बुलडोजर

/buladojar

अंधेरा है
बहुत घना अंधेरा है
कुछ नहीं दिखाई देता
हिंदू है या मुसलमान है
मगर शायद इंसान है,
अंधेरे को चीरती हुई आ रही हैं
बच्चों की चीखें, महिलाओं की सिसकियां
वो रोते हुए बड़बड़ा रही हैं
क्या कसूर था इन मासूम बच्चों का?
क्या अपराध था मेरा?
क्यों गिरा दिया छोटा सा आशियाना मेरा।

तुम्हें औरंगजेब की कब्र खोदनी है
जरूर खोदो
तुम्हें जिसका भी मकबरा खोदना है
खोदो
मगर जीते जी बूढ़े मां-बाप को
बुलडोजर से मत रौंदो।

अपने आप को योगी, संत, सनातनी कहने वालो
बताओ किस गीता में लिखा है कि
बाप के जुर्म की सजा बच्चों को दो
किस वेद पुराण में लिखा है कि
बेटे के अपराध की सजा मां-बाप को दो
तुम कहते हो कि तुम्हारा धर्म श्रेष्ठ है
तुम्हारी संस्कृति महान है
बस्तियां उजाड़ते हुए तुम्हें दर्द नहीं होता
क्या यही वसुधैव कुटुम्बकम का ज्ञान है।

माना कि बहुत अन्याय है अंधकार है
रोशनी की किरण अभी दूर है
रात घनी अंधियारी है
सूरज भी मजबूर है
मगर जब मशालें लेकर
सड़कों पर जन सैलाब आयेगा
तब अंधियारा छंट जायेगा
और नया सवेरा आयेगा।।    -भारत सिंह

आलेख

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अठारहवीं सदी के इंग्लैण्ड में होने वाले चुनावी भ्रष्टाचार पर गूगल से ‘सर्च’ करने पर उसका ए आई स्वतः ही यह जवाब हाजिर कर देता हैः 

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एस.आई.आर. प्रक्रिया के दौरान बड़े पैमाने पर मतदाताओं की कटौती की गई। अब तक 13 करोड़ से ज्यादा मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटा दिए गए। जबकि 5-6 करोड़ लोगों को संदेह की आड़ में नोटिस भेजे गए। 13 करोड़ में से 70 प्रतिशत वो लोग थे जिन्हें स्थानांतरित या अनुपस्थित बता दिया गया। इस तरह बड़े स्तर पर मनमानी छंटनी की जा रही है। इसमें सबसे बड़ी संख्या अल्पसंख्यक, दलित, आदिवासी, महिलाओं और मलिन बस्तियों में रहने वालों की है।

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इस मजदूर आंदोलन की विचारधारा मार्क्सवाद का यह स्पष्ट कहना था कि महान फ्रांसीसी क्रांति के जमाने से ही पूंजीपति वर्ग ने अपने समाज के लिए जो आदर्श घोषित कर रखा है- स्वतंत्रता, समता, बंधुत्व का आदर्श- वह पूंजीवाद की निजी सम्पत्ति के कारण कभी भी हासिल नहीं किया जा सकता। पूंजी के रूप में निजी सम्पत्ति के रहते स्वतंत्रता का मतलब होगा बाजार में खरीद-बेच की स्वतंत्रता, समता का मतलब होगा बाजार में खरीददार व विक्रेता की समता तथा बंधुत्व का मतलब होगा खरीद-बेच की व्यवस्था पर सहमति।

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गाजापट्टी में इजरायल की कत्लेआम करने की मुहिम जारी है। इजरायली यहूदी नस्लवादी न तो किसी समझौते को मान रहे हैं और न ही वे अपनी विनाश लीला को रोक रहे हैं। वे नस्लीय सफाये की मुहिम चला रहे हैं। इसके जवाब में हमास और अन्य प्रतिरोध संगठन इजरायली कब्जाकारी सेना पर प्रहार कर रहे हैं। 

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अपने व्यापक नुकसान को देखते हुए अमरीकी साम्राज्यवादियों ने अप्रैल महीने में युद्ध विराम किया और फिर पाकिस्तान की मध्यस्थता में एक ज्ञापन समझौता किया। इस ज्ञापन समझौते में अधिकांशतः ईरान की मांगें स्वीकार की गयीं। यह वस्तुतः अमरीका की पराजय थी। इस समझौते के थोड़े ही दिनों बाद अमरीका ने इसका उल्लंघन शुरू कर दिया। इजरायल ने एक भी दिन इस समझौते को नहीं माना।