फासीवाद / साम्प्रदायिकता,

पश्चिम बंगाल में भाजपाइयों का आतंक

/west-bangal-mein-bhajapaiyon-ka-aatank

एक जुलाई को पश्चिम बंगाल के नादिया जिले में महुआ मोइत्रा के स्थानीय ट्रांजिट पार्टी कार्यालय पर हमला हुआ। यह कार्यालय राष्ट्रीय राजमार्ग के किनारे स्थित है जहां संघी भाजप

बंगाल: हिंसा-तांडव से नई प्रयोगशाला बनाते संघी

/bangal-hinsa-tandav-se-nai-lab-banate-sanghi

पश्चिम बंगाल में जबसे भाजपा सत्तासीन हुई है उसने हिंसा-तांडव का जो नंगा नाच शुरू किया है उसके आगे तृणमूल शासन व माकपा शासन की सारी गुण्डागर्दी छोटी पड़ गयी है। संघ-भाजपा अ

‘‘कहां हमारे राम, कहां इनके राम’’

/kahaan-hamare-ram-kahan-inake-ram

घोटाले कई तरह के होते हैं। ‘आर्थिक घोटाला’, ‘राजनैतिक घोटाला’, ‘न्यायिक घोटाला’, ‘प्रशासनिक घोटाला’, ‘बौद्धिक घोटाला’, ‘साहित्यिक घोटाला’ वगैरह, वगैरह। क्या कोई ये सब घोट

IITs में ट्रोजन हार्स ने सेंध लगाई है -वासुदेवन मुकुंथ

/iits-mein-trozen-horse-ne-seindh-lagaai-hai-vaasudevan-mukunth

पिछले कुछ दशकों से, ‘इंडियन नालेज सिस्टम’ (IKS) नाम का एक प्रोजेक्ट पारंपरिक भारतीय ज्ञान को आधुनिक शिक्षा के पाठ्यक्रम में शामिल करने की कोशिश कर रहा है। भारत के अपने बौ

बैरागीवाला घटनाक्रम को साम्प्रदायिक रंग देने की कोशिश

/bairagiwala-ghatanakram-ko-sampradayik-rang-dene-ki-koshish

(क्रांतिकारी लोक अधिकार संगठन, चेतना आंदोलन, उत्तराखंड महिला मंच, इंसानियत मंच, सी पी आई, सी पी एम, सी पी आई एम एल-लिबरेशन, मजदूर संघर्ष संगठन, तंजीम ए रहनुमा ए मिल्ल

नागरिकता और हिंदू फासीवादी

/citizenship-and-hindu-fascist

विशेष गहन पुनर्रीक्षण को थोपने और इसके जरिए मनमानी करने के बाद हिंदू फासीवादी अब नागरिकता के परीक्षण के लिए हालात बना रहे हैं। 
    

राम मंदिर चंदा चोरी: राम नाम की लूट है, लूट सके तो लूट

/ram-mandir-chanda-chori-ram-naam-ki-loot-hai-loot-sake-to-loot

कहते हैं कि रामराज्य में एक धोबी के सवाल पर भी राजा राम ने जवाब दिया था। लेकिन कलियुग के इस नए रामराज्य में करोड़ों भक्त सवाल पूछ रहे हैं और जवाब में उन्हें टीवी डिबेट, प्

मोदी और भागवत के मुंह में दही जम जाना

/modi-and-bhagawat-ke-munh-mein-dahi-jam-jana

हमारे देश में धर्म, राष्ट्रवाद, नैतिकता, संस्कृति, संस्कार आदि के दो सबसे बड़े ठेकेदार हैं। एक श्रीमान मोदी जी हैं जो देश की सरकार चलाते हैं और अपनी पार्टी के अघोषित सर्वे

गुंडा विधेयक: बंगाल में दमन के नए हथकंडे अपनाती सरकार

/gunda-vidheyak-bangal-mein-daman-ke-naye-hathakande-apanati-government

पश्चिम बंगाल की भाजपा सरकार बंगाल को हिन्दुत्व की नई प्रयोगशाला बनाने पर उतारू है। इसी मकसद से 29 जून को विधानसभा में ‘पश्चिम बंगाल सार्वजनिक सुरक्षा और असामाजिक गतिविधि

आलेख

/punjivadi-jantantra-and-chunavi-corruption

अठारहवीं सदी के इंग्लैण्ड में होने वाले चुनावी भ्रष्टाचार पर गूगल से ‘सर्च’ करने पर उसका ए आई स्वतः ही यह जवाब हाजिर कर देता हैः 

/election-aayog-hindu-fascist-and-loktantra

एस.आई.आर. प्रक्रिया के दौरान बड़े पैमाने पर मतदाताओं की कटौती की गई। अब तक 13 करोड़ से ज्यादा मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटा दिए गए। जबकि 5-6 करोड़ लोगों को संदेह की आड़ में नोटिस भेजे गए। 13 करोड़ में से 70 प्रतिशत वो लोग थे जिन्हें स्थानांतरित या अनुपस्थित बता दिया गया। इस तरह बड़े स्तर पर मनमानी छंटनी की जा रही है। इसमें सबसे बड़ी संख्या अल्पसंख्यक, दलित, आदिवासी, महिलाओं और मलिन बस्तियों में रहने वालों की है।

/uddharak-ideology-ki-talaas

इस मजदूर आंदोलन की विचारधारा मार्क्सवाद का यह स्पष्ट कहना था कि महान फ्रांसीसी क्रांति के जमाने से ही पूंजीपति वर्ग ने अपने समाज के लिए जो आदर्श घोषित कर रखा है- स्वतंत्रता, समता, बंधुत्व का आदर्श- वह पूंजीवाद की निजी सम्पत्ति के कारण कभी भी हासिल नहीं किया जा सकता। पूंजी के रूप में निजी सम्पत्ति के रहते स्वतंत्रता का मतलब होगा बाजार में खरीद-बेच की स्वतंत्रता, समता का मतलब होगा बाजार में खरीददार व विक्रेता की समता तथा बंधुत्व का मतलब होगा खरीद-बेच की व्यवस्था पर सहमति।

/war-and-diplomacy-uthal-puthal-se-bhari-duniyaa

गाजापट्टी में इजरायल की कत्लेआम करने की मुहिम जारी है। इजरायली यहूदी नस्लवादी न तो किसी समझौते को मान रहे हैं और न ही वे अपनी विनाश लीला को रोक रहे हैं। वे नस्लीय सफाये की मुहिम चला रहे हैं। इसके जवाब में हमास और अन्य प्रतिरोध संगठन इजरायली कब्जाकारी सेना पर प्रहार कर रहे हैं। 

/amerika-ka-iran-par-operation-d-day-hatasha-ka-parinam

अपने व्यापक नुकसान को देखते हुए अमरीकी साम्राज्यवादियों ने अप्रैल महीने में युद्ध विराम किया और फिर पाकिस्तान की मध्यस्थता में एक ज्ञापन समझौता किया। इस ज्ञापन समझौते में अधिकांशतः ईरान की मांगें स्वीकार की गयीं। यह वस्तुतः अमरीका की पराजय थी। इस समझौते के थोड़े ही दिनों बाद अमरीका ने इसका उल्लंघन शुरू कर दिया। इजरायल ने एक भी दिन इस समझौते को नहीं माना।