विविध

छात्र-नौजवानों पर लाठीचार्ज के विरोध में प्रदर्शन

उत्तराखंड में आए दिन भर्ती घोटाले खुलते ही जा रहे हैं। भर्ती घोटालों की सीबीआई जांच कराने, ‘पहले जांच, फिर परीक्षा’ और नकल विरोधी कानून बनाने की मांग जोर पकड़ रही हैं। पारदर्शी तरीके से परीक्षा करान

प्रोटेरियल (हिताची) के मजदूरों का आगे बढ़ता हुआ आंदोलन

गुड़गांव/ प्रोटेरियल (हिताची) के ठेका मजदूरों ने अपना सामूहिक मांग पत्र जुलाई 2022 में श्रम विभाग में डाला था। कंपनी में मालिकाना हिताची से प्रोटेरियल को ट्रांसफर होना था। मजदूरों क

संयुक्त किसान मोर्चा के आह्वान पर बदायूं में ट्रैक्टर मार्च

बदायूं/ 26 जनवरी गणतंत्र दिवस के अवसर पर भारतीय किसान यूनियन (टिकैत) के द्वारा बदायूं में ट्रैक्टर मार्च का आयोजन किया गया। बदायूं में ए आर टी ओ आफिस के पास 11 बजे से ही ट्रैक्टर ल

बेलसोनिका यूनियन पर राजनीतिक हमले के विरोध में मजदूर सम्मेलन

गुड़गांव/ गुड़गांव-मानेसर की बेलसोनिका यूनियन को रजिस्ट्रार ट्रेड यूनियन, हरियाणा द्वारा यूनियन का रजिस्ट्रेशन रद्द करने की धमकी के साथ जारी कारण बताओ नोटिस के विरुद्ध मजदूरों का आक्

व्यक्तिगत सफलता और सामाजिक मुक्ति

जैसे-जैसे अंतर्राष्ट्रीय श्रमिक महिला दिवस (आठ मार्च का दिन) करीब आता जाता है वैसे-वैसे पूंजीवादी मीडिया में ऐसी महिलाओं की कहानियों को सुर्खी बनाकर छापा जाता है जिन्होंने अपने व्यक्तिगत जीवन में व

ठंड में बेघर लोग कहां जायें?

दिसंबर के आखिरी हफ्ते में कड़ाके की ठंड पड़ रही है। दिल्ली एनसीआर में शीत लहर चल रही है और पारा 6 डिग्री सेल्सियस तक गिर गया है। इस कड़कड़ाती ठंड में जब घरों के अंदर रजाई-कंबल में भी रहना मुश्किल हो रह

साम्राज्यवादियों के बीच टकराहट का मैदान - अफ्रीका महाद्वीप

अमरीकी राष्ट्रपति जो बाइडेन ने 13-15 दिसम्बर को अफ्रीकी महाद्वीप के 49 शासनाध्यक्षों और राज्याध्यक्षों की शीर्ष बैठक वाशिंगटन डीसी में आयोजित की। इन 49\ देशों के अलावा अफ्रीकी संघ के प्रतिनिधि को भ

‘समान नागरिक संहिता’: एक हिन्दू फासीवादी कुचक्र

पिछले समय में हिन्दू फासीवादियों की ओर से समान नागरिक संहिता की बातें एक बार फिर बहुत जोर-शोर से होने लगी हैं। कई भाजपा शासित प्रदेशों में इस संबंध में विधेयक लाने की बात हो रही है। गुजरात के हाल क

म्बाप्पे के बहाने

फुटबाल विश्व कप 2022 का फाइनल वैसे तो दक्षिण अमेरिकी देश अर्जेण्टीना की टीम जीत कर गयी लेकिन हार कर दूसरे नम्बर पर रह गयी फ्रांस की टीम व इसके खिलाड़ियों की, विशेष कर इस पूरे विश्व कप में सबसे अधिक

आलेख

/west-asia-mein-badalata-shakti-santulan-samajhautaa-gyapan-ke-baad-ki-sthiti

अमरीकी साम्राज्यवादी और इजरायली शासक सोचते थे कि ईरान के शीर्ष नेतृत्व का सफाया करने के बाद ईरानी जनता अपनी सत्ता के विरुद्ध उठ खड़ी होगी और इसका फायदा उठाते हुए अमरीकी साम्राज्यवादी अपनी किसी कठपुतली को सत्ता में स्थापित कर देंगे। लेकिन ऐसा नहीं हुआ। ईरानी अवाम अपनी सत्ता के समर्थन में मजबूती से खड़ी हो गई। यहां से अमरीकी साम्राज्यवादियों को समझ में आ गया कि वे ईरान पर कब्जा नहीं कर सकते।

/war-anay-sadhanon-se-politics-ka-hi-jaari-roop-hai

अमेरिकी साम्राज्यवादी पश्चिम एशिया में और सारी दुनिया में अपनी साम्राज्यवादी जकड़न को खत्म नहीं होने देना चाहेंगे। वे इसके खिलाफ हर संभव प्रयास करेंगे। एक हमले में मुंह की खाने के बाद वे सबक लेकर आगे हमला करने से तौबा नहीं करेंगे। यह उनकी साम्राज्यवादी फितरत के खिलाफ होगा। यानी वे ईरान पर काबू पाने के लिए दूसरे तरीकों की खोज में लग जायेंगे।

/emerjency-tab-aur-ab

पिछले दस-बारह सालों में हिन्दू फासीवादियों ने इस अनौपचारिक आपातकाल की शैली को काफी विकसित किया है। कहां किस छेद का इस्तेमाल करना है, इसमें उन्होंने महारत हासिल की है। इनके इस कृत्य में न्यायपालिका की सहभागिता से यह काम और आसान हो गया है। मतदाता सूची का विशेष गहन पुनर्रीक्षण इस सबका विशिष्ट उदाहरण है।

/piketi-ka-global-justice-project-samraajyavad-ki-pairokari

जैसा कि इंटरव्यू के शीर्षक से स्पष्ट है कि पिकेटी एक ऐसी दुनिया का ख्वाब परोसते हैं जिसमें बगैर पर्यावरण को नुकसान पहुंचाये ज्यादातर लोग खुशहाल बन सकते हैं। इस सुन्दर दुनिया को हासिल करने के लिए वे किसी वर्ग संघर्ष बढ़ाने या क्रांति की वकालत नहीं करते। बल्कि वे कुछ नुस्खे सुझाते हैं जिस पर चल कर मौजूदा पूंजीवादी-साम्राज्यवादी दुनिया को ही खुशनुमा बनाया जा सकता है। 

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अमरीकी साम्राज्यवादी वर्चस्व को बढ़ाने में पश्चिम एशिया में दृढ़ स्तम्भ इजरायल रहा है। 1979 से पहले ईरान का शासक शाह रजा पहलवी  भी इस क्षेत्र में अमरीका का लठैत रहा है। 1979 में रजा पहलवी का तख्ता उलटने के बाद जो इस्लामी सत्ता आयी, वह लगातार अमरीकी साम्राज्यवाद की वर्चस्ववादी नीतियों का विरोध करती रही थी। यह सत्ता इजरायल द्वारा फिलिस्तीनियों को उजाड़े जाने और उनकी जमीनों पर यहूदी बस्तियां बसाने का विरोध करती रही है।