अंगोला : ईंधन सब्सिडी कटौती के खिलाफ जनता सड़कों पर

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अंगोला में 1 जुलाई से ईंधन सब्सिडी में कटौती कर दी गयी है। इस कटौती के खिलाफ मिनीबस टैक्सी एसोसिएशन ने 28 जुलाई को तीन दिवसीय हड़ताल का आह्वान किया। इस ईंधन सब्सिडी में कटौती के कारण तेल की कीमतों में 33 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी हो गयी है जिसने अपनी बारी में खाद्य पदार्थों के दामों में वृद्धि की है। पहले से ही खाद्य पदार्थों के दामों में बढ़ोत्तरी से परेशान अंगोला की जनता ने इस तीन दिवसीय हड़ताल में बड़ी संख्या में हिस्सा लिया। प्रदर्शनकारियों ने राजधानी लुआंडा में सड़कों पर प्रदर्शन करते हुए टायर जलाये और राशन की दुकानों में लूटपाट भी हुई। इन तीन दिनों के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों में झड़पें हुईं। पुलिस ने रबर बुलेट और आंसू गैस के गोले छोड़े। इस दौरान 22 लोगों की मौत हो गयी और 1000 से ज्यादा लोगों को गिरफ्तार कर लिया गया। इस बीच 250 लोग घायल हुए। इससे पहले 12 जुलाई को भी तेल की कीमतों में वृद्धि के खिलाफ एक प्रदर्शन हुआ था जो कि शांतिपूर्ण निपट गया था।  
    
अंगोला अफ्रीका का तीसरा बड़ा तेल उत्पादक देश है। इससे सरकार को 60 प्रतिशत तक राजस्व प्राप्त होता है। और इसके निर्यात का 95 प्रतिशत तेल होता है। जब से लोरेंको राष्ट्रपति बने हैं तब से वे शिक्षा-स्वास्थ्य-ईंधन आदि में सब्सिडी कटौती कर रहे हैं। कुछ महीनों पहले छात्रों ने भी शिक्षा में बजट कटौती के विरोध में प्रदर्शन किये थे। ये सब अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष के इशारे पर 2023 से हो रहा है। राष्ट्रपति लोरेंको कहते हैं कि जो सब्सिडी दी जा रही है वह जीडीपी का 4 प्रतिशत है और यह बहुत ज्यादा है। इसकी वजह से कई सारे प्रोजेक्ट रुके हुए हैं। 
    
ये वही राष्ट्रपति हैं जो एक साल पहले न्यूनतम वेतन में वृद्धि (70,000 क्वान्जा से 1 लाख क्वान्जा) की बात कर रहे थे लेकिन अब वे अपने वायदों को भूल अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष के इशारे पर सब्सिडी खत्म करने में लगे गये। अभी जो सब्सिडी में कटौती की गयी है उसके कारण मिनीबस-कारों पर निर्भर श्रमिकों के लिए परिवहन लागत दोगुनी होकर 4000 क्वान्जा (4.36 डालर) प्रतिदिन हो गयी है जो 53 प्रतिशत अंगोलावासियों के लिए प्रतिदिन की मजदूरी 3.65 डालर से ज्यादा है। वहीं 31 प्रतिशत अंगोलावासी ऐसे हैं जो प्रतिदिन 2.15 डालर ही कमाते हैं। 
    
तेल की कीमतों में यह वृद्धि उस समय की गयी है जब पहले ही बिजली और पानी के बिलां में 50 प्रतिशत और 30 प्रतिशत की वृद्धि की जा चुकी है। अंगोला में ईंधन सब्सिडी में 3 अरब डालर खर्च किये जाते हैं जबकि तेल से 31 अरब डालर का राजस्व सरकार को प्राप्त होता है। यह दिखाता है कि ईंधन में सब्सिडी से 10 गुना ज्यादा राजस्व सरकार को तेल से प्राप्त होता है। 
        
दरअसल अंगोलावासी आज जब सड़कों पर उतरे हैं तो वे केवल तेल की कीमतों में वृद्धि के कारण ही नहीं बल्कि बढ़ती महंगाई की वजह से भी सड़कों पर हैं जिसके कारण उनकी थाली से खाना कम होता जा रहा है। जुलाई 2025 में 2017 के मुकाबले एक अंगोलवासी अपनी भोजन की बास्केट में मात्र 66 प्रतिशत ही सामान खरीद पाता है। इसलिए जब तेल की कीमतों में वृद्धि के खिलाफ जनता सड़कों पर थी तो उनके नारों में एक नारा था- ‘टेमोस फोम’ यानी ‘हम भूखे हैं’।
              
अंगोला में एक भारी समस्या बेरोजगारी की भी है। 15 से 24 वर्ष तक के 54.3 प्रतिशत युवा बेरोजगार हैं। वर्तमान राष्ट्रपति लोरेंको 2017 में 38 वर्ष से सत्ता पर काबिज जोस एडुआर्डो को हटाकर राष्ट्रपति बने थे। उस समय लोरेंको ने अंगोलावासियों से कुछ वायदे किये थे जिनमें आर्थिक सुधार, सामाजिक प्रगति, लोकतांत्रिक सम्मान व भ्रष्टाचार विरोधी कदम उठाना शामिल था लेकिन अभी तक उनके ये वायदे अधूरे हैं और उनकी पार्टी की लोकप्रियता काफी गिर चुकी है। 
    
अंगोला में हो रहे प्रदर्शन 2027 में होने वाले चुनावों में सरकार के लिए परेशानी खड़ी कर सकते हैं लेकिन वास्तविक बदलाव के लिए जनता को क्रांतिकारी संगठनों की आवश्यकता है। 

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