सिडकुल हरिद्वार : हेमिल्टन मजदूरों की दशा

Published
Fri, 01/16/2026 - 07:17
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हरिद्वार/ हेमिल्टन हाउसवेयर्स प्राइवेट लिमिटेड (Hamilton Housewares Pvt. Ltd.) भारत में किचनवेयर जैसे पानी की बोतलें, लंच बाक्स, कैसरोल और अन्य घरेलू उत्पाद बनाती है, जिसकी स्थापना 1972 में हुई थी और यह देश भर में अपने उत्पादों के लिए जानी जाती है। इसके तीन प्लांट तो सिडकुल, हरिद्वार में स्थित हैं और पिपरिया, दमन और दीव और दादर और नगर हवेली में अन्य प्लांट हैं। राखोली और सायली में केन्द्रीय व्यापार इकाईयां हैं। ब्रिकी और पंजीकृत कार्यालय मुंबई, नई दिल्ली, गुवाहाटी, चेन्नई, हैदराबाद और कोलकाता आदि शहरों में स्थित हैं। 
    
सिडकुल हरिद्वार के तीनों प्लांटों में लगभग 5000 मजदूर कार्यरत हैं। इसमें काम करने वाले 18 साल से लेकर 30 साल की उम्र वाले मजदूर हैं। जिसमें आधी संख्या महिला मजदूरों की है। जिसमें 10 प्रतिशत ही मजदूर स्थायी हैं बाकी सब ठेकेदारी के मजदूर हैं। इन ठेकादारी के मजदूरों को न्यूनतम वेतन के अलावा कुछ नहीं मिलता है। काम का बोझ इतना अधिक है कि मजदूरों को पानी और पेशाब तक की फुर्सत तक नहीं मिलती है। उत्पादन में बाधा न पड़े इसके लिए ज्यादा मजदूरों की भर्ती कर रखी है। सुबह ड्यूटी के समय सभी मजदूरों को आधे घंटे पहले आना पड़ता है और लंबी लाइनों में लगकर अपने टोकन का इंतजार करना होता है। अगर टोकन मिल गया तो समझो आज दिहाड़ी बन जायेगी। नहीं मिला तो घर लौटना पड़ता है और अगले दिन जल्दी कम्पनी गेट पर पहुंच जाने की सोच से पूरा दिन गुजारना होता है। रोज दर्जनों मजदूर टोकन न मिलने के कारण कम्पनी गेट से लौटा दिये जाते हैं। मजदूर कहते हैं कि आज लाइन पर मजदूर पूरे हो चुके हैं या काम कम है इसलिए उन्हें लौटा दिया गया। मजदूर सुबह भागते हुए कम्पनी पहुंचते हैं कि कहीं ड्यूटी न छूट जाये। इसी कारण अक्टूबर 2025 में दिवाली के समय एक महिला मजदूर को बाईक वाले ने टक्कर मार दी और कम्पनी गेट के सामने उसकी जान चली गई। खाना बनाओ और लंच लेकर काम पर जाओ, काम न मिले तो लौट जाओ। दिहाड़ी मजदूरों जैसी स्थिति बन चुकी है हेमिल्टन के मजदूरों की। 
    
असेम्बली लाईनों से लेकर मशीनों पर काम करने वाले मजदूरों के काम का चरित्र अलग-अलग है। सी एन सी मशीनों पर काम करने वाले आपरेटरों का हाथ और अंगुलियां कटती रहती हैं। कई जगह गर्म भट्ठियां जलती हैं वहां काम करने वाले मजदूरों का अक्सर हाथ-अंगुलियां जल जाती हैं। 
    
90 प्रतिशत मजदूरों को ठेके पर रख कर स्थाई प्रकृति का काम कराया जा रहा है। प्रबंधन वर्ग खुलेआम श्रम कानूनों का उल्लंघन कर रहा है। वेतन भी 26 दिन की जगह 30 दिन के हिसाब से मिलता है। मजदूरों को न कोई छुट्टियां, न बोनस, न जूता, न वर्दी जैसी प्राथमिक सुविधाएं मिलती हैं। ठेकेदार वर्दी देते भी हैं तो बजार की कीमत से ज्यादा पैसे काट लेते हैं। 
    
मजदूरों के साथ धार्मिक आधार पर भेदभाव किया जा रहा है। कुछ सालों से मुस्लिम मजदूरों को काम पर नहीं रखा जा रहा है। अगर कुछ काम कर भी रहे हैं तो उनके साथ भेदभाव-उत्पीड़न कर निकाल दिया जा रहा है। सिडकुल पेन्टागन मॉल के पीछे वाले प्लाट में तो ईद पर छुट्टी गयी कई महिला मजदूरों को काम से निकाल दिया गया। उन्हें हिसाब तक नहीं मिला। इन समस्याओं को लेकर मजदूरों में कभी-कभार गुस्सा भी फूटता रहा है लेकिन गुंडा टाइप के ठेकेदारों द्वारा कम्पनी के अंदर मजदूरों को मारा-पीटा जाता है। एक तरह से खुली लूट व गुंडागर्दी कम्पनी के मैनेजमेंट व ठेकेदार करते हैं।
    
अपने शोषण-उत्पीड़न के खिलाफ हेमिल्टन के मजदूरों को एकता बना कर लड़ना पड़ेगा। 
          -हरिद्वार संवाददाता

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