मणिपुर की साम्प्रदायिक आग की चपेट में आता समूचा उ.-पूर्व
मणिपुर पिछले तीन महीनों से साम्प्रदायिक-नृजातीय दंगों की आग में जल रहा है। वीभत्स से वीभत्स घटनाएं इन दिनों मणिपुर में घटती रही हैं। कुकी महिलाओं के साथ मैतई आतंकी भीड़ ने
मणिपुर पिछले तीन महीनों से साम्प्रदायिक-नृजातीय दंगों की आग में जल रहा है। वीभत्स से वीभत्स घटनाएं इन दिनों मणिपुर में घटती रही हैं। कुकी महिलाओं के साथ मैतई आतंकी भीड़ ने
समान नागरिक संहिता यानी यू.सी.सी. के मुद्दे को मोदी और उनकी सरकार ने फिर से उछाल दिया है। इस बार, पी.एम.
पिछले महीनों में देश के अलग-अलग हिस्सों से कई बड़े ठग पकड़े गये हैं। इनकी विशेषता यह है कि ये नेताओं, व्यवसाईयों तथा सरकारी अफसरों को अपना निशाना बना रहे थे। कोई मंत्री बनव
भारत में पत्रकारों पर हमले अब आए दिन की बात बन गए हैं। राइट्स एंड रिस्क एनालिसिस ग्रुप के हालिया आंकड़े इस बात को और भी स्पष्ट करते हैं। इस ग्रुप ने आंकड़ों को इकट्ठा कर यह
बीते कुछ समय से समूचे उत्तराखण्ड में पुलिस का सत्यापन अभियान चल रहा है। इस सत्यापन अभियान के तहत पुलिस उत्तराखण्ड के बाहर के व्यक्तियों, किरायेदारों, दुकानदारों, फड़-ठेली
रामकथा कहने वाली वाल्मीकि रामायण के बाद कई सारी रामायण आ चुकी हैं। एक शोधकर्ता रामानुजन ने तो दुनिया भर में तीन सौ रामायण का दावा करते हुए किताब लिखी है जिसे हिन्दू फासीव
प्रधानमंत्री मोदी ने अमेरिका यात्रा से लौटते ही एक बार फिर समान नागरिक संहिता का राग छेड़ दिया है। वर्तमान समय में इस मुद्दे को उठाने का भाजपा का लक्ष्य एकदम स्पष्ट है। इस
नई संसद में मोदी सरकार ने अखण्ड भारत का नक्शा लगवाया है। इस नक्शे के जरिये हिन्दू फासीवादियों ने मानो इस बात का खुलेआम एलान कर दिया है कि उनके फासीवादी हिन्दू राष्ट्र में पाक-अफगानिस्तान से लेकर बा
अलवर की एक अदालत ने 25 मई को एक फैसला सुनाया। यह फैसला था 20 जुलाई 2020 को रकबर खान की कथित गौ रक्षकों द्वारा लिंचिंग किये जाने के सम्बन्ध में। फैसले में 4 आरोपियों को 7 साल की सजा सुनायी गयी और मु
अठारहवीं सदी के इंग्लैण्ड में होने वाले चुनावी भ्रष्टाचार पर गूगल से ‘सर्च’ करने पर उसका ए आई स्वतः ही यह जवाब हाजिर कर देता हैः
एस.आई.आर. प्रक्रिया के दौरान बड़े पैमाने पर मतदाताओं की कटौती की गई। अब तक 13 करोड़ से ज्यादा मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटा दिए गए। जबकि 5-6 करोड़ लोगों को संदेह की आड़ में नोटिस भेजे गए। 13 करोड़ में से 70 प्रतिशत वो लोग थे जिन्हें स्थानांतरित या अनुपस्थित बता दिया गया। इस तरह बड़े स्तर पर मनमानी छंटनी की जा रही है। इसमें सबसे बड़ी संख्या अल्पसंख्यक, दलित, आदिवासी, महिलाओं और मलिन बस्तियों में रहने वालों की है।
इस मजदूर आंदोलन की विचारधारा मार्क्सवाद का यह स्पष्ट कहना था कि महान फ्रांसीसी क्रांति के जमाने से ही पूंजीपति वर्ग ने अपने समाज के लिए जो आदर्श घोषित कर रखा है- स्वतंत्रता, समता, बंधुत्व का आदर्श- वह पूंजीवाद की निजी सम्पत्ति के कारण कभी भी हासिल नहीं किया जा सकता। पूंजी के रूप में निजी सम्पत्ति के रहते स्वतंत्रता का मतलब होगा बाजार में खरीद-बेच की स्वतंत्रता, समता का मतलब होगा बाजार में खरीददार व विक्रेता की समता तथा बंधुत्व का मतलब होगा खरीद-बेच की व्यवस्था पर सहमति।
गाजापट्टी में इजरायल की कत्लेआम करने की मुहिम जारी है। इजरायली यहूदी नस्लवादी न तो किसी समझौते को मान रहे हैं और न ही वे अपनी विनाश लीला को रोक रहे हैं। वे नस्लीय सफाये की मुहिम चला रहे हैं। इसके जवाब में हमास और अन्य प्रतिरोध संगठन इजरायली कब्जाकारी सेना पर प्रहार कर रहे हैं।
अपने व्यापक नुकसान को देखते हुए अमरीकी साम्राज्यवादियों ने अप्रैल महीने में युद्ध विराम किया और फिर पाकिस्तान की मध्यस्थता में एक ज्ञापन समझौता किया। इस ज्ञापन समझौते में अधिकांशतः ईरान की मांगें स्वीकार की गयीं। यह वस्तुतः अमरीका की पराजय थी। इस समझौते के थोड़े ही दिनों बाद अमरीका ने इसका उल्लंघन शुरू कर दिया। इजरायल ने एक भी दिन इस समझौते को नहीं माना।