साम्राज्यवाद

जी-7 : हिरोशिमा में इकट्ठा हुए पश्चिमी साम्राज्यवादी

19 से 21 मई तक जी-7 संगठन की वार्षिक बैठक हिरोशिमा, जापान में सम्पन्न हुई। हिरोशिमा जापान के उन 2 शहरों में से एक है जहां अमेरिकी साम्राज्यवादियों ने द्वितीय विश्व युद्ध के खात्मे के वक्त परमाणु बम

अमेरिकी कर्ज संकट

संयुक्त राज्य अमेरिका की संघीय सरकार के कर्ज चुकाने में असमर्थ हो जाने की संभावना पर काफी चर्चा हो रही है। स्वयं अमेरिका की वित्तमंत्री जैनेट मेलेन दुनिया पर एक बड़े खतरे के मंडराने को लेकर चेतावनी

जी-20 का शिखर सम्मेलन और मोदी सरकार

    आने वाली 9-10 सितम्बर को देश की राजधानी दिल्ली में जी-20 का शिखर सम्मेलन आयोजित होने जा रहा है। इस बार भारत इसकी अध्यक्षता कर रहा है और मोदी सरकार इसे अपनी विशेष उपलब्धि बता रही है। क्या जी-20

सूडान : क्षेत्रीय व वैश्विक ताकतों की चालों का अखाड़ा

    सूडान लम्बे समय से अस्थिरता का शिकार रहा है। इस समय सूडान की सेना के प्रमुख और एक मिलिशिया के प्रमुख के बीच सत्ता पर नियंत्रण के लिए संघर्ष चल रहा है। सेना के प्रमुख जनरल अब्दल फतह अल-बुरहान है

पेंशन और छुट्टा पूंजीवाद

    फ्रांस में पेंशन सुधारों के खिलाफ लगभग समूचा मजदूर वर्ग बीते कई महीनों से संघर्ष कर रहा है। फ्रांसीसी मजदूर वर्ग काम करने की उम्र 62 से 64 वर्ष किये जाने के सरकारी फरमान को स्वीकारने को तैयार न

यमन में शांति की दिशा में एक कदम

चीन की मध्यस्थता में हुए साऊदी अरब और ईरान के बीच समझौते से अशांत पश्चिम एशिया में शांति की दिशा में प्रयास शुरू हो गये हैं। इन शांति प्रयासों से इस क्षेत्र में इजरायल काफी हद तक पश्चिम एशिया के शा

मैक्सिको : आग लगने से 39 शरणार्थियों की मौत

28 मार्च को मैक्सिको की एक प्रवासी जेल में आग लगने से 39 शरणार्थियों मारे गये। इसके अलावा 29 लोग घायल भी हो गये जिनमें से कुछ की हालत गंभीर बनी हुई है। ये सभी शरणार्थी संयुक्त राज्य अमेरिका में शरण

पश्चिमी एशिया में अमरीकी साम्राज्यवादियों का कमजोर होता प्रभाव

काफी लम्बे समय से पश्चिम एशिया के देशों पर अमरीकी साम्राज्यवादियों का दबदबा रहा है। 2021 में अफगानिस्तान से बेआबरू होकर अपनी सेनाओं को वापस बुलाने के बाद पश्चिम एशिया में अमरीकी साम्राज्यवादियों का

चीन : नई साम्राज्यवादी ताकत

बीते लगभग एक दशक में चीन विश्व रंगमंच पर एक प्रमुख ताकत के बतौर उभरा है। आज अगर अमेरिकी साम्राज्यवादी चीन को अपने प्रमुख प्रतिस्पर्धी के बतौर चिन्हित कर रहे हैं तो यह यूं ही नहीं है। बात चाहे चीन-अ

रूस-यूक्रेन युद्ध का एक वर्ष : जगह-जगह युद्ध विरोधी प्रदर्शन

यूक्रेन पर हमले के 24 फरवरी 2023 को एक वर्ष पूरे हो गये हैं। एक वर्ष पूरे होने पर यूरोप के कई देशों में युद्ध के विरोध में प्रदर्शन हुए। एक वर्ष पूर्व 24 फरवरी को रूस ने यूक्रेन पर हमला बोल दिया था

आलेख

/punjivadi-jantantra-and-chunavi-corruption

अठारहवीं सदी के इंग्लैण्ड में होने वाले चुनावी भ्रष्टाचार पर गूगल से ‘सर्च’ करने पर उसका ए आई स्वतः ही यह जवाब हाजिर कर देता हैः 

/election-aayog-hindu-fascist-and-loktantra

एस.आई.आर. प्रक्रिया के दौरान बड़े पैमाने पर मतदाताओं की कटौती की गई। अब तक 13 करोड़ से ज्यादा मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटा दिए गए। जबकि 5-6 करोड़ लोगों को संदेह की आड़ में नोटिस भेजे गए। 13 करोड़ में से 70 प्रतिशत वो लोग थे जिन्हें स्थानांतरित या अनुपस्थित बता दिया गया। इस तरह बड़े स्तर पर मनमानी छंटनी की जा रही है। इसमें सबसे बड़ी संख्या अल्पसंख्यक, दलित, आदिवासी, महिलाओं और मलिन बस्तियों में रहने वालों की है।

/uddharak-ideology-ki-talaas

इस मजदूर आंदोलन की विचारधारा मार्क्सवाद का यह स्पष्ट कहना था कि महान फ्रांसीसी क्रांति के जमाने से ही पूंजीपति वर्ग ने अपने समाज के लिए जो आदर्श घोषित कर रखा है- स्वतंत्रता, समता, बंधुत्व का आदर्श- वह पूंजीवाद की निजी सम्पत्ति के कारण कभी भी हासिल नहीं किया जा सकता। पूंजी के रूप में निजी सम्पत्ति के रहते स्वतंत्रता का मतलब होगा बाजार में खरीद-बेच की स्वतंत्रता, समता का मतलब होगा बाजार में खरीददार व विक्रेता की समता तथा बंधुत्व का मतलब होगा खरीद-बेच की व्यवस्था पर सहमति।

/war-and-diplomacy-uthal-puthal-se-bhari-duniyaa

गाजापट्टी में इजरायल की कत्लेआम करने की मुहिम जारी है। इजरायली यहूदी नस्लवादी न तो किसी समझौते को मान रहे हैं और न ही वे अपनी विनाश लीला को रोक रहे हैं। वे नस्लीय सफाये की मुहिम चला रहे हैं। इसके जवाब में हमास और अन्य प्रतिरोध संगठन इजरायली कब्जाकारी सेना पर प्रहार कर रहे हैं। 

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अपने व्यापक नुकसान को देखते हुए अमरीकी साम्राज्यवादियों ने अप्रैल महीने में युद्ध विराम किया और फिर पाकिस्तान की मध्यस्थता में एक ज्ञापन समझौता किया। इस ज्ञापन समझौते में अधिकांशतः ईरान की मांगें स्वीकार की गयीं। यह वस्तुतः अमरीका की पराजय थी। इस समझौते के थोड़े ही दिनों बाद अमरीका ने इसका उल्लंघन शुरू कर दिया। इजरायल ने एक भी दिन इस समझौते को नहीं माना।