काश ऐसा हो सहमी आंखों में -गौहर रज़ा
काश ये बेटियां बिगड़ जाएं
इतना बिगड़ें के ये बिफर जाएं
उन पे बिफरें जो तीर-ओ-तेशा लिए
राह में बुन रहे हैं दार ओ रसन
और हर आजमाइश द- ए -दार -ओ द- रसन
काश ये बेटियां बिगड़ जाएं
इतना बिगड़ें के ये बिफर जाएं
उन पे बिफरें जो तीर-ओ-तेशा लिए
राह में बुन रहे हैं दार ओ रसन
और हर आजमाइश द- ए -दार -ओ द- रसन
बात करते हैं और सपने बहुत देखते हैं लोग
बेहतर भविष्य के लिए,
सुखी स्वर्णिम लक्ष्य के लिए,
देखा जाता है उन्हें दौड़ते हुए और पीछा करते हुए,
हम अत्याचारी से पूछते हैं-
हमें यातना देना कब बंद करोगे तुम
वह हमसे पूछता है-
सांप कब खड़ा होगा अपने पैरों के बल
चूहा कब शादी करेगा बिल्ली के बच्चों से
बादलों और परिंदों की खातिर अब कोई जगह नहीं है
अब काले चिरायंध धुंए से भरे आसमान में
बारूद की चिरंतन गंध ने अगवा कर लिया है
फूलों की खुशबू...वनस्पतियों का हरापन
युद्ध सेनायें नहीं करतीं
युद्ध शासक करते हैं
युद्ध में शासक नहीं मरते
सैनिक मरते हैं
जनता मरती है..
सन सैंतालीस के हंगामे आए और गुजर गए। बिलकुल उसी तरह जिस मौसम में खिलाफ-ए-मामूल चंद दिन खराब आएं और चले जाएं। ये नहीं कि करीम दाद, मौला की मर्जी समझ कर खामोश बैठा रहा। उसन
पहलगाम हमले पर टिप्पणी पर गायिका नेहा सिंह राठौर के बाद लखनऊ यूनिवर्सिटी की असिस्टेंट प्रोफेसर माद्री काकोटी उर्फ डा. मेड्यूसा के खिलाफ राजद्रोह का केस दर्ज हुआ है।
उन्होंने हमें बताया कि पहली शक्ति है
कार्यपालिका शक्ति
और विधायी शक्ति दूसरी शक्ति है
जिसे ठगों के एक गिरोह ने
‘‘सत्ता पक्ष’’ और ‘‘विपक्ष’’ में बांट रखा है,
कहे सतलुज का पानी
कहे ब्यास की रवानी
अपनी लहरों की ज़ुबानी
हमारा झेलम चिनाब को सलाम कहना
हम मांगते हैं ख़ैर, सुबह शाम कहना
जी सलाम कहना !
अठारहवीं सदी के इंग्लैण्ड में होने वाले चुनावी भ्रष्टाचार पर गूगल से ‘सर्च’ करने पर उसका ए आई स्वतः ही यह जवाब हाजिर कर देता हैः
एस.आई.आर. प्रक्रिया के दौरान बड़े पैमाने पर मतदाताओं की कटौती की गई। अब तक 13 करोड़ से ज्यादा मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटा दिए गए। जबकि 5-6 करोड़ लोगों को संदेह की आड़ में नोटिस भेजे गए। 13 करोड़ में से 70 प्रतिशत वो लोग थे जिन्हें स्थानांतरित या अनुपस्थित बता दिया गया। इस तरह बड़े स्तर पर मनमानी छंटनी की जा रही है। इसमें सबसे बड़ी संख्या अल्पसंख्यक, दलित, आदिवासी, महिलाओं और मलिन बस्तियों में रहने वालों की है।
इस मजदूर आंदोलन की विचारधारा मार्क्सवाद का यह स्पष्ट कहना था कि महान फ्रांसीसी क्रांति के जमाने से ही पूंजीपति वर्ग ने अपने समाज के लिए जो आदर्श घोषित कर रखा है- स्वतंत्रता, समता, बंधुत्व का आदर्श- वह पूंजीवाद की निजी सम्पत्ति के कारण कभी भी हासिल नहीं किया जा सकता। पूंजी के रूप में निजी सम्पत्ति के रहते स्वतंत्रता का मतलब होगा बाजार में खरीद-बेच की स्वतंत्रता, समता का मतलब होगा बाजार में खरीददार व विक्रेता की समता तथा बंधुत्व का मतलब होगा खरीद-बेच की व्यवस्था पर सहमति।
गाजापट्टी में इजरायल की कत्लेआम करने की मुहिम जारी है। इजरायली यहूदी नस्लवादी न तो किसी समझौते को मान रहे हैं और न ही वे अपनी विनाश लीला को रोक रहे हैं। वे नस्लीय सफाये की मुहिम चला रहे हैं। इसके जवाब में हमास और अन्य प्रतिरोध संगठन इजरायली कब्जाकारी सेना पर प्रहार कर रहे हैं।
अपने व्यापक नुकसान को देखते हुए अमरीकी साम्राज्यवादियों ने अप्रैल महीने में युद्ध विराम किया और फिर पाकिस्तान की मध्यस्थता में एक ज्ञापन समझौता किया। इस ज्ञापन समझौते में अधिकांशतः ईरान की मांगें स्वीकार की गयीं। यह वस्तुतः अमरीका की पराजय थी। इस समझौते के थोड़े ही दिनों बाद अमरीका ने इसका उल्लंघन शुरू कर दिया। इजरायल ने एक भी दिन इस समझौते को नहीं माना।