्व का सफाया करने के बाद ईरानी जनता अपनी सत्ता के विरुद्ध उठ खड़ी होगी और इसका फायदा उठाते हुए अमरीकी साम्राज्यवादी अपनी किसी कठपुतली को सत्ता में स्थापित कर देंगे। लेकिन ऐसा नहीं हुआ। ईरानी अवाम अपनी सत्ता के समर्थन में मजबूती से खड़ी हो गई। यहां से अमरीकी साम्राज्यवादियों को समझ में आ गया कि वे ईरान पर कब्जा नहीं कर सकते।

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अमेरिकी साम्राज्यवादी पश्चिम एशिया में और सारी दुनिया में अपनी साम्राज्यवादी जकड़न को खत्म नहीं होने देना चाहेंगे। वे इसके खिलाफ हर संभव प्रयास करेंगे। एक हमले में मुंह की खाने के बाद वे सबक लेकर आगे हमला करने से तौबा नहीं करेंगे। यह उनकी साम्राज्यवादी फितरत के खिलाफ होगा। यानी वे ईरान पर काबू पाने के लिए दूसरे तरीकों की खोज में लग जायेंगे।

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पिछले दस-बारह सालों में हिन्दू फासीवादियों ने इस अनौपचारिक आपातकाल की शैली को काफी विकसित किया है। कहां किस छेद का इस्तेमाल करना है, इसमें उन्होंने महारत हासिल की है। इनके इस कृत्य में न्यायपालिका की सहभागिता से यह काम और आसान हो गया है। मतदाता सूची का विशेष गहन पुनर्रीक्षण इस सबका विशिष्ट उदाहरण है।

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जैसा कि इंटरव्यू के शीर्षक से स्पष्ट है कि पिकेटी एक ऐसी दुनिया का ख्वाब परोसते हैं जिसमें बगैर पर्यावरण को नुकसान पहुंचाये ज्यादातर लोग खुशहाल बन सकते हैं। इस सुन्दर दुनिया को हासिल करने के लिए वे किसी वर्ग संघर्ष बढ़ाने या क्रांति की वकालत नहीं करते। बल्कि वे कुछ नुस्खे सुझाते हैं जिस पर चल कर मौजूदा पूंजीवादी-साम्राज्यवादी दुनिया को ही खुशनुमा बनाया जा सकता है। 

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अमरीकी साम्राज्यवादी वर्चस्व को बढ़ाने में पश्चिम एशिया में दृढ़ स्तम्भ इजरायल रहा है। 1979 से पहले ईरान का शासक शाह रजा पहलवी  भी इस क्षेत्र में अमरीका का लठैत रहा है। 1979 में रजा पहलवी का तख्ता उलटने के बाद जो इस्लामी सत्ता आयी, वह लगातार अमरीकी साम्राज्यवाद की वर्चस्ववादी नीतियों का विरोध करती रही थी। यह सत्ता इजरायल द्वारा फिलिस्तीनियों को उजाड़े जाने और उनकी जमीनों पर यहूदी बस्तियां बसाने का विरोध करती रही है।