राष्ट्रीय

बेलसोनिका मजदूरों का संघर्ष जारी

गुड़गांव/ अपने संघर्ष को आगे बढ़ाते हुए बेलसोनिका यूनियन ने 8 अप्रैल को दिल्ली के जंतर मंतर में एक प्रेस वार्ता बुलाई। प्रेस वार्ता में शामिल हुए पत्रकारों और मजदूर संगठन की प्रतिनिध

पंतनगर विश्व विद्यालय का 13 अप्रैल 1978 गोली कांड

(13 अप्रैल 1978 का पंतनगर का गोलीकांड इस बात का गवाह है कि कैसे भारत के सार्वजनिक उपक्रमों में भी मजदूरों का निर्मम दमन-उत्पीड़न किया जाता था। कि आजाद भारत के शासक क्रूरता में ब्रिटिश हत्यारों से कह

26 मार्च - 8 घंटे की सामूहिक भूख हड़ताल

यह सामूहिक भूख हड़ताल मजदूर विरोधी 4 लेबर कोड रद्द करने, ठेका प्रथा खत्म करने, खुली-छिपी छंटनी करना बंद करने, तीन बर्खास्त मजदूर साथियों को काम पर वापस लेने, तीन निलंबित यूनियन प्रतिनिधियों को तत्का

उत्तर प्रदेश में बिजली कर्मियों की हड़ताल

विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति उत्तर प्रदेश के आह्वान पर 16 मार्च से 72 घंटे की हड़ताल शुरू हुई। भाजपा सरकार मुकदमों, बर्खास्तगी का आतंक पैदा कर हड़ताल समाप्त करवाने में सफल रही है। हड़ताल से प

परिधान उद्योग की महिला मजदूरों में ट्रेड यूनियन कार्य : कुछ अनुभव

भारत में कपड़ा उद्योग का लंबा पुराना इतिहास है। किन्तु 1990 के दशक से ही यहां पर परिधान निर्यात क्षेत्र का महत्वपूर्ण विस्तार हुआ है। भारत का वैश्विक परिधान निर्यात में पांचवां स्थान है।

कर्नाटक : देशी-विदेशी पूंजी के इशारे पर मजदूरों पर एक और हमला

केन्द्र में बैठी भाजपा सरकार मजदूरों पर नित नये हमले कर रही है वहीं राज्य सरकारें भी इसमें पीछे नहीं हैं। अभी हाल में ही कर्नाटक की भाजपा सरकार ने मजदूरों पर एक नया हमला बोला है। कर्नाटक विधान सभा

उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन निविदा संविदा कर्मचारी संघ का संघर्ष

बदायूं/ उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन निविदा संविदा कर्मचारी संघ के कर्मचारी 8 फरवरी 2023 से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले गए। कर्मचारियों ने अधीक्षण अभियंता कार्यालय बदायूं पर अपना आंद

मिड डे मील कर्मचारियों का राष्ट्रीय स्तर पर मोर्चा बनाने के प्रयास

सरकार के सरकारी स्कूलों व सम्बद्धता प्राप्त स्कूलों में 1995 से मध्याहन भोजन (मिड डे मील) योजना चल रही है जिसे अब पी एम पोषण योजना के नाम से भी जाना जाता है। देश स्तर पर लगभग 25 लाख कर्मचारी स्कूलो

बेलसोनिका यूनियन पर राजनीतिक हमले के विरोध में मजदूर सम्मेलन

गुड़गांव/ गुड़गांव-मानेसर की बेलसोनिका यूनियन को रजिस्ट्रार ट्रेड यूनियन, हरियाणा द्वारा यूनियन का रजिस्ट्रेशन रद्द करने की धमकी के साथ जारी कारण बताओ नोटिस के विरुद्ध मजदूरों का आक्

आलेख

/west-asia-mein-badalata-shakti-santulan-samajhautaa-gyapan-ke-baad-ki-sthiti

अमरीकी साम्राज्यवादी और इजरायली शासक सोचते थे कि ईरान के शीर्ष नेतृत्व का सफाया करने के बाद ईरानी जनता अपनी सत्ता के विरुद्ध उठ खड़ी होगी और इसका फायदा उठाते हुए अमरीकी साम्राज्यवादी अपनी किसी कठपुतली को सत्ता में स्थापित कर देंगे। लेकिन ऐसा नहीं हुआ। ईरानी अवाम अपनी सत्ता के समर्थन में मजबूती से खड़ी हो गई। यहां से अमरीकी साम्राज्यवादियों को समझ में आ गया कि वे ईरान पर कब्जा नहीं कर सकते।

/war-anay-sadhanon-se-politics-ka-hi-jaari-roop-hai

अमेरिकी साम्राज्यवादी पश्चिम एशिया में और सारी दुनिया में अपनी साम्राज्यवादी जकड़न को खत्म नहीं होने देना चाहेंगे। वे इसके खिलाफ हर संभव प्रयास करेंगे। एक हमले में मुंह की खाने के बाद वे सबक लेकर आगे हमला करने से तौबा नहीं करेंगे। यह उनकी साम्राज्यवादी फितरत के खिलाफ होगा। यानी वे ईरान पर काबू पाने के लिए दूसरे तरीकों की खोज में लग जायेंगे।

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पिछले दस-बारह सालों में हिन्दू फासीवादियों ने इस अनौपचारिक आपातकाल की शैली को काफी विकसित किया है। कहां किस छेद का इस्तेमाल करना है, इसमें उन्होंने महारत हासिल की है। इनके इस कृत्य में न्यायपालिका की सहभागिता से यह काम और आसान हो गया है। मतदाता सूची का विशेष गहन पुनर्रीक्षण इस सबका विशिष्ट उदाहरण है।

/piketi-ka-global-justice-project-samraajyavad-ki-pairokari

जैसा कि इंटरव्यू के शीर्षक से स्पष्ट है कि पिकेटी एक ऐसी दुनिया का ख्वाब परोसते हैं जिसमें बगैर पर्यावरण को नुकसान पहुंचाये ज्यादातर लोग खुशहाल बन सकते हैं। इस सुन्दर दुनिया को हासिल करने के लिए वे किसी वर्ग संघर्ष बढ़ाने या क्रांति की वकालत नहीं करते। बल्कि वे कुछ नुस्खे सुझाते हैं जिस पर चल कर मौजूदा पूंजीवादी-साम्राज्यवादी दुनिया को ही खुशनुमा बनाया जा सकता है। 

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अमरीकी साम्राज्यवादी वर्चस्व को बढ़ाने में पश्चिम एशिया में दृढ़ स्तम्भ इजरायल रहा है। 1979 से पहले ईरान का शासक शाह रजा पहलवी  भी इस क्षेत्र में अमरीका का लठैत रहा है। 1979 में रजा पहलवी का तख्ता उलटने के बाद जो इस्लामी सत्ता आयी, वह लगातार अमरीकी साम्राज्यवाद की वर्चस्ववादी नीतियों का विरोध करती रही थी। यह सत्ता इजरायल द्वारा फिलिस्तीनियों को उजाड़े जाने और उनकी जमीनों पर यहूदी बस्तियां बसाने का विरोध करती रही है।