15 अगस्त के अवसर पर विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन

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15 अगस्त, 1947 को भारत ब्रिटिश साम्राज्यवादियों से आजाद हुआ था। इस आजादी को हासिल करने के लिये देश के मजदूरों, किसानों, आदिवासियों, नौजवानों और महिलाओं ने बेमिसाल कुर्बानियां दी थीं। लेकिन आजादी के बाद देश की सत्ता भारत के पूंजीपतियों के हाथों में आई और कांग्रेस पार्टी के नेतृत्व में देश पूंजीवादी रास्ते पर आगे बढ़ा। गोरे अंग्रेजों की गुलामी से तो मुक्ति मिली लेकिन अब देश की मजदूर-मेहनतकश जनता पर काले अंग्रेजों ने अपनी सत्ता का जुआं लाद दिया। और आज जबकि हमें आजाद हुये 78 साल हो चुके हैं तब हमारे देश पर फासीवादी खतरा मंडरा रहा है। गौरतलब है कि आज देश की सत्ता पर काबिज हिंदू फ़ासीवादी ताकतों का आजादी की लड़ाई में कोई योगदान नहीं रहा है।
    
ऐसे में देश को पूंजीवाद और फासीवाद से मुक्त कर भगतसिंह के सपनों का समाजवादी भारत बनाने के उद्देश्य से क्रांतिकारी संगठनों द्वारा विभिन्न कार्यक्रम किये गये।
    
हरिद्वार में इस अवसर पर ‘‘काकोरी ट्रेन एक्शन के सौ साल’’ विषय पर एक विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया। गोष्ठी में वक्ताओं ने कहा कि काकोरी ट्रेन एक्शन आजादी के आंदोलन की अविस्मरणीय घटना है जबकि रामप्रसाद बिस्मिल के नेतृत्व में क्रांतिकारियों ने लखनऊ के नजदीक काकोरी में सरकारी खजाना लूटकर ब्रिटिश सत्ता को सीधी चुनौती दी थी। वक्ताओं ने कहा कि आज सत्ता द्वारा काकोरी के शहीदों समेत सभी क्रांतिकारियों के योगदान को भुलाने की साजिशें हो रही हैं और देश को हिंदू-मुस्लिम वैमनस्य की आग में झोंका जा रहा है। 
    
विचार गोष्ठी में इंकलाबी मजदूर केंद्र, प्रगतिशील महिला एकता केंद्र, क्रांतिकारी लोक अधिकार संगठन, परिवर्तनकामी छात्र संगठन, प्रगतिशील भोजनमाता संगठन, जन अधिकार संगठन, संयुक्त संघर्षशील ट्रेड यूनियन मोर्चा, भेल मजदूर ट्रेड यूनियन, फ़ूड्स श्रमिक यूनियन, आई टी सी, एवेरेडी मजदूर यूनियन, सीमेंस वर्कर्स यूनियन, किर्बी श्रमिक कमेटी, देवभूमि श्रमिक संगठन इत्यादि से जुड़े कार्यकर्ताओं ने भागीदारी की।
    
बरेली में 15 अगस्त के मौके पर ‘मजदूर विरोधी चार श्रम संहिताएं और मजदूर वर्ग पर पड़ने वाले उसके प्रभाव’ विषय पर एक विचार गोष्ठी का आयोजन कर इन श्रम संहिताओं पर विस्तार से बातचीत की गई। वक्ताओं ने कहा कि ये श्रम संहिताएं आजादी के बाद पूंजीपति वर्ग द्वारा मजदूर वर्ग पर बोला गया सबसे बड़ा हमला हैं। 
    
बरेली ट्रेड यूनियन फेडरेशन के तत्वाधान में आयोजित इस विचार गोष्ठी में इंकलाबी मजदूर केंद्र, क्रांतिकारी किसान मंच, क्रांतिकारी लोक अधिकार संगठन, परिवर्तनकामी छात्र संगठन, प्रगतिशील सांस्कृतिक मंच के कार्यकर्ताओं एवं एन ई रेलवे के मजदूर साथियों ने भी भागीदारी की।
    
दिल्ली में 15 अगस्त के अवसर पर शाहबाद डेरी में ‘‘काकोरी ट्रेन एक्शन के सौ साल’’ विषय पर एक विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया। इस दौरान वक्ताओं ने क्रांतिकारी शहीदों के शोषण मुक्त समाज बनाने के उद्देश्य और आजाद भारत की स्थिति पर विस्तार से चर्चा की। विचार गोष्ठी में इंकलाबी मजदूर केंद्र, क्रांतिकारी लोक अधिकार संगठन, प्रगतिशील महिला एकता केंद्र और परिवर्तनकामी छात्र संगठन के कार्यकर्ताओं ने भागीदारी की।     -विशेष संवाददाता

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