काकोरी कांड के शहीदों की याद में विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन

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इस समय काकोरी कांड का सौंवा वर्ष चल रहा है। गौरतलब है कि 9 अगस्त, 1925 के दिन रामप्रसाद बिस्मिल के नेतृत्व में क्रांतिकारियों के एक जत्थे ने लखनऊ के नजदीक काकोरी और आलमगीर के बीच ट्रेन रोककर सरकारी खजाना लूट लिया था। इस घटना से अंग्रेजी सत्ता दहल गई क्योंकि यह घटना खजाने की लूट मात्र नहीं अपितु ब्रिटिश उपनिवेशवाद को खुली चुनौती थी। 
    
इसके बाद गिरफ्तारियों और दमन का दौर चला और लखनऊ की अदालत में 18 महीने तक मुकदमे के एक नाटक के बाद 19 दिसंबर, 1927 के दिन रामप्रसाद बिस्मिल को गोरखपुर, अशफाक उल्ला खान को फैजाबाद, रोशन सिंह को इलाहाबाद में फांसी दे दी गई; इससे 2 दिन पूर्व 17 दिसम्बर के दिन राजेंद्र लाहिड़ी को गोंडा जेल में फांसी पर चढ़ा दिया गया। इसके अलावा 6 अन्य क्रांतिकारियों को लम्बी सजायें दी गयीं जिनमें मन्मथनाथ गुप्त को सर्वाधिक 14 साल की जेल हुई। रामप्रसाद बिस्मिल और अशफाक उल्ला खान का एक ही दिन फांसी पर चढ़ना देश में हिंदू-मुस्लिम एकता की मिसाल बन गया। 
    
‘‘शहीदों की मजारों पर लगेंगे हर बरस मेले, वतन पर मरने वालों का यही बाकी निशा होगा।’’ पर खरे उतरते हुये हमारे देश के क्रांतिकारी संगठन, प्रगतिशील बुद्धिजीवी एवं जागरूक नागरिक प्रतिवर्ष काकोरी के शहीदों की याद में उनके शहीदी दिवस पर प्रभात फेरी, सभा, जुलूस, गोष्ठी इत्यादि कार्यक्रम कर उन्हें अपनी श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं और उनके विचारों पर आगे बढ़ने का संकल्प प्रदर्शित करते हैं। 
    
काकोरी के शहीदों की याद में इस वर्ष भी विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन हुआ।

दिल्ली के बवाना औद्योगिक क्षेत्र में 19 दिसंबर को एक प्रभात फेरी निकालकर शहीदों को याद किया गया। 
    
मानेसर (गुड़गांव) में भी इस अवसर पर इंकलाबी मजदूर केंद्र द्वारा 19 दिसंबर को प्रभात फेरी निकाली गई। गुड़गांव में अमर शहीदों के विचारों पर जारी प्रचार अभियान के दौरान 15 दिसम्बर को कुछ हिंदूवादी लम्पटों ने इमके कार्यकर्ताओं से अभद्रता की।
    
फरीदाबाद में इस अवसर पर 19 दिसंबर को इंकलाबी मजदूर केंद्र द्वारा मजदूर बस्ती आजाद नगर में जुलूस निकाला गया एवं नुक्कड़ सभायें की गयीं। इस दौरान लोगों को अमर शहीदों के विचारों से परिचित कराया गया। 
    
हरिद्वार में 17 दिसम्बर को मजदूर बस्ती रावली महदूद में नुक्कड़ सभायें कर काकोरी के शहीदों के विचारों से लोगों को परिचित कराया गया। साथ ही, क्रांतिकारी साहित्य के प्रचार-प्रसार हेतु बुक स्टाल लगाया गया। इसके अलावा 19 दिसंबर को प्रभात फेरी निकालकर शहीदों को श्रद्धांजलि दी गई। 
    
काशीपुर में 15 दिसम्बर को काकोरी के शहीदों की याद में विचार गोष्ठी की गई। इसके अलावा 19 दिसंबर को काशीपुर के ही जसपुर खुर्द इलाके में श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया। 
    
रामनगर में इस अवसर पर 17 दिसम्बर को थारी गांव में एक विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया। इसके अलावा 19 दिसंबर को लखनपुर चौक पर श्रद्धांजलि सभा की गई। इस दौरान वक्ताओं ने कहा कि आज आर एस एस-भाजपा और इजारेदार पूंजीपतियों का गठजोड़ भारत की मजदूर-मेहनतकश जनता का सबसे बड़ा दुश्मन है।
    
हल्द्वानी में 19 दिसंबर को क्रांतिकारी लोक अधिकार संगठन, परिवर्तनकामी छात्र संगठन एवं प्रगतिशील महिला एकता केंद्र के कार्यकर्ताओं ने एक सभा का आयोजन कर अमर शहीदों को अपनी श्रद्धांजलि अर्पित की। इस दौरान वक्ताओं ने कहा कि आजादी के बाद कांग्रेस ने जिस रास्ते पर देश को आगे बढ़ाया उसी का परिणाम है कि आज देश की सत्ता पर हिंदू फासीवादी ताकतें काबिज हैं और जिनका मुकाबला क्रांतिकारी आंदोलन को आगे बढाकर ही किया जा सकता है।
    
रुद्रपुर में काकोरी शहीद यादगार कमेटी ने 17 दिसम्बर को शहीद अशफाक उल्ला खान पार्क से खेड़ा कालोनी तक जुलूस निकाला जिसमें क्रांतिकारी लोक अधिकार संगठन, इंकलाबी मजदूर केंद्र, आटोलाइन एम्प्लोयीज यूनियन एवं इंटरार्क मजदूर संगठन के कार्यकर्ताओं ने भागीदारी की। इसके अलावा 19 दिसंबर को श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया। इस दौरान वक्ताओं ने कहा कि गांधी जी द्वारा असहयोग आंदोलन को वापस ले लेने पर उपजी निराशा और शून्यता को काकोरी की घटना ने आशा और उमंग में बदल दिया था। 
    
शहीद अशफाक उल्ला खान पार्क में आयोजित इस सभा को इंकलाबी मजदूर केंद्र, सी एस टी यू, क्रांतिकारी लोक अधिकार संगठन, सी पी आई, भाकपा (माले), प्रगतिशील महिला एकता केंद्र, राकेट रिद्धि-सिद्धि कर्मचारी संघ, एडविक कर्मचारी संघ, सी आई ई इंडिया, यजाकि वर्कर्स यूनियन, जायडस कान्ट्रेक्ट वर्कर्स यूनियन, इंटरार्क मजदूर संगठन, एल जी बी वर्कर्स यूनियन, बडवे वर्कर्स यूनियन, डालफिन मजदूर संगठन, बसपा इत्यादि के प्रतिनिधियों ने सम्बोधित किया।
    
पंतनगर में इंकलाबी मजदूर केंद्र और ठेका मजदूर कल्याण समिति ने काकोरी शहीदों की याद में श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया। 
    
लालकुआं-बिंदुखत्ता में 19 दिसंबर को इंकलाबी मजदूर केंद्र और प्रगतिशील महिला एकता केंद्र के कार्यकर्ताओं ने श्रद्धांजलि सभा का आयोजन कर अमर शहीदों को अपनी श्रद्धांजलि दी। इस दौरान वक्ताओं ने कहा कि अशफाक-बिस्मिल समाज को बांटने वाले हिंदू और मुस्लिम धर्म के कट्टरपंथियों से बहुत नफरत करते थे। 
    
बरेली में काकोरी शहीद यादगार कमेटी के बैनर तले दामोदर स्वरूप पार्क में सभा कर ‘‘काकोरी शहीद संदेश यात्रा’’ नाम से जुलूस निकाला गया और अमर शहीदों के विचारों को जन-जन तक पहुंचाने का संकल्प लिया गया।
    
इसके अलावा 22 दिसम्बर को नेहरू युवा केन्द्र में एक विचार गोष्ठी का भी आयोजन किया गया जिसका शीर्षक ‘‘शहीदों की विरासत और आज की चुनौतियां’’ था। विचार गोष्ठी में शहीदे वतन अशफाक उल्ला खां पौत्र अशफाक उल्ला खां, क्रांतिकारी साहित्यकार सुधीर विद्यार्थी भी शामिल रहे। इस दौरान रंगकर्मी मनीष मुनि जी ने ‘‘अशफाक राम’’ नाटक प्रस्तुत किया।
    
बदायूं में इस अवसर पर शहीद पार्क में एक सभा का आयोजन कर काकोरी के शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की गई। इस दौरान वक्ताओं ने कहा कि आज पूंजीवादी लुटेरे देश की सम्पदा को लूट रहे हैं। सरकारें देश के संस्थानों का निजीकरण कर पूंजीपतियों को सौंप रही हैं।
    
मऊ में काकोरी के शहीदों को याद करते हुये इंकलाबी मजदूर केंद्र और क्रांतिकारी लोक अधिकार संगठन के कार्यकर्ताओं ने जुलूस निकाला एवं सभायें कीं। इस दौरान वक्ताओं ने क्रांतिकारियों के बलिदान से लोगों को परिचित कराया और देश के सामने मौजूद हिंदू फासीवादी खतरे के विरुद्ध लड़ाई को मजबूत करने का आह्वान किया। 
    
बलिया में इस अवसर पर 19 दिसंबर को क्रांतिकारी लोक अधिकार संगठन और इंकलाबी मजदूर केंद्र के कार्यकर्ताओं ने जुलूस निकाला और सभा की। इस दौरान वक्ताओं ने कहा कि देश और समाज को फासीवाद की आग में झोंकने की साजिश को नाकाम करना होगा। -विशेष संवाददाता
 

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