विविध

राजनीतिक लाभ के लिए सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ते भाजपाई

/political-laabh-ke-liye-sampradaayik-sauhaard-bigaadate-bhajapaai

हल्द्वानी/ विगत 16 नवम्बर को हल्द्वानी के बनभूलपुरा थाना क्षेत्र के उजाला नगर में मंदिर के पास बछड़े का सिर मिलने की खबर फैली। खबर फैलते ही इसे साम्प्रदाय

नई श्रम संहिताएं : मजदूर वर्ग पर बोला गया तीखा व क्रूर हमला

/new-labour-code-majdoor-varg-par-bolaa-gayaa-teekhaa-v-kroor-hamala

21 नवम्बर को मोदी सरकार ने जबरदस्त इश्तिहारबाजी के साथ चार नई श्रम संहिताओं (लेबर कोड्स) के लागू होने की घोषणा की। ये श्रम संहिताएं वर्ष 2019 व 2020 में संसद द्वारा पारित

बेल्जियम : कटौती कार्यक्रम के विरोध में हड़ताल

/belzium-austerity-programme-ke-virodh-mein-strike

बेल्जियम की एरिजोना सरकार मजदूर वर्ग पर नये हमले बोल रही है। एक ओर सरकार सैन्यीकरण पर खर्च बढ़ा रही है तो दूसरी ओर मजदूरों-कर्मचारियों के पेंशन, वेतन पर हमले के साथ सार्वज

4 लेबर कोड्स लागू होने का देशव्यापी विरोध

/4-labour-code-laagoo-hone-kaa-deshvyaapi-virodh

मजदूर अधिकार संघर्ष अभियान (मासा) द्वारा संयुक्त किसान मोर्चा एवं केंद्रीय ट्रेड यूनियन फेडरेशनों के आह्वान पर मोदी सरकार द्वारा मजदूर विरोधी चार नये लेबर कोड्स लागू किये

आतंकवाद के नाम पर मजदूरों को आतंकित करने की कोशिश

/terrosim-ke-name-par-majdooron-ko-atankita-karane-ki-koshish

दिल्ली लाल किले के पास विस्फोट और कश्मीर में हुई हालिया विस्फोट की घटना के बाद पूरे देश में आतंकवाद के नाम पर सरकार द्वारा आतंक कायम किया जा रहा है। अल्पसंख्यकों के खिलाफ

उत्तराखंड उपनल संविदाकर्मियों का आंदोलन

/uttarakhand-upnl-contract-workers-ka-strike

देहरादून/ उत्तराखंड में उपनल (उत्तराखंड पूर्व सैनिक कल्याण निगम लिमिटेड) के 22,000 से अधिक संविदा कर्मचारी लंबे समय से नियमितीकरण और समान वेतन की मांग कर रहे हैं। इस बीच अलग-अलग वक

वेतन वृद्धि समझौता के लिए किर्बी के मजदूरों का संघर्ष तेज

/salary-increament-samajhauta-ke-liye-kirbi-ke-majadooron-ka-struggle-tej

हरिद्वार/ किर्बी श्रमिक कमेटी द्वारा पूर्व में घोषित कार्यक्रम के अनुसार दिनांक 21 नवंबर और 28 नवंबर को प्रातः 10 बजे चिन्मय डिग्री कालेज से पूरे सिडकुल

महान अक्टूबर समाजवादी क्रांति के अवसर पर विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन

/great-otober-samajavadi-kranti-ke-awasar-par-vibhinna-programmes

महान अक्टूबर समाजवादी क्रांति ने मानव इतिहास में एक नये युग की शुरुआत की थी। महान लेनिन और बोलशेविक पार्टी के नेतृत्व में 1917 में रूस में संपन्न हुई इस क्रांति ने इतिहास में पहली बार किसी एक देश क

भोजनमाताओं ने विकास के पाखण्ड की पोल खोली

/bhojanmataaon-ne-vikaas-ke-pakhand-ki-pol-kholi

उत्तराखंड राज्य गठन के 25 साल पूरे होने पर 9 नवम्बर को प्रगतिशील भोजनमाता संगठन द्वारा रामनगर, हरिद्वार और लालकुंआ में सभायें कर धामी सरकार पर अमानवीय शोषण करने का आरोप ल

आलेख

/west-asia-mein-badalata-shakti-santulan-samajhautaa-gyapan-ke-baad-ki-sthiti

अमरीकी साम्राज्यवादी और इजरायली शासक सोचते थे कि ईरान के शीर्ष नेतृत्व का सफाया करने के बाद ईरानी जनता अपनी सत्ता के विरुद्ध उठ खड़ी होगी और इसका फायदा उठाते हुए अमरीकी साम्राज्यवादी अपनी किसी कठपुतली को सत्ता में स्थापित कर देंगे। लेकिन ऐसा नहीं हुआ। ईरानी अवाम अपनी सत्ता के समर्थन में मजबूती से खड़ी हो गई। यहां से अमरीकी साम्राज्यवादियों को समझ में आ गया कि वे ईरान पर कब्जा नहीं कर सकते।

/war-anay-sadhanon-se-politics-ka-hi-jaari-roop-hai

अमेरिकी साम्राज्यवादी पश्चिम एशिया में और सारी दुनिया में अपनी साम्राज्यवादी जकड़न को खत्म नहीं होने देना चाहेंगे। वे इसके खिलाफ हर संभव प्रयास करेंगे। एक हमले में मुंह की खाने के बाद वे सबक लेकर आगे हमला करने से तौबा नहीं करेंगे। यह उनकी साम्राज्यवादी फितरत के खिलाफ होगा। यानी वे ईरान पर काबू पाने के लिए दूसरे तरीकों की खोज में लग जायेंगे।

/emerjency-tab-aur-ab

पिछले दस-बारह सालों में हिन्दू फासीवादियों ने इस अनौपचारिक आपातकाल की शैली को काफी विकसित किया है। कहां किस छेद का इस्तेमाल करना है, इसमें उन्होंने महारत हासिल की है। इनके इस कृत्य में न्यायपालिका की सहभागिता से यह काम और आसान हो गया है। मतदाता सूची का विशेष गहन पुनर्रीक्षण इस सबका विशिष्ट उदाहरण है।

/piketi-ka-global-justice-project-samraajyavad-ki-pairokari

जैसा कि इंटरव्यू के शीर्षक से स्पष्ट है कि पिकेटी एक ऐसी दुनिया का ख्वाब परोसते हैं जिसमें बगैर पर्यावरण को नुकसान पहुंचाये ज्यादातर लोग खुशहाल बन सकते हैं। इस सुन्दर दुनिया को हासिल करने के लिए वे किसी वर्ग संघर्ष बढ़ाने या क्रांति की वकालत नहीं करते। बल्कि वे कुछ नुस्खे सुझाते हैं जिस पर चल कर मौजूदा पूंजीवादी-साम्राज्यवादी दुनिया को ही खुशनुमा बनाया जा सकता है। 

/amerika-dwaara-iran-par-naya-hamala-isake-doorgami-result

अमरीकी साम्राज्यवादी वर्चस्व को बढ़ाने में पश्चिम एशिया में दृढ़ स्तम्भ इजरायल रहा है। 1979 से पहले ईरान का शासक शाह रजा पहलवी  भी इस क्षेत्र में अमरीका का लठैत रहा है। 1979 में रजा पहलवी का तख्ता उलटने के बाद जो इस्लामी सत्ता आयी, वह लगातार अमरीकी साम्राज्यवाद की वर्चस्ववादी नीतियों का विरोध करती रही थी। यह सत्ता इजरायल द्वारा फिलिस्तीनियों को उजाड़े जाने और उनकी जमीनों पर यहूदी बस्तियां बसाने का विरोध करती रही है।