असली अमेरिका कौन है? -मदन मोहन पाण्डेय
यूरोपियन व्यापारियों ने मूल अमेरिकियों का संहार तीन तरह से किया। एक लड़ाइयां में, (जिसका अभी जिक्र किया है), दूसरा उन्हें गुलाम बनाकर नारकीय दशाओं में रखकर, तीसरा, स्वयं यूरोप से वहां लाई गई बीमारियों द्वारा। संहार के दूसरी प्रकार के बाबत गालिआनो इस प्रकार बताते हैं, ‘‘तीन सदियों (16वीं से 18वीं) के दौरान पोतोसी (बोलीविया का चांदी खनन केंद्र) के सेर्रोरिको ने 80 लाख जिंदगियों को लील लिया। मूल निवासियों को औरतों और बच्चों समेत उनके कृषिगत समुदायों से नोच लिया गया और उन्हें सेर्रां (चांदी की खानों) में भेज दिया गया। उस बेहद ठंडे बीहड़ में गए हर दस में से सात कभी वापस नहीं आए। स्पेनवासी मजदूरों की तलाश में ग्रामीण क्षेत्रों में सैकड़ों मील तक घूमते थे। गुलाम मजदूरों में बहुत से पोतोसी पहुंचने से पहले रास्ते में ही मर जाते थे। लेकिन वह खानों में काम करने के भयंकर हालात थे जिन्होंने ज्यादातर लोगों को मारा। बेगार और गुलामी की भयानकता का अनुमान इस बात से लगाया जा सकता है कि मूलवासी उनसे बचने के लिए सैकड़ां की तादाद में सामूहिक आत्महत्याएं कर लेते थे।