विविध

‘नीचे से इतिहास’ और सुमित सरकार

/neeche-se-itihaas-aur-sumit-sarakar

1970 के दशक में आधुनिक भारत के इतिहास लेखन में एक धारा पैदा हुयी जिसने ‘नीचे से इतिहास’ को अपना लक्ष्य बनाया। इसके प्रस्तोता रंजित गुहा थे जो ससेक्स विश्वविद्यालय में अध्

राहुल गांधी की राजनीति

/rahul-gandhi-ki-politics

भारत का मजदूर वर्ग ही वह वर्ग या वह ताकत है जो भारत के सभी शोषित-उत्पीड़ितों की मुक्ति की राह खोल सकता है। भारत का मजदूर वर्ग जब जागेगा तब वह अपनी करोड़ों भुजाओं से उस शोषण-उत्पीड़न-दमन के तंत्र को एक झटके में उखाड़ फेंकेगा जो आज शोषित-उत्पीड़ितों के ऊपर लदा हुआ है। 

नीयत

/neeyat

अरे मुल्ला जी आज सावन का पहला सोमवार है थोड़ा लगा लो, कहते हुए पंडित जी ने तम्बाकू भरी चिलम नजाकत अली की तरफ बढ़ाई। मशीन की आड़ का अंधेरा चिलम में उठने वाली लपट में चमक उठा

नीति आयोग की रिपोर्ट: विकास के दावों का फूटा ढोल

/niti-aayog-ki-report-vikaas-ke-davon-ka-phoota-dhol

आज देश भर में छात्र बेहतर और सम्मानजनक शिक्षा के अधिकार के लिए आवाज उठा रहे हैं। अलग-अलग राज्यों और शहरों से छात्र अपने स्कूलों की बदहाल तस्वीरें सामने ला रहे हैं। कहीं स

जेन जी बनेगी गो मित्र

जंतर-मंतर संघर्ष से जेन-जी के भाजपा से दूर जाने का खौफ संघ-भाजपा के नेताओं के चेहरों पर नजर आने लगा है। जेन-जी के महत्व को संघी अच्छे से जानते हैं। वे जानते हैं कि अगर नई

‘आत्मनिर्भर भारत’ और हिन्दू फासीवाद

/aatmanirbhar-bharat-aur-hindu-fascism

पिछले 12 साल से हिंदू फासीवादी सत्ता पर हैं। इस दौरान लगातार ही भारत को आत्मनिर्भर बनाने के लिए तमाम दावे और बातें इन्होंने की हैं। इन्होंने मेक इन इंडिया का नारा भी भारत

अमरीका का ईरान पर ‘आपरेशन डी-डे’: हताशा का परिणाम

/amerika-ka-iran-par-operation-d-day-hatasha-ka-parinam

अपने व्यापक नुकसान को देखते हुए अमरीकी साम्राज्यवादियों ने अप्रैल महीने में युद्ध विराम किया और फिर पाकिस्तान की मध्यस्थता में एक ज्ञापन समझौता किया। इस ज्ञापन समझौते में अधिकांशतः ईरान की मांगें स्वीकार की गयीं। यह वस्तुतः अमरीका की पराजय थी। इस समझौते के थोड़े ही दिनों बाद अमरीका ने इसका उल्लंघन शुरू कर दिया। इजरायल ने एक भी दिन इस समझौते को नहीं माना।

इसका जो भी नाम है गुण्डों की सल्तनत का

/isaka-jo-bhi-naam-hai-gundon-ki-saltanat-ka

एक आम मजदूर, एक आम किसान कोई ठेला, रेहडी वाला या छोटा दुकानदार देश में रहने वाला हर आम मेहनतकश जहां जिस देश का बाशिंदा है उसे अपना देश कहता है मगर क्या वह देश उसका अपना ह

बढ़ती महंगाई के खिलाफ प्रदर्शन

/badhati-mahangai-ke-khilaf-pradarshan

फरीदाबाद/ 26 अगस्त को फरीदाबाद के बीके चैक में, ‘‘फरीदाबाद जन संघर्ष समिति’’ के बैनर तले बढ़ती महंगाई के खिलाफ एक विरोध प्रदर्शन किया गया। 
    

आलेख

/punjivadi-jantantra-and-chunavi-corruption

अठारहवीं सदी के इंग्लैण्ड में होने वाले चुनावी भ्रष्टाचार पर गूगल से ‘सर्च’ करने पर उसका ए आई स्वतः ही यह जवाब हाजिर कर देता हैः 

/election-aayog-hindu-fascist-and-loktantra

एस.आई.आर. प्रक्रिया के दौरान बड़े पैमाने पर मतदाताओं की कटौती की गई। अब तक 13 करोड़ से ज्यादा मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटा दिए गए। जबकि 5-6 करोड़ लोगों को संदेह की आड़ में नोटिस भेजे गए। 13 करोड़ में से 70 प्रतिशत वो लोग थे जिन्हें स्थानांतरित या अनुपस्थित बता दिया गया। इस तरह बड़े स्तर पर मनमानी छंटनी की जा रही है। इसमें सबसे बड़ी संख्या अल्पसंख्यक, दलित, आदिवासी, महिलाओं और मलिन बस्तियों में रहने वालों की है।

/uddharak-ideology-ki-talaas

इस मजदूर आंदोलन की विचारधारा मार्क्सवाद का यह स्पष्ट कहना था कि महान फ्रांसीसी क्रांति के जमाने से ही पूंजीपति वर्ग ने अपने समाज के लिए जो आदर्श घोषित कर रखा है- स्वतंत्रता, समता, बंधुत्व का आदर्श- वह पूंजीवाद की निजी सम्पत्ति के कारण कभी भी हासिल नहीं किया जा सकता। पूंजी के रूप में निजी सम्पत्ति के रहते स्वतंत्रता का मतलब होगा बाजार में खरीद-बेच की स्वतंत्रता, समता का मतलब होगा बाजार में खरीददार व विक्रेता की समता तथा बंधुत्व का मतलब होगा खरीद-बेच की व्यवस्था पर सहमति।

/war-and-diplomacy-uthal-puthal-se-bhari-duniyaa

गाजापट्टी में इजरायल की कत्लेआम करने की मुहिम जारी है। इजरायली यहूदी नस्लवादी न तो किसी समझौते को मान रहे हैं और न ही वे अपनी विनाश लीला को रोक रहे हैं। वे नस्लीय सफाये की मुहिम चला रहे हैं। इसके जवाब में हमास और अन्य प्रतिरोध संगठन इजरायली कब्जाकारी सेना पर प्रहार कर रहे हैं। 

/amerika-ka-iran-par-operation-d-day-hatasha-ka-parinam

अपने व्यापक नुकसान को देखते हुए अमरीकी साम्राज्यवादियों ने अप्रैल महीने में युद्ध विराम किया और फिर पाकिस्तान की मध्यस्थता में एक ज्ञापन समझौता किया। इस ज्ञापन समझौते में अधिकांशतः ईरान की मांगें स्वीकार की गयीं। यह वस्तुतः अमरीका की पराजय थी। इस समझौते के थोड़े ही दिनों बाद अमरीका ने इसका उल्लंघन शुरू कर दिया। इजरायल ने एक भी दिन इस समझौते को नहीं माना।