जनगणना के नाम पर जासूसी

Published
Tue, 09/01/2026 - 15:50
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द हिन्दू अखबार में छपी एक खबर के अनुसार जनगणना-2027 में सरकार जनता से कई ऐसे सवाल पूछ रही है जिसका सम्बन्ध जनगणना से कम लोगों की व्यक्तिगत जानकारियां जुटाने से अधिक है। दावा किया रहा है कि नये सवालों में कोविड-19 टीकाकरण की जानकारी, बैंक खाते, स्थायी पता, पति-पत्नी की जानकारी, पासपोर्ट, ड्राइविंग लाइसेंस, वोटर आई डी कार्ड और माता-पिता के धर्म व जन्मस्थान की जानकारी मांगी जा रही है। सरकार द्वारा जुटायी जा रही इन जानकारियों के प्रति कई लोगों ने इसके गलत इस्तेमाल की आशंका जतायी है। 
    
लद्दाख व 3 अन्य राज्यों की प्रश्नावली में ये प्रश्न शामिल किये गये हैं। आशंका जतायी जा रही है कि इन सवालों से सरकार धार्मिक अल्पसंख्यक समूहों व प्रवासियों की पहचान करने में कर सकती है व इनके प्रति भेदभावपूर्ण रुख अपना सकती है। जब एस आई आर के जरिये सरकार पहले ही नागरिकों का खुद चुनाव कर रही हो तब यह आशंका और बढ़ जाती है। 
    
2011 की जनगणना में जहां 27 सवाल पूछे गये थे वहीं नयी जनगणना में 40 सवाल पूछे जाने की बात हो रही है। नये जोड़े गये ज्यादातर सवाल व्यक्तिगत जानकारियों से संदर्भित हैं। इस तरह सरकार जनगणना के साथ लोगों की जासूसी करने में जुटी है। 
    
2027 की जनगणना के साथ-साथ जातीय जनगणना भी होनी है। पर अभी जिस तरह का फार्म सामने आ रहा है उससे स्पष्ट है कि सरकार किसी जिम्मेदार जातीय जनगणना को कराना ही नहीं चाहती। जाति से संदर्भित सवाल में लोगों को कुछ दिये गये विकल्पों में से एक विकल्प भरने के बजाय अपनी जाति खुद बताने को कहा गया है। इसका परिणाम यह निकलेगा कि बिहार की तरह लाखों जातियां सामने आ जायेंगी व इन्हें दलित या पिछड़े -अति पिछड़े समूहों में बांटने का काम बाकी रह जायेगा। ढेरों जातियां तो इन समूहों में आसानी से बांटी भी नहीं जा सकेंगी। ऐसे में जाति जनगणना से कोई खास निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकेगा। कांग्रेस व अन्य विपक्षी दलों ने जाति जनगणना के इस तरीके पर आपत्ति भी जतायी है और कुछ चुनिन्दा श्रेणियों को प्रस्तुत कर उनमें से व्यक्ति को एक चुनने की मांग की है। पर सरकार अभी किसी बदलाव के लिए तैयार नहीं दिख रही है। 
    
यह जनगणना पहले चरण में सितम्बर 26 व दूसरे चरण में फरवरी 27 में होनी है। कुछ राज्यों में स्व गणना की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। मोदी सरकार की पूरी कोशिश है कि इस जनगणना से भी वो लोगों की जानकारी जुटा नागरिकता परीक्षण का काम करे साथ ही जातीय जनगणना कुछ ऐसे की जाये कि उससे पैदा हुए आंकड़ों से कोई निष्कर्ष ही न निकाला जा सके। सरकार के पास हर व्यक्ति की व्यक्तिगत सूचनायें पर्याप्त मात्रा में एकत्र हो जायें ताकि वो अल्पसंख्यकों को धमकाने से लेकर घुसपैठिया बनाने की अपनी फासीवादी मुहिम आगे बढ़ा सके। 
    
वक्त रहते सरकार के इन नापाक मंसूबों के खिलाफ संघर्ष करना जरूरी है। 

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