‘अमृत काल’ में अर्थव्यवस्था की डूबती नैय्या
अंततः प्रधानमंत्री मोदी को स्वीकारना पड़ा कि भारतीय अर्थव्यवस्था संकट में है। उन्हें मानना पड़ा कि इस संकट के चलते करोड़ों लोग गरीबी रेखा के नीचे जाने की कगार पर हैं। बस जिस
अंततः प्रधानमंत्री मोदी को स्वीकारना पड़ा कि भारतीय अर्थव्यवस्था संकट में है। उन्हें मानना पड़ा कि इस संकट के चलते करोड़ों लोग गरीबी रेखा के नीचे जाने की कगार पर हैं। बस जिस
पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों के बाद प्रधानमंत्री मोदी ने देश की जनता को मितव्ययिता का पाठ पढ़ा दिया है। खाने में तेल का इस्तेमाल कम करो, आवागमन में पेट्रोलियम तेल का इ
उड़ीसा के ओड़ीसा ग्रामीण बैंक की मल्लीपोसी शाखा में जो कुछ हुआ उसने बैंक की असंवेदनशीलता को एक झटके में पूरे देश के सामने ला दिया। जीतू मुंडा नामक एक आदिवासी की बहन की मृत्
अप्रैल माह की शुरूआत से मानेसर-नोएडा-फरीदाबाद-भिवानी में एक के बाद एक फैक्टरी में मजदूरों का आक्रोश दावानल बनकर फूट पड़ा। सालों से अपने मालिकों-प्रबंधन के शोषण-उत्पीड़न को
इन दिनों रुपया गिरता और बस गिरता ही जा रहा है। मार्च के तीसरे हफ्ते में रुपया डालर के मुकाबले 94 के ऐतिहासिक निचले स्तर पर पहुंच गया है। मगर अब ‘राष्ट्रीय गौरव’ डालर रुपए
अमेरिकी-इजरायल हमलावरों द्वारा ईरान पर थोपे गये युद्ध को एक माह से अधिक हो चुका है। ट्रम्प-नेतन्याहू का चंद दिनों में ईरान में सत्ता परिवर्तन का ख्वाब धूल धूसरित हो चुका
ईरान युद्ध का असर भारत की सड़़कों पर नजर आने लगा है। रसोई गैस भरवाने की लम्बी कतारें इस बात की गवाह हैं कि अमेरिकी-इजरायल मिसाइलें भले ही ईरान को तबाह कर रही हों पर उसका अ
हकीकत में क्या हुआ है? भारत के स्वयंभू राष्ट्रवादियों ने अमेरिकी साम्राज्यवादियों के सामने आत्मसमर्पण कर दिया है। और एक तरीके से अपने इतिहास को फिर से दुहरा दिया है। आजादी की लड़ाई के समय ये ब्रिटिश साम्राज्यवादियों के ‘आज्ञाकारी सेवक’ थे और आज ये अमेरिकी साम्राज्यवादियों के आज्ञाकारी अनुचर बने हुए हैं।
मुल्ला नसीरूद्दीन का एक किस्सा है। एक दिन मुल्ला नसीरूद्दीन अपने गधे को लेकर एक सराय में पहुंचा। वहां उसने लोगों के बीच गधे के सामने कुरान रखी और उसके पन्ने पलटने लगा। जब
अठारहवीं सदी के इंग्लैण्ड में होने वाले चुनावी भ्रष्टाचार पर गूगल से ‘सर्च’ करने पर उसका ए आई स्वतः ही यह जवाब हाजिर कर देता हैः
एस.आई.आर. प्रक्रिया के दौरान बड़े पैमाने पर मतदाताओं की कटौती की गई। अब तक 13 करोड़ से ज्यादा मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटा दिए गए। जबकि 5-6 करोड़ लोगों को संदेह की आड़ में नोटिस भेजे गए। 13 करोड़ में से 70 प्रतिशत वो लोग थे जिन्हें स्थानांतरित या अनुपस्थित बता दिया गया। इस तरह बड़े स्तर पर मनमानी छंटनी की जा रही है। इसमें सबसे बड़ी संख्या अल्पसंख्यक, दलित, आदिवासी, महिलाओं और मलिन बस्तियों में रहने वालों की है।
इस मजदूर आंदोलन की विचारधारा मार्क्सवाद का यह स्पष्ट कहना था कि महान फ्रांसीसी क्रांति के जमाने से ही पूंजीपति वर्ग ने अपने समाज के लिए जो आदर्श घोषित कर रखा है- स्वतंत्रता, समता, बंधुत्व का आदर्श- वह पूंजीवाद की निजी सम्पत्ति के कारण कभी भी हासिल नहीं किया जा सकता। पूंजी के रूप में निजी सम्पत्ति के रहते स्वतंत्रता का मतलब होगा बाजार में खरीद-बेच की स्वतंत्रता, समता का मतलब होगा बाजार में खरीददार व विक्रेता की समता तथा बंधुत्व का मतलब होगा खरीद-बेच की व्यवस्था पर सहमति।
गाजापट्टी में इजरायल की कत्लेआम करने की मुहिम जारी है। इजरायली यहूदी नस्लवादी न तो किसी समझौते को मान रहे हैं और न ही वे अपनी विनाश लीला को रोक रहे हैं। वे नस्लीय सफाये की मुहिम चला रहे हैं। इसके जवाब में हमास और अन्य प्रतिरोध संगठन इजरायली कब्जाकारी सेना पर प्रहार कर रहे हैं।
अपने व्यापक नुकसान को देखते हुए अमरीकी साम्राज्यवादियों ने अप्रैल महीने में युद्ध विराम किया और फिर पाकिस्तान की मध्यस्थता में एक ज्ञापन समझौता किया। इस ज्ञापन समझौते में अधिकांशतः ईरान की मांगें स्वीकार की गयीं। यह वस्तुतः अमरीका की पराजय थी। इस समझौते के थोड़े ही दिनों बाद अमरीका ने इसका उल्लंघन शुरू कर दिया। इजरायल ने एक भी दिन इस समझौते को नहीं माना।