एक देश एक चुनाव : फासीवादी परियोजना
हाल ही में सरकार द्वारा संसद का विशेष सत्र बुलाने की घोषणा के साथ ही इसके एजेण्डे को लेकर पूंजीवादी हलकों में तरह-तरह के अनुमान लगाये जाते रहे हैं। इसी बीच सरकार द्वारा ‘
हाल ही में सरकार द्वारा संसद का विशेष सत्र बुलाने की घोषणा के साथ ही इसके एजेण्डे को लेकर पूंजीवादी हलकों में तरह-तरह के अनुमान लगाये जाते रहे हैं। इसी बीच सरकार द्वारा ‘
‘‘हमारे देश में सामाजिक असमानता का एक इतिहास रहा है।...हमने अपने साथी इंसानों को सामाजिक व्यवस्था में पिछड़ा बनाये रखा। वे जानवरों की तरह रहते रहे और हमने उनकी परवाह नहीं
मोदी सरकार द्वारा भारत में बहुप्रचारित जी-20 का शिखर सम्मेलन रूसी व चीनी राष्ट्रपति की अनुपस्थिति में सम्पन्न हो गया। रूस व चीन के राष्ट्रपति की अनुपस्थिति में ऐसा दबाव त
हिन्दू फासीवादियों की केन्द्रीय सरकार ने भारत के आपराधिक कानूनों को बदलने की घोषणा कर दी है। भारतीय दंड संहिता, आपराधिक प्रक्रिया संहिता तथा भारतीय साक्ष्य अधिनियम को बदल
अभी ज्यादा दिन नहीं बीते जब रेलवे के पुलिसकर्मी चेतन ने चलती ट्रेन में अपने अधिकारी और मुस्लिम समुदाय के तीन लोगों की हत्या कर दी थी। तब उस पुलिसकर्मी को बचाने के लिए उसक
जी-20 का शिखर सम्मेलन 9-10 सितम्बर को दिल्ली में होना है। पर इसकी बैठकें साल भर से बीसियों शहरों में होती रही हैं। सितम्बर माह की हाई प्रोफाइल बैठकें नई दिल्ली, मुंबई, वा
हिन्दू फासीवादियों ने सेना को ऐसी पवित्र गाय बना रखा है जिस पर कोई सवाल नहीं उठाया जा सकता। लेकिन अब वे अपने स्वार्थों के वशीभूत स्वयं ही उस पर सवाल उठा रहे हैं।
इस वर्ष 15 अगस्त को लाल किले से प्रधानमंत्री मोदी ने बीते 10 वर्षों के अपने शासन की तारीफों के पुल बांधते हुए कहा कि आज नया भारत बन रहा है जो न रुक सकता है न थकता है न हा
6 अगस्त 2023 को इंकलाबी मजदूर केंद्र से योगेश और राजू, राष्ट्रीय मतदाता परिषद से सतीश मराठा जी और स्वराज इंडिया से तनवीर अहमद जी की एक सामूहिक टीम फैक्ट फाइंडिंग के लिए न
अठारहवीं सदी के इंग्लैण्ड में होने वाले चुनावी भ्रष्टाचार पर गूगल से ‘सर्च’ करने पर उसका ए आई स्वतः ही यह जवाब हाजिर कर देता हैः
एस.आई.आर. प्रक्रिया के दौरान बड़े पैमाने पर मतदाताओं की कटौती की गई। अब तक 13 करोड़ से ज्यादा मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटा दिए गए। जबकि 5-6 करोड़ लोगों को संदेह की आड़ में नोटिस भेजे गए। 13 करोड़ में से 70 प्रतिशत वो लोग थे जिन्हें स्थानांतरित या अनुपस्थित बता दिया गया। इस तरह बड़े स्तर पर मनमानी छंटनी की जा रही है। इसमें सबसे बड़ी संख्या अल्पसंख्यक, दलित, आदिवासी, महिलाओं और मलिन बस्तियों में रहने वालों की है।
इस मजदूर आंदोलन की विचारधारा मार्क्सवाद का यह स्पष्ट कहना था कि महान फ्रांसीसी क्रांति के जमाने से ही पूंजीपति वर्ग ने अपने समाज के लिए जो आदर्श घोषित कर रखा है- स्वतंत्रता, समता, बंधुत्व का आदर्श- वह पूंजीवाद की निजी सम्पत्ति के कारण कभी भी हासिल नहीं किया जा सकता। पूंजी के रूप में निजी सम्पत्ति के रहते स्वतंत्रता का मतलब होगा बाजार में खरीद-बेच की स्वतंत्रता, समता का मतलब होगा बाजार में खरीददार व विक्रेता की समता तथा बंधुत्व का मतलब होगा खरीद-बेच की व्यवस्था पर सहमति।
गाजापट्टी में इजरायल की कत्लेआम करने की मुहिम जारी है। इजरायली यहूदी नस्लवादी न तो किसी समझौते को मान रहे हैं और न ही वे अपनी विनाश लीला को रोक रहे हैं। वे नस्लीय सफाये की मुहिम चला रहे हैं। इसके जवाब में हमास और अन्य प्रतिरोध संगठन इजरायली कब्जाकारी सेना पर प्रहार कर रहे हैं।
अपने व्यापक नुकसान को देखते हुए अमरीकी साम्राज्यवादियों ने अप्रैल महीने में युद्ध विराम किया और फिर पाकिस्तान की मध्यस्थता में एक ज्ञापन समझौता किया। इस ज्ञापन समझौते में अधिकांशतः ईरान की मांगें स्वीकार की गयीं। यह वस्तुतः अमरीका की पराजय थी। इस समझौते के थोड़े ही दिनों बाद अमरीका ने इसका उल्लंघन शुरू कर दिया। इजरायल ने एक भी दिन इस समझौते को नहीं माना।