विविध

आज की दुनिया में नई दुनिया का ख्वाब

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एक नई दुनिया का ख्वाब देखने वालों के प्रति वर्तमान व्यवस्था का रुख क्रूरता व हिंसा से भरा हुआ है। और अगर इसके लिए उन्हें फासीवाद की शरण लेनी पड़े तो उन्हें उससे भी गुरेज नहीं है। कोई नई दुनिया का ख्वाब न देखे इसके लिए वे तीखा विचारधारात्मक संघर्ष भी छेड़ते हैं। कभी कहते हैं कि ‘इतिहास का अंत हो गया है’ (मानो इनके कहने से मानवजाति नये इतिहास का निर्माण करना छोड़ देगी), तो कभी कहते हैं इस पूंजीवादी व्यवस्था का कोई विकल्प नहीं है (दियर इज नो अल्टरनेटिव-टीना)। ये बातें सरासर झूठ हैं। न तो इतिहास का अंत किया जा सकता है और न ही यह बात सच है कि पूंजीवाद का विकल्प नहीं है। पूंजीवाद का विकल्प वैज्ञानिक समाजवाद है।

क्लस्टर योजना के विरोध में भोजनमाताओं का प्रदर्शन और ज्ञापन

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रामनगर/ उत्तराखंड में राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत मर्जर के नाम पर स्कूलों को बंद करने के विरोध में रामनगर में प्रगतिशील भोजनमाता संगठन द्वारा विरोध प्रद

गाजापट्टी में ट्रम्प समझौता - फिलिस्तीन को गुलाम बनाने की नयी चाल

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जब समझौता लागू होने का समय आ गया और गाजापट्टी की फिलिस्तीनी आबादी जश्न मनाने के लिए जगह-जगह इकट्ठा होने लगी, तभी इजरायली हवाई हमले कई जगह हुए जिसमें कई लोग मारे गये और 70 से अधिक घायल हुए। इजरायली यहूदी नस्लवादी सत्ता समझौता लागू होते समय भी फिलिस्तीनी आबादी पर दहशत का माहौल बनाये रखने की उम्मीद में कत्लेआम कर रही है। 

गुजरात में 12 घंटे कार्य के प्रावधान का विधेयक पारित

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गुजरात सरकार ने दिनांक 10 सितम्बर 2025 को गुजरात विधानसभा ने कारखाना अधिनियम 1948 में संशोधन करने वाले एक विधेयक को पारित कर दिया। संशोधन किये गए विधेयक में गुजरात सरकार

चतुर मशीनें और बुद्धू इंसान

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उपभोक्तावाद के इस दौर में तब भी इंसान ही उपभोक्ता सामानों का मालिक होता था और उनकी हैसियत से अपनी हैसियत हासिल करता था। एक सीमित अर्थ में ही ये सामान इंसानों के मालिक होते थे। जब किसी की हैसियत किसी दूसरे से तय होने लगे तो दूसरा स्वभावतः ही एक अर्थ में पहले वाले का मालिक होने लगता है। दूसरा पहले को चलाने लगता है। उपभोक्तावादी सामान इंसानों के जीवन की गति को तय करने लगते हैं। 

बूढ़ा, बीमार डगमग-डगमग कर चलता पूंजीवाद

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पूरी दुनिया में इस वक्त राजनैतिक विक्षोभ है। मौसमी विक्षोभ की तरह इसका असर बड़े स्तर से लेकर स्थानीय स्तर पर अलग-अलग ढंग से हो रहा है। मौसमी विक्षोभ का असर तेज बारिश, बादल

आई लव मुहम्मद : मुसलमान समाज की प्रतिक्रिया और फासीवादी दमन

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हिंदू फासीवादी मोदी सरकार एवं भाजपा शासित राज्य सरकारों में हर तरह से जनवाद और लोकतंत्र का गला घोंटा जा रहा है। जनता को फासीवादी आतंक के साये में जीने मजबूर किया जा रहा ह

इंकलाबी मजदूर केन्द्र का सम्मेलन सफलतापूर्वक सम्पन्न

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हरिद्वार/ इंकलाबी मजदूर केन्द्र का सातवां केन्द्रीय सम्मेलन 4-5 अक्टूबर को हरिद्वार में सम्पन्न हुआ। सम्मेलन की शुरूआत में निवर्तमान अध्यक्ष ने झण्डारोहण

पंजाब : मेडिकल कैम्प के अनुभव

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पंजाब की भीषण बाढ़ में पीड़ित जनता को राहत पहुंचाने के लिए 23 सितम्बर से 5 अक्टूबर तक विभिन्न स्थानों पर आपदा राहत मंच द्वारा मेडिकल कैम्प लगाया गया। आपदा राहत मंच प्रोग्रे

आलेख

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अमरीकी साम्राज्यवादी और इजरायली शासक सोचते थे कि ईरान के शीर्ष नेतृत्व का सफाया करने के बाद ईरानी जनता अपनी सत्ता के विरुद्ध उठ खड़ी होगी और इसका फायदा उठाते हुए अमरीकी साम्राज्यवादी अपनी किसी कठपुतली को सत्ता में स्थापित कर देंगे। लेकिन ऐसा नहीं हुआ। ईरानी अवाम अपनी सत्ता के समर्थन में मजबूती से खड़ी हो गई। यहां से अमरीकी साम्राज्यवादियों को समझ में आ गया कि वे ईरान पर कब्जा नहीं कर सकते।

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अमेरिकी साम्राज्यवादी पश्चिम एशिया में और सारी दुनिया में अपनी साम्राज्यवादी जकड़न को खत्म नहीं होने देना चाहेंगे। वे इसके खिलाफ हर संभव प्रयास करेंगे। एक हमले में मुंह की खाने के बाद वे सबक लेकर आगे हमला करने से तौबा नहीं करेंगे। यह उनकी साम्राज्यवादी फितरत के खिलाफ होगा। यानी वे ईरान पर काबू पाने के लिए दूसरे तरीकों की खोज में लग जायेंगे।

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पिछले दस-बारह सालों में हिन्दू फासीवादियों ने इस अनौपचारिक आपातकाल की शैली को काफी विकसित किया है। कहां किस छेद का इस्तेमाल करना है, इसमें उन्होंने महारत हासिल की है। इनके इस कृत्य में न्यायपालिका की सहभागिता से यह काम और आसान हो गया है। मतदाता सूची का विशेष गहन पुनर्रीक्षण इस सबका विशिष्ट उदाहरण है।

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जैसा कि इंटरव्यू के शीर्षक से स्पष्ट है कि पिकेटी एक ऐसी दुनिया का ख्वाब परोसते हैं जिसमें बगैर पर्यावरण को नुकसान पहुंचाये ज्यादातर लोग खुशहाल बन सकते हैं। इस सुन्दर दुनिया को हासिल करने के लिए वे किसी वर्ग संघर्ष बढ़ाने या क्रांति की वकालत नहीं करते। बल्कि वे कुछ नुस्खे सुझाते हैं जिस पर चल कर मौजूदा पूंजीवादी-साम्राज्यवादी दुनिया को ही खुशनुमा बनाया जा सकता है। 

/amerika-dwaara-iran-par-naya-hamala-isake-doorgami-result

अमरीकी साम्राज्यवादी वर्चस्व को बढ़ाने में पश्चिम एशिया में दृढ़ स्तम्भ इजरायल रहा है। 1979 से पहले ईरान का शासक शाह रजा पहलवी  भी इस क्षेत्र में अमरीका का लठैत रहा है। 1979 में रजा पहलवी का तख्ता उलटने के बाद जो इस्लामी सत्ता आयी, वह लगातार अमरीकी साम्राज्यवाद की वर्चस्ववादी नीतियों का विरोध करती रही थी। यह सत्ता इजरायल द्वारा फिलिस्तीनियों को उजाड़े जाने और उनकी जमीनों पर यहूदी बस्तियां बसाने का विरोध करती रही है।