असम में बाल विवाह को रोकने का भाजपा का तरीका
असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने असम में बाल विवाह पर रोक लगाने का ऐलान किया है। असम के मुख्यमंत्री ने फरमान जारी करते हुए कहा कि ‘‘जो युवक 14 साल से कम उम्र की लड़की से शादी करेगा, सरकार उनक
असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने असम में बाल विवाह पर रोक लगाने का ऐलान किया है। असम के मुख्यमंत्री ने फरमान जारी करते हुए कहा कि ‘‘जो युवक 14 साल से कम उम्र की लड़की से शादी करेगा, सरकार उनक
हमारे देश में आजकल एक दिलचस्प मुकदमा चल रहा है। यह मुकदमा देश की संसद से लेकर मीडिया तक में चल रहा है। मुकदमा मोदी सरकार बनाम उच्चतम न्यायालय है। इस मुकदमे की कुछ अनूठी खासियतें हैं। कुछ एकदम वैसी
प्रज्ञा ठाकुर अपने बयानों को लेकर एक बार फिर चर्चा में हैं। इस बार उन्होंने लव जिहाद की ओर इशारा करते हुए हिन्दू समुदाय के लोगों को अपनी बेटियों की रक्षा के लिए घर में हथियार रखने या चाकू तेज करने
अठारहवीं सदी के इंग्लैण्ड में होने वाले चुनावी भ्रष्टाचार पर गूगल से ‘सर्च’ करने पर उसका ए आई स्वतः ही यह जवाब हाजिर कर देता हैः
एस.आई.आर. प्रक्रिया के दौरान बड़े पैमाने पर मतदाताओं की कटौती की गई। अब तक 13 करोड़ से ज्यादा मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटा दिए गए। जबकि 5-6 करोड़ लोगों को संदेह की आड़ में नोटिस भेजे गए। 13 करोड़ में से 70 प्रतिशत वो लोग थे जिन्हें स्थानांतरित या अनुपस्थित बता दिया गया। इस तरह बड़े स्तर पर मनमानी छंटनी की जा रही है। इसमें सबसे बड़ी संख्या अल्पसंख्यक, दलित, आदिवासी, महिलाओं और मलिन बस्तियों में रहने वालों की है।
इस मजदूर आंदोलन की विचारधारा मार्क्सवाद का यह स्पष्ट कहना था कि महान फ्रांसीसी क्रांति के जमाने से ही पूंजीपति वर्ग ने अपने समाज के लिए जो आदर्श घोषित कर रखा है- स्वतंत्रता, समता, बंधुत्व का आदर्श- वह पूंजीवाद की निजी सम्पत्ति के कारण कभी भी हासिल नहीं किया जा सकता। पूंजी के रूप में निजी सम्पत्ति के रहते स्वतंत्रता का मतलब होगा बाजार में खरीद-बेच की स्वतंत्रता, समता का मतलब होगा बाजार में खरीददार व विक्रेता की समता तथा बंधुत्व का मतलब होगा खरीद-बेच की व्यवस्था पर सहमति।
गाजापट्टी में इजरायल की कत्लेआम करने की मुहिम जारी है। इजरायली यहूदी नस्लवादी न तो किसी समझौते को मान रहे हैं और न ही वे अपनी विनाश लीला को रोक रहे हैं। वे नस्लीय सफाये की मुहिम चला रहे हैं। इसके जवाब में हमास और अन्य प्रतिरोध संगठन इजरायली कब्जाकारी सेना पर प्रहार कर रहे हैं।
अपने व्यापक नुकसान को देखते हुए अमरीकी साम्राज्यवादियों ने अप्रैल महीने में युद्ध विराम किया और फिर पाकिस्तान की मध्यस्थता में एक ज्ञापन समझौता किया। इस ज्ञापन समझौते में अधिकांशतः ईरान की मांगें स्वीकार की गयीं। यह वस्तुतः अमरीका की पराजय थी। इस समझौते के थोड़े ही दिनों बाद अमरीका ने इसका उल्लंघन शुरू कर दिया। इजरायल ने एक भी दिन इस समझौते को नहीं माना।