चंद्रशेखर आजाद के शहादत दिवस पर विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन
अमर शहीद चंद्रशेखर आजाद हमारे देश के अविस्मरणीय क्रांतिकारी थे। वे उस ‘‘हिंदुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन’’ के कमांडर इन चीफ थे जिससे भगतसिंह, सुखदेव, राजगुरू, विजय
अमर शहीद चंद्रशेखर आजाद हमारे देश के अविस्मरणीय क्रांतिकारी थे। वे उस ‘‘हिंदुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन’’ के कमांडर इन चीफ थे जिससे भगतसिंह, सुखदेव, राजगुरू, विजय
लालकुंआ/ 18 फरवरी को बिंदुखत्ता में विशाल जन रैली निकाली गई, जिसमें 10,000 से भी ज्यादा लोगों ने भागीदारी की। यह प्रदर्शन अपनी जमीनों को, अपने घरों को बचाने के उद्देश्य से बिन्दुखत
भारतीय समाज महिला मुक्ति के मामले में आज दो परस्पर विरोधी गतियों का शिकार नजर आ रहा है। एक ओर समाज में महिला प्रश्न पर बढ़ती जागरूकता दिखाई दे रही है। महिलायें अधिकाधिक घर
हाल ही में वंदे मातरम के गायन को लेकर मोदी सरकार ने नये दिशा-निर्देश जारी कर दिये हैं। इसके तहत वंदे मातरम को कई आधिकारिक कार्यक्रमों में गाया जाना अनिवार्य बना दिया गया
सोशल मीडिया पर एक अफवाह उड़ी कि राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने महिलाओं के पहनावे को लेकर एक बयान दिया है। कि जो भी महिला या वयस्क लड़की फुहड़ कपड़े पहन कर घूमेगी उनका अकाउंट बं
काश यूं ही कोई बात हो जाये
सारे संसार के नक्शे एकाकार हो जायें।
दिशाओं का भ्रम भी टूट जाये,
पूरब-पश्चिम, उत्तर-दक्षिण भी ना बचा रह जाये,
समुद्र का खारापन चखें सभी
आठ मार्च का दिन मजदूर-मेहनतकश महिलाओं का ऐसा दिन है जब वे तसल्ली से इस बात पर विचार करती हैं कि सही क्या और गलत क्या है। मुक्ति क्या और गुलामी क्या है। उनका अतीत क्या व भविष्य क्या है। कौन उनका साथी है और कौन उनकी मुक्ति की राह में रोड़ा है।
जब शीर्ष ऐसा है तो नीचे कल्पना की जा सकती है। और आज पूंजीवादी प्रचारतंत्र के सारे स्व-प्रतिबंध के बावजूद अनुयाईयों के कुकर्मों की दास्तां बाहर आ जाती है। कभी-कभी कोई सेंगर जेल भी चला जाता है। पर ज्यादातर वैसे ही छुट्टे सांड की तरह घूमते रहते हैं।
ट्रम्प के इस स्टेट आफ यूनियन भाषण का कुछ डेमोक्रेटिक पार्टी के सांसदों ने बहिष्कार किया। कुछ सर्वोच्च न्यायालय के सदस्यों ने इसमें भाग नहीं लिया। लेकिन ट्रम्प करीब दो घण्टे के अपने भाषण में अपने बारे में शेखी बघारते रहे और तमाम गलतियों और कमियों के लिए विरोधी पार्टी के राष्ट्रपतियों को जिम्मेदार ठहराते रहे। इस भाषण को झूठ का पुलिंदा कहना ज्यादा सही होगा।
अठारहवीं सदी के इंग्लैण्ड में होने वाले चुनावी भ्रष्टाचार पर गूगल से ‘सर्च’ करने पर उसका ए आई स्वतः ही यह जवाब हाजिर कर देता हैः
एस.आई.आर. प्रक्रिया के दौरान बड़े पैमाने पर मतदाताओं की कटौती की गई। अब तक 13 करोड़ से ज्यादा मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटा दिए गए। जबकि 5-6 करोड़ लोगों को संदेह की आड़ में नोटिस भेजे गए। 13 करोड़ में से 70 प्रतिशत वो लोग थे जिन्हें स्थानांतरित या अनुपस्थित बता दिया गया। इस तरह बड़े स्तर पर मनमानी छंटनी की जा रही है। इसमें सबसे बड़ी संख्या अल्पसंख्यक, दलित, आदिवासी, महिलाओं और मलिन बस्तियों में रहने वालों की है।
इस मजदूर आंदोलन की विचारधारा मार्क्सवाद का यह स्पष्ट कहना था कि महान फ्रांसीसी क्रांति के जमाने से ही पूंजीपति वर्ग ने अपने समाज के लिए जो आदर्श घोषित कर रखा है- स्वतंत्रता, समता, बंधुत्व का आदर्श- वह पूंजीवाद की निजी सम्पत्ति के कारण कभी भी हासिल नहीं किया जा सकता। पूंजी के रूप में निजी सम्पत्ति के रहते स्वतंत्रता का मतलब होगा बाजार में खरीद-बेच की स्वतंत्रता, समता का मतलब होगा बाजार में खरीददार व विक्रेता की समता तथा बंधुत्व का मतलब होगा खरीद-बेच की व्यवस्था पर सहमति।
गाजापट्टी में इजरायल की कत्लेआम करने की मुहिम जारी है। इजरायली यहूदी नस्लवादी न तो किसी समझौते को मान रहे हैं और न ही वे अपनी विनाश लीला को रोक रहे हैं। वे नस्लीय सफाये की मुहिम चला रहे हैं। इसके जवाब में हमास और अन्य प्रतिरोध संगठन इजरायली कब्जाकारी सेना पर प्रहार कर रहे हैं।
अपने व्यापक नुकसान को देखते हुए अमरीकी साम्राज्यवादियों ने अप्रैल महीने में युद्ध विराम किया और फिर पाकिस्तान की मध्यस्थता में एक ज्ञापन समझौता किया। इस ज्ञापन समझौते में अधिकांशतः ईरान की मांगें स्वीकार की गयीं। यह वस्तुतः अमरीका की पराजय थी। इस समझौते के थोड़े ही दिनों बाद अमरीका ने इसका उल्लंघन शुरू कर दिया। इजरायल ने एक भी दिन इस समझौते को नहीं माना।