क्यों नहीं है इनके पास भोजनमाताओं की समस्याओं का समाधान

Published
Fri, 10/16/2026 - 07:50
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कटघरे में सरकार, कटघरे में विधायक

उत्तराखंड में भोजनमाताएं (मिड डे मील कर्मचारी) 23-24 सालों से सरकारी, अर्ध सरकारी विद्यालयों में भोजन बनाने का काम कर रही हैं। परंतु, इतने वर्ष कार्य करने के बाद भी भोजनमाताओं की स्थिति अत्यंत असुरक्षित, अस्थिर एवं उपेक्षित बनी हुई है। भोजनमाताओं से 4-4 कर्मचारियों (माली, सफाई कर्मचारी, चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी और भोजनमाता) के बराबर काम करवाया जाता है जिसके एवज में उन्हें मात्र 3 हजार रुपए मासिक मानदेय मिल रहा है। यह 100 रुपया प्रतिदिन नहीं है। साल भर में उन्हें महज 11 महीने की ही पगार मिलती है।  
    
इसके अलावा कभी बच्चे कम होने के नाम पर, कभी भोजनमाताओं के बच्चे स्कूल में नहीं पढ़ने के फर्जी तर्क पर, कभी स्कूलों के विलयीकरण के नाम पर भोजनमाताओं को नौकरी से निकाला जा रहा है या नौकरी से निकालने की धमकी देकर उनका मानसिक उत्पीड़न भी किया जा रहा है।
    
उ.प्र. में भोजनमाताओं को रसोइया कहा जाता है। इन रसोइयों की स्थिति उत्तराखण्ड की भोजनमाताओं की तरह खराब है। इसी कारण से इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने अपने फैसले में कहा था कि उनसे बेगार करवायी जा रही है। बेगार पूरे देश में गैर कानूनी है। इलाहाबाद उच्च न्यायालय का फैसला सिर्फ कागजी साबित हुआ। 
    
अपनी समस्याओं के समाधान के लिए उत्तराखण्ड में भोजनमाताओं ने ‘प्रगतिशील भोजनमाता संगठन उत्तराखंड’ नाम से यूनियन का गठन किया। यूनियन के बैनर तले भोजनमाताओं ने बहुत संघर्ष किया। इन संघर्षों के दम पर 1 हजार रुपए मानदेय में बढ़ोत्तरी के साथ कई समस्याओं का समाधान हुआ। जिस समय उत्तराखंड ने भोजनमाताओं के मानदेय में 1 हजार की बढ़ोत्तरी की थी उस समय भोजनमाताओं की न्यूनतम वेतन 18 हजार रुपये की मांग थी लेकिन उत्तराखंड सरकार ने खुद से भोजनमाताओं का 5 हजार मानदेय करने की घोषणा की थी। परन्तु मानदेय 1 हजार की बढ़ोत्तरी कर 3 हजार का मानदेय किया था। तब से ही भोजनमाताएं अपने मानदेय में बढ़ोत्तरी व सरकार की वादा खिलाफी के खिलाफ संघर्ष कर रही हैं। अपने शोषण-उत्पीड़़न का संघर्ष एकदम विपरीत परिस्थितियों में जारी है। 
    
भोजनमाताओं ने मुख्यमंत्री, शिक्षा मंत्री को ज्ञापन दिये, प्रतिनिधि मंडल बनकर मुलाकात की, राज्य स्तर के प्रदर्शन किए, हड़ताल की गई। जिनमें हर बार भोजनमाताओं को कोरे आश्वासन दिए गए, उनकी समस्या का समाधान नहीं किया गया। अब भोजनमाताओं की यूनियन ने अलग-अलग क्षेत्र के विधायकों का घेराव करने का फैसला लिया हुआ है। अब तक पक्ष-विपक्ष के आठ विधायकों का घेराव किया जा चुका है। आगे सिलसिलेवार इसकी चर्चा है।

हल्द्वानी- 28 सितंबर 2026 को हल्द्वानी की भोजनमाताओं ने हल्द्वानी क्षेत्र के विधायक सुमित हृदेश से मिलकर उनको ज्ञापन दिया। सुमित हृदेश कांग्रेस पार्टी के विधायक हैं। सुमित हृदेश ने भोजनमताओं को आश्वासन दिया कि इस बार विधानसभा सत्र में भोजनमाताओं की मांगों को उठाएंगे वो कांग्रेस पार्टी के मांग पत्र में भोजनमाताओं की मांगों को शामिल करेंगे। 
    
अब यह देखने की बात है कि बाकी नेताओं की तरह इनके भी कोरे वादे ही न रहें। क्योंकि जब भोजनमाताओं को रखा गया था तब प्रदेश में काग्रेस पार्टी की ही सरकार थी और उसके लम्बे समय बाद तक भी कांग्रेस की ही सरकार रही। तब भोजनमाताओं के लिए कुछ क्यों नहीं किया? 

नैनीताल- 29 सितंबर 2026 को नैनीताल की भोजनमाताओं ने एकत्रित होकर भाजपा की नैनीताल विधायक सरिता आर्या को ज्ञापन दिया। भोजनमाताओं की समस्याओं को लेकर उन पर विचार कर कार्यवाही करने का आश्वासन दिया है। विधायक जी ऐसा न हो इस कान से उस कान से न निकाल दें।

लक्सर- 30 सितंबर 2026 को भोजनमाताएं ‘प्रगतिशील भोजनमाता संगठन’ के बैनर तले इकट्ठा होकर लक्सर क्षेत्र के बसपा के विधायक शहजाद को ज्ञापन दिया। इन्होंने भोजनमाताओं का अपने कार्यालय पर स्वागत किया, बैठाया, जलपान कराया। मीडिया के सामने भोजनमाताओं को आश्वासन दिया कि इस बार विधानसभा सत्र में भोजनमाताओं की मांगों को उठाएंगे, प्रेस कांफ्रेंस करेंगे। वक्त ही बताएगा कि वे विधानसभा सत्र में भोजनमाताओं की मांगों को उठाएंगे या नहीं।

खानपुर- दिनांक 30 सितंबर 2026 को भोजनमाताओं ने प्रगतिशील भोजनमाता संगठन के बैनर तले इकठ्ठा होकर खानपुर के निर्दलीय विधायक उमेश कुमार के कार्यालय पर प्रदर्शन किया। विधायक उमेश कुमार अपने कार्यालय पर मौजूद नहीं थे। जबकि यूनियन के पदाधिकारियों ने उमेश कुमार से मिलकर पहले ही एक लेटर दे दिया था कि 30 सितंबर को आपके कार्यालय पर भोजनमाताएं आपसे मिलने आना चाहती है और उन्होंने हां कहा था। लेकिन उनके अनुसार अचानक स्वास्थ्य कारणों से देहरादून अस्पताल चले गए थे। वीडियो काल पर ज्ञापन सुना और विधानसभा में भोजनमाताओं की मांग उठाने के लिए आश्वासन दिया। उमेश कुमार पेशे से पत्रकार रहे हैं। अब देखने वाली बात है कि वे आगे क्या करेंगे।

कालाढूंगी- कालाढूंगी के भाजपा विधायक बंशीधर भगत का आवास हल्द्वानी में ही है। हल्द्वानी में बंशीधर भगत के आवास पर 1 अक्टूबर 2026 को भोजनमाताओं ने विधायक बंशीधर भगत से मुलाकात की। भोजनमाताओं ने जब अपनी समस्याओं को विधायक महोदय के सामने रखा तो विधायक महोदय ने बड़ी बदतमीजी से- तू कहां रहती है तू कहां काम करती है, से धमकाना शुरू किया। जब भोजनमाताओं ने इसका विरोध किया तो उन्होंने भोजनमाताओं से कहा कि 3 हजार रु. तो बहुत मिल रहा है तुम काम धाम कुछ करती नहीं हो। सत्ता का अहंकार इनके अंदर कूट-कूट कर भरा हुआ है।  

लालकुआं- 4 अक्टूबर 2026 को लालकुआं की भोजनमाताओं ने लालकुआं थाने पर एकत्रित होकर भाजपा विधायक मोहन बिष्ट के कार्यालय तक जुलूस निकाला और विधायक मोहन बिष्ट से मुलाकात की। भोजनमाताओं ने जब अपनी समस्याओं को रखा तो पहले तो बड़ी बेरुखी से बात करते हुए उन्होंने कहा कि ये तख्तियां-बैनर लेकर क्यों आई हो और फिर कहा कि जो 1 हजार रुपये बढ़े थे वो हमने ही बढ़ाए थे। जब भोजनमाताओं ने इस पर बहस की क्या 3 हजार रुपए में घर चलाया जा सकता है तब बाद में उन्होंने कहा कि ठीक है ‘‘मैं एक लैटर बनाकर मुख्यमंत्री जी को भेजूंगा जिसकी प्रतिलिपि आपको भी भेज दूंगा’’। नेताओं के वायदों पर यकीन करना वैसे भी मुश्किल है फिर भी यह समय ही बतायेगा कि वे अपनी बात के कितने पक्के निकलते हैं।

रामनगर- 5 अक्टूबर 2026 को रामनगर की भोजनमाताओं ने भाजपा के विधायक दीवान सिंह बिष्ट से मुलाकात की और अपना ज्ञापन दिया। विधायक दीवान सिंह विष्ट ने भोजनमाताओं की समस्याओं को सुना और कहने लगे कि तुम अतिरिक्त काम करती ही क्यों हो। जब भोजनमाताओं ने कहा कि हम मना करते हैं तो हमें निकालने की धमकी दी जाती है। फिर उन्होंने कहा कि अगर वेतन कम है तो काम ही क्यों कर रही हो छोड़ दो। इस पर भोजनमाताओं ने कहा कि आप हमारी समस्या का समाधान करने के बजाय हमसे बोल रहे हैं कि हम काम ही छोड़ दें तो हम खायेंगे क्या? इस पर उन्होंने कहा कि ठीक है हम समस्याओं का समाधान करेंगे और मैं एक लैटर बनाकर मुख्यमंत्री जी को भेजूंगा जिसकी प्रतिलिपि आपको भी भेज दूंगा। दीवान सिंह विष्ट का हाल भी कालाढूंगी के विधायक सरीखा ही है। इनके ऊपर भी सत्ता का नशा छाया हुआ है। 

ग्रामीण हरिद्वार- प्रगतिशील भोजनमाता संगठन के नेतृत्व में 11 अक्टूबर 2026 को ग्रामीण हरिद्वार क्षेत्र की भोजनमाताओं ने ग्राम जगजीतपुर पर एकत्रित होकर विधायक कार्यालय तक जुलूस निकाला तथा कांग्रेसी विधायक अनुपमा रावत से मिलकर उन्हें अपनी समस्याओं से अवगत कराया और अपनी मांगों से संबंधित एक ज्ञापन दिया। 
    
विधायक अनुपमा रावत ने कहा कि उन्होंने भोजनमाताओं का मानदेय बढ़ाने और अन्य मांगों को पूरा करने के लिए 12 अक्टूबर को होने वाली कैबिनेट की बैठक में मुख्यमंत्री को लैटर भेज दिया। इसके अलावा वह विधानसभा में भोजनमाताओं की समस्याओं को रखेंगी और अपने मांगपत्र में भोजनमाताओं की मांगों को जगह देंगी। अब ये समय ही बताएगा कि भोजनमाताओं की समस्याओं का समाधान होगा या केवल वायदे ही रह जाएंगे।
    
भोजनमाताओं का विधायक घेराव का यह अभियान जारी है। लेकिन अब तक इन विधायकों से मिलकर एक बात स्पष्ट हो गई कि सत्ता पक्ष यानी भाजपा के विधायकों में भोजनमाताओं की समस्याओं के प्रति बेरुखी दिखी। भाजपा के विधायकों की भाषा, अपने क्षेत्र की महिलाओं से बात करने का तरीका बहुत खराब था जबकि विपक्षी पार्टियों या निर्दलीय विधायकों ने समस्याओं को अच्छे से सुना और भाजपा को कठघरे में खड़ा करने का काम किया। 
    
लेकिन यह बात भी तय है कि चाहे पक्ष या विपक्ष अगर आज भोजनमाताओं से बात करने को मजबूर हुए हैं तो ये आगामी 2027 का चुनाव है जिसमें इनको भोजनमाताओं के वोट चाहिए। ये बात अलग है कि जब भोजनमाताएं अपनी समस्याओं को रख रही थीं सभी विधायक यह दिखाने की कोशिश कर रहे थे कि जैसे उनको इस बारे में कुछ पता ही नहीं है। अगर अपने क्षेत्र की जनता की क्या समस्याएं हैं, ये उस क्षेत्र के विधायक को पता ही न हों तो उन विधायकों के लिए इससे ज्यादा शर्म की क्या बात होगी। -विशेष संवाददाता
 

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