अपने घर-जमीन बचाने को संघर्षरत बिन्दुखत्तावासी

Published
Sun, 03/01/2026 - 07:01
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लालकुंआ/ 18 फरवरी को बिंदुखत्ता में विशाल जन रैली निकाली गई, जिसमें 10,000 से भी ज्यादा लोगों ने भागीदारी की। यह प्रदर्शन अपनी जमीनों को, अपने घरों को बचाने के उद्देश्य से बिन्दुखत्ता (लालकुंआ) को राजस्व ग्राम बनाने की मांग के साथ किया गया। इस प्रदर्शन की तैयारी के लिए बीते जनवरी माह से लगातार पूरे बिंदुखत्ता के स्तर पर पर्चा निकालकर घर-घर जाकर संयुक्त संघर्ष समिति के तहत अभियान चलाया गया। इस संयुक्त संघर्ष समिति में कांग्रेस, वन अधिकार समिति, भूतपूर्व सैनिक संगठन, भाकपा माले, प्रगतिशील महिला एकता केंद्र आदि पार्टियां व जन संगठन शामिल रहे। बिंदुखत्ता की लडाई लंबे समय से मालिकाना हक के लिए उठती रही है। बिंदुखत्ता को बसे तीन चार पीढ़ियां गुजर चुकी हैं। 
    
इंदिरा गांधी के समय में संगठित तरीके से भूमिहीनों को नया आवास ग्रांट एक्ट के तहत जमीन दी गई थी। इंदिरा ग्राम इस समय से बसे हैं उसके पहले से ही बड़ी संख्या में अन्य भूमिहीन भी अपने पुराने गोठ-खत्तों-टोंगिया गांव को छोड़ते हुए भाबर के इलाके में आए और यहां अपनी झोपड़ी डालकर रहने लगे। धीरे-धीरे यह बसायतें बसीं और 1950 के बाद बिंदुखत्ता में जूनियर हाईस्कूल स्वीकृत किया गया। आजादी के तत्काल बाद ऋषिकेश में गांधीग्राम बसाया तो टनकपुर के आस-पास से लेकर बग्गा, चौवन, बिंदुखत्ता, मालधन, पुछडी, सूअर खाल, बागजाला आदि आदि इसी तरीके से बसायतें बसीं। 
    
2014 के बाद राज्य सरकार ने राजस्व संबंधी निर्णय लिए। विधानसभा में मलिन बस्तियों को मालिकाना हक मिलने का कानून बनाया गया और 26 दिसंबर 2016 को डी एस गर्ब्याल सचिव के हस्ताक्षरों से यह अधिसूचना जारी की गई कि मंत्रिमंडल के निर्णय के अनुरूप 10 प्रकार की बसायतों को मालिकाना हक देने का फैसला किया गया। अभी तक वह मंत्रिमंडल का फैसला यथावत है। विधानसभा द्वारा पारित विधेयक जो कानून के रूप में है वह भी यथावत है। 
    
जो भी सरकारें सत्ता में होती हैं बड़े-बड़े दावे तो करती हैं लेकिन असल में जमीनी स्तर पर काम नहीं करतीं। आज पूरे उत्तराखंड में 10,000 एकड़ से भी ज्यादा जमीनों पर अतिक्रमण के नाम पर बुलडोजर चलाने की कार्यवाही हो चुकी है जिसमें खटीमा से लेकर रामनगर के पूछड़ी गांव, हल्द्वानी के बनभूलपुरा से लेकर लालकुआं के नगीना बस्ती आदि अनेक कस्बों में अतिक्रमण के नाम पर गरीब जनता को उजाड़ा जा रहा है। 
    
18 फरवरी के प्रदर्शन में स्थानीय विधायक द्वारा इस प्रदर्शन को कमजोर करने के लिए विभिन्न कार्यवाहियां की गईं। जैसे गांव-गांव में जाकर अपने कार्यकर्ताओं द्वारा यह प्रचार किया गया कि इस रैली में न जाएं। प्रदर्शन के 1 दिन पहले डीएम को सूचना दी गई थी कि स्कूल बंद रहेंगे, लेकिन रातों-रात स्कूलों को खोले जाने का मैसेज जारी कर दिया जाता है। और जो गोला बुधवार के दिन बंद रहती थी उसे भी उस दिन खनन हेतु खोलने का आदेश जारी कर दिया जाता है। लेकिन इसके बावजूद भी क्योंकि यह प्रदर्शन अपने घरों को बचाने के लिए किया जा रहा था इसलिए इस प्रदर्शन में जनता उमड़ कर आई।  जड़ सेक्टर के स्कूल में यह जन सैलाब उमड़ पड़ा और वहां पर सभा कर लालकुआं तहसील में जुलूस निकाल कर डीएम को ज्ञापन दिया गया। 
        -लालकुंआ संवाददाता
 

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