राजनीति

जार्ज सोरोस और संघ-भाजपा

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बीते दिनों भारत की राजनीति में अमेरिकी उद्योगपति जार्ज सोरोस का नाम खूब उछाला गया। संघ-भाजपा ने इस उद्योगपति पर आरोप लगाया कि उसके द्वारा दिये फंड से भारत को अस्थिर करने,

दिल तोड़ते छोटे-छोटे नायक

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मोदी और राहुल गांधी जैसे बड़े नायकों के अलावा आज ढेरों छोटे-छोटे नायक भी हैं जो अपने चाहने वालों का दिल तोड़ दे रहे हैं। अभी अवध ओझा नामक नायक ने आम आदमी पार्टी में शामिल ह

विचित्र किन्तु सत्य

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भारत दो सौ वर्षों तक अंग्रेजों का गुलाम रहा। गुलामी के खिलाफ भारत की आजादी की लड़ाई में हजारों-हजार लोग शहीद हुए। हजारों-हजार लोगों का जीवन अंग्रेजों की जेलों में अत्याचार

बड़े लोगों की बड़ी बात

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अपने देश में पिछले कुछ सालों से लगातार आरोप लग रहा है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और पूंजीपति गौतम अडाणी के बीच यारी है। कि 2002 से अब तक अडाणी के लगातार बड़े से बड़े बनत

लाल किताब

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महाराष्ट्र-झारखण्ड के विधानसभा चुनाव में ‘‘लाल किताब’’ की चर्चा जोरों पर है। हुआ यूं कि आम चुनाव के समय से राहुल गांधी अपने चुनाव प्रचार में संविधान की एक गुटखा प्रति हाथ

गुजरात मॉडल नई ऊंचाई पर

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मोदी के गुजरात में जो भी हो जाये सब कम है। मोदी है तो मुमकिन है। अभी कुछ वर्ष पूर्व अडाणी के बंदरगाह पर 3000 करोड़ रुपये के ड्रग्स पकड़े गये थे। कुछ महीनों पहले प्रधानमंत्र

खान-पान और वर्ण-जाति व्यवस्था

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हमारा समय ऐसा है कि इसमें बहुत तुच्छ सी बातों को भी गुरू-गंभीर सत्य की तरह पेश किया जाता है और पेश करने वाले उम्मीद करते हैं कि उन्हें अति गंभीरता से लिया जाये। 

मांसाहार और सदाचार

/maansaahaar-aur-sadaachaar

मोहन भागवत, मोदी, शाह, योगी, सरमा धार्मिक ध्रुवीकरण के माहिर खिलाड़ी हैं। कोई भी ऐसा मौका नहीं होता है जहां ये अपनी चाल से बाज आते हैं।
    

पी के : नया मदारी

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कहते हैं कि पूत के पांव पालने में ही दिख जाते हैं। और जब 2 अक्टूबर गांधी जयन्ती के दिन पीके (प्रशांत किशोर ‘‘पाण्डे’’) ने अपनी जन सुराज पार्टी की घोषणा की तो यही कहावत चर

आलेख

/punjivadi-jantantra-and-chunavi-corruption

अठारहवीं सदी के इंग्लैण्ड में होने वाले चुनावी भ्रष्टाचार पर गूगल से ‘सर्च’ करने पर उसका ए आई स्वतः ही यह जवाब हाजिर कर देता हैः 

/election-aayog-hindu-fascist-and-loktantra

एस.आई.आर. प्रक्रिया के दौरान बड़े पैमाने पर मतदाताओं की कटौती की गई। अब तक 13 करोड़ से ज्यादा मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटा दिए गए। जबकि 5-6 करोड़ लोगों को संदेह की आड़ में नोटिस भेजे गए। 13 करोड़ में से 70 प्रतिशत वो लोग थे जिन्हें स्थानांतरित या अनुपस्थित बता दिया गया। इस तरह बड़े स्तर पर मनमानी छंटनी की जा रही है। इसमें सबसे बड़ी संख्या अल्पसंख्यक, दलित, आदिवासी, महिलाओं और मलिन बस्तियों में रहने वालों की है।

/uddharak-ideology-ki-talaas

इस मजदूर आंदोलन की विचारधारा मार्क्सवाद का यह स्पष्ट कहना था कि महान फ्रांसीसी क्रांति के जमाने से ही पूंजीपति वर्ग ने अपने समाज के लिए जो आदर्श घोषित कर रखा है- स्वतंत्रता, समता, बंधुत्व का आदर्श- वह पूंजीवाद की निजी सम्पत्ति के कारण कभी भी हासिल नहीं किया जा सकता। पूंजी के रूप में निजी सम्पत्ति के रहते स्वतंत्रता का मतलब होगा बाजार में खरीद-बेच की स्वतंत्रता, समता का मतलब होगा बाजार में खरीददार व विक्रेता की समता तथा बंधुत्व का मतलब होगा खरीद-बेच की व्यवस्था पर सहमति।

/war-and-diplomacy-uthal-puthal-se-bhari-duniyaa

गाजापट्टी में इजरायल की कत्लेआम करने की मुहिम जारी है। इजरायली यहूदी नस्लवादी न तो किसी समझौते को मान रहे हैं और न ही वे अपनी विनाश लीला को रोक रहे हैं। वे नस्लीय सफाये की मुहिम चला रहे हैं। इसके जवाब में हमास और अन्य प्रतिरोध संगठन इजरायली कब्जाकारी सेना पर प्रहार कर रहे हैं। 

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अपने व्यापक नुकसान को देखते हुए अमरीकी साम्राज्यवादियों ने अप्रैल महीने में युद्ध विराम किया और फिर पाकिस्तान की मध्यस्थता में एक ज्ञापन समझौता किया। इस ज्ञापन समझौते में अधिकांशतः ईरान की मांगें स्वीकार की गयीं। यह वस्तुतः अमरीका की पराजय थी। इस समझौते के थोड़े ही दिनों बाद अमरीका ने इसका उल्लंघन शुरू कर दिया। इजरायल ने एक भी दिन इस समझौते को नहीं माना।