इंटरार्क फैक्टरी में काम के दबाव में मजदूर की मौत

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पंतनगर/ 22 दिसम्बर 2024 को दुर्योधन शर्मा (उम्र 48 साल) नाम के एक मजदूर की इन्टरार्क बिल्डिंग प्रोडक्ट लिमिटेड में काम के दौरान मौत हो गयी। इस मजदूर को कम्पनी प्रबंधन ने जबरदस्ती ओवरटाइम पर रोका था। यह मजदूर 21 दिसम्बर को दोपहर 2.00 बजे बी शिफ्ट में ड्यूटी खत्म करने के बाद घर जाने की तैयारी कर रहा था तभी कंपनी प्रबंधन ने उसे नाइट शिफ्ट (रात 10 से सुबह 6 बजे) में जबरन ओवरटाइम में रोका। लगातार 16 घन्टे कार्य करवाने की वजह से उसकी हालत खराब हो गयी और सुबह लगभग 6 बजे ड्यूटी के दौरान अचानक बेहोश हो गया। बेहोश होने के बाद एम्बुलेंस से उन्हें मेडिसिटी हास्पिटल रूद्रपुर पहुंचाया गया जहां पर डाक्टर ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। उसके बाद उन्हें गौतम हास्पिटल और उसके उपरांत जिला अस्पताल भी ले जाया गया। लेकिन उनकी जान जा चुकी थी।
    
उनकी मौत के बाद इन्टरार्क मजदूर संगठन एवं मृतक के परिवार जनों ने काम के दौरान मृत्यु होने पर प्रबंधक से परिवार के भरण-पोषण हेतु मुआवजे की बात की लेकिन प्रबंधन मानने को तैयार नहीं हुआ। जिला अस्पताल में रूद्रपुर के विधायक शिव अरोड़ा भी पहुंच गये। (यह वही विधायक शिव अरोडा थे जिन्होंने डाल्फिन कम्पनी में मजदूरों का समझौता कराने का कई बार वायदा किया था लेकिन मालिक ने उनकी एक भी नहीं सुनी थी।) यहां भी कम्पनी के हेड ने उनको कोई भाव नहीं दिया। अंततः काफी संघर्ष करने के बाद विधायक, सामाजिक संगठन, सिडकुल पंतनगर की यूनियन आदि के साथ मिलकर प्रबंधन के साथ मौखिक रूप से यह समझौता हुआ कि मृतक के परिवार को 01 लाख रुपए अन्त्येष्टि के लिए और 20 लाख रुपए तीन दिन के अन्दर कानूनी मुआवजे को छोड़कर दे दिये जायेंगे। जब मजदूरों ने लिखित में इस समझौते की मांग की तो रूद्रपुर के विधायक शिव अरोड़ा द्वारा रूद्रपुर सी.ओ., सहायक श्रमायुक्त महोदय रूद्रपुर, पंतनगर के कोतवाल आदि के सामने इसकी खुद जिम्मेदारी ली गयी और कहा कि अगर कंपनी प्रबंधन पैसे नहीं देगा तो मैं दूंगा।
    
आज फैक्टरियों में मजदूरों को जबरन ओवरटाइम पर रोका जाना प्रबंधन का नियम बन गया है। जब काम ज्यादा होता है तो प्रबंधन मजदूरों को जबर्दस्ती रोक लेता है। चाहे मजदूर की स्थिति कैसी भी हो। मजदूरों के लिए बने श्रम कानूनों के अनुसार मजदूर को ओवरटाइम पर तभी रोका जा सकता है जब मजदूर की सहमति हो। लेकिन आज औद्योगिक क्षेत्रों में श्रम कानूनों की तो खुलेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। ऐसे में जबर्दस्ती ओवरटाइम पर रोकने से या तो उनके अंग भंग हो जा रहे हैं या फिर मौत हो जा रही है। ऐसे में प्रबंधन की कोशिश अपना पल्ला झाड़ने की होती है। ऐसे में मजदूरों को हमेशा ही संगठित होने की जरूरत है। -पंतनगर संवाददाता
 

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