फासीवाद / साम्प्रदायिकता,

आपातकाल : तब और अब

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पिछले दस-बारह सालों में हिन्दू फासीवादियों ने इस अनौपचारिक आपातकाल की शैली को काफी विकसित किया है। कहां किस छेद का इस्तेमाल करना है, इसमें उन्होंने महारत हासिल की है। इनके इस कृत्य में न्यायपालिका की सहभागिता से यह काम और आसान हो गया है। मतदाता सूची का विशेष गहन पुनर्रीक्षण इस सबका विशिष्ट उदाहरण है।

उत्तराखंड में ‘आनर किलिंग’ के तहत दलित युवक की बेरहमी से हत्या

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उत्तराखंड में ‘आनर किलिंग’ के तहत एक दलित युवक की बेरहमी से हत्या ने हमारे समाज में मौजूद जाति के कोढ़ को एक बार फिर सामने ला दिया है। टिहरी के देवल गांव के 18 वर्षीय केतन

हरिद्वार में ‘वेज बिरयानी’ विवाद: भोजन के नाम पर राजनीति

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हाल के दिनों में हरिद्वार में कुछ दक्षिणपंथी और धार्मिक संगठनों (अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद, परशुराम अखाड़ा आदि) ने ‘वेज बिरयानी’ नाम के खिलाफ अभियान चलाया है। दुकानों और ठेल

युवाओं के आक्रोश से दहला पाटलिपुत्र स्टेशन

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भारत में पढ़े-लिखे युवाओं में बेकारी की समस्या विस्फोटक स्तर तक बढ़ चुकी है। छात्रों-युवाओं की रोजगार को लेकर बेचैनी लगातार बढ़ती जा रही है। इस बेचैनी का एक नमूना बीते दिनों

युवाओं के आक्रोश से दहला पाटलिपुत्र स्टेशन

भारत में पढ़े-लिखे युवाओं में बेकारी की समस्या विस्फोटक स्तर तक बढ़ चुकी है। छात्रों-युवाओं की रोजगार को लेकर बेचैनी लगातार बढ़ती जा रही है। इस बेचैनी का एक नमूना बीते दिनों

मोदी की नार्वे यात्रा

भारत के प्रधानमंत्री मोदी की नार्वे यात्रा काफी चर्चित रही। इस अचानक की गयी यात्रा के उद्देश्य और वहां नार्वे की पत्रकार के प्रश्न पर मोदी की चुप्पी दोनों चर्चा में रहे।

हिंदू फासीवादियों के मनमुताबिक कोर्ट का फैसला

अंततः वही हुआ जिसकी उम्मीद थी। विशेष गहन पुनरीक्षण संवैधानिक है या नहीं, इस मामले पर सुप्रीम कोर्ट में याचिका पिछले साल लगी थी। यह मुख्य न्यायाधीश सूर्यकान्त और जोयमाला ब

योगी और यूनियन

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योगी यानी बुलडोजर बाबा को खास तरह की यूनियन से चिढ़ है, सख्त नफरत है और उनका बस चले तो वो यूनियनों को खत्म करवा दें। यूनियन यानी एक रूप में संगठन या संगठित समूह से नफरत को

एक तीर जो ठीक निशाने पर लगा

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‘काॅकरोच जनता पार्टी’ (सीजेपी) की राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आर एस एस) ने बहुुत तीखी आलोचना की है। अपने मुखपत्र आर्गनाइजर में ‘काॅकरोच सिंड्रोम: भारत विरोधी तकनीकी संशयवाद

एक और पेपर लीक: छात्र आक्रोशित

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पूरे देश भर में मेडिकल स्नातक पाठ्यक्रम में प्रवेश के लिए आयोजित नीट की परीक्षा पेपर लीक की वजह से रद्द कर दी गयी है। 3 मई को हुई इस परीक्षा में लगभग 23 लाख छात्रों ने हि

आलेख

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अठारहवीं सदी के इंग्लैण्ड में होने वाले चुनावी भ्रष्टाचार पर गूगल से ‘सर्च’ करने पर उसका ए आई स्वतः ही यह जवाब हाजिर कर देता हैः 

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एस.आई.आर. प्रक्रिया के दौरान बड़े पैमाने पर मतदाताओं की कटौती की गई। अब तक 13 करोड़ से ज्यादा मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटा दिए गए। जबकि 5-6 करोड़ लोगों को संदेह की आड़ में नोटिस भेजे गए। 13 करोड़ में से 70 प्रतिशत वो लोग थे जिन्हें स्थानांतरित या अनुपस्थित बता दिया गया। इस तरह बड़े स्तर पर मनमानी छंटनी की जा रही है। इसमें सबसे बड़ी संख्या अल्पसंख्यक, दलित, आदिवासी, महिलाओं और मलिन बस्तियों में रहने वालों की है।

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इस मजदूर आंदोलन की विचारधारा मार्क्सवाद का यह स्पष्ट कहना था कि महान फ्रांसीसी क्रांति के जमाने से ही पूंजीपति वर्ग ने अपने समाज के लिए जो आदर्श घोषित कर रखा है- स्वतंत्रता, समता, बंधुत्व का आदर्श- वह पूंजीवाद की निजी सम्पत्ति के कारण कभी भी हासिल नहीं किया जा सकता। पूंजी के रूप में निजी सम्पत्ति के रहते स्वतंत्रता का मतलब होगा बाजार में खरीद-बेच की स्वतंत्रता, समता का मतलब होगा बाजार में खरीददार व विक्रेता की समता तथा बंधुत्व का मतलब होगा खरीद-बेच की व्यवस्था पर सहमति।

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गाजापट्टी में इजरायल की कत्लेआम करने की मुहिम जारी है। इजरायली यहूदी नस्लवादी न तो किसी समझौते को मान रहे हैं और न ही वे अपनी विनाश लीला को रोक रहे हैं। वे नस्लीय सफाये की मुहिम चला रहे हैं। इसके जवाब में हमास और अन्य प्रतिरोध संगठन इजरायली कब्जाकारी सेना पर प्रहार कर रहे हैं। 

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अपने व्यापक नुकसान को देखते हुए अमरीकी साम्राज्यवादियों ने अप्रैल महीने में युद्ध विराम किया और फिर पाकिस्तान की मध्यस्थता में एक ज्ञापन समझौता किया। इस ज्ञापन समझौते में अधिकांशतः ईरान की मांगें स्वीकार की गयीं। यह वस्तुतः अमरीका की पराजय थी। इस समझौते के थोड़े ही दिनों बाद अमरीका ने इसका उल्लंघन शुरू कर दिया। इजरायल ने एक भी दिन इस समझौते को नहीं माना।