तो फिर वे लोग कौन हैं? -गुलज़ार हुसैन
सुबह होते ही
खुरपी और कुदाल लेकर खेतिहर
खेतों पर काम करने चले जाते हैं
हथौड़े लेकर मजदूर निर्माण कार्य में लग जाते हैं
केतली लेकर चायवाला पानी गर्म करने लगता है
सुबह होते ही
खुरपी और कुदाल लेकर खेतिहर
खेतों पर काम करने चले जाते हैं
हथौड़े लेकर मजदूर निर्माण कार्य में लग जाते हैं
केतली लेकर चायवाला पानी गर्म करने लगता है
1. आजादी
हम आजादी चाहते हैं
पीले हीरे की तरह
धूल तो धूल से सही
पत्थर तो पत्थर से सही
हमारे नंगे हाथों का लहू
टपकता है चट्टानों के ऊपर
तुम्हारे पांव के नीचे कोई जमीन नहीं
कमाल ये है कि फिर भी तुम्हें यकीन नहीं
मैं बेपनाह अंधेरों को सुब्ह कैसे कहूं
मैं इन नजारों का अंधा तमाशबीन नहीं
सवाल तरह-तरह के होते हैं,
कुछ सवाल
ओस की बूदों की तरह होते हैं,
सुबह की धूप में
कुछ देर जगमगा कर
लुप्त हो जाते हैं।
आज यह देश विपन्न है; निरन्न है जीवन आज,
मौत का निरन्तर साथ है, रोज-रोज दुश्मनों के हमले
रक्त की अल्पना आंकते हैं, कानों में गूंजता है आर्तनाद;
एक
उनका वाद्य यन्त्र है बुलडोज़र
उसकी ध्वनि उन्हें संगीत लगती है
(बजा दी सालों की - यही भाषा है न उनकी !)
ध्वंस उनकी संस्कृति है
तुम्हारी तरह
मैं प्यार करता हूं
प्यार को,
जिन्दगी को,
चीजों की मीठी खुशबुओं को,
जनवरी माह के आसमानी नजारे को
प्यार करता हूं
चालीस प्रतिशत लोगों ने वोट नहीं डाला
इनमें अधिकांश चाहते तो वोट डालते
उन्हें लगा इससे क्या होगा
या उन्होंने इसके बारे में कुछ सोचा ही नहीं
जो जीवन की धूल चाट कर बड़ा हुआ है
तूफानों से लड़ा और फिर खड़ा हुआ है
जिसने सोने को खोदा लोहा मोड़ा है
जो रवि के रथ का घोड़ा है
वह जन मारे नहीं मरेगा
नहीं मरेगा
अठारहवीं सदी के इंग्लैण्ड में होने वाले चुनावी भ्रष्टाचार पर गूगल से ‘सर्च’ करने पर उसका ए आई स्वतः ही यह जवाब हाजिर कर देता हैः
एस.आई.आर. प्रक्रिया के दौरान बड़े पैमाने पर मतदाताओं की कटौती की गई। अब तक 13 करोड़ से ज्यादा मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटा दिए गए। जबकि 5-6 करोड़ लोगों को संदेह की आड़ में नोटिस भेजे गए। 13 करोड़ में से 70 प्रतिशत वो लोग थे जिन्हें स्थानांतरित या अनुपस्थित बता दिया गया। इस तरह बड़े स्तर पर मनमानी छंटनी की जा रही है। इसमें सबसे बड़ी संख्या अल्पसंख्यक, दलित, आदिवासी, महिलाओं और मलिन बस्तियों में रहने वालों की है।
इस मजदूर आंदोलन की विचारधारा मार्क्सवाद का यह स्पष्ट कहना था कि महान फ्रांसीसी क्रांति के जमाने से ही पूंजीपति वर्ग ने अपने समाज के लिए जो आदर्श घोषित कर रखा है- स्वतंत्रता, समता, बंधुत्व का आदर्श- वह पूंजीवाद की निजी सम्पत्ति के कारण कभी भी हासिल नहीं किया जा सकता। पूंजी के रूप में निजी सम्पत्ति के रहते स्वतंत्रता का मतलब होगा बाजार में खरीद-बेच की स्वतंत्रता, समता का मतलब होगा बाजार में खरीददार व विक्रेता की समता तथा बंधुत्व का मतलब होगा खरीद-बेच की व्यवस्था पर सहमति।
गाजापट्टी में इजरायल की कत्लेआम करने की मुहिम जारी है। इजरायली यहूदी नस्लवादी न तो किसी समझौते को मान रहे हैं और न ही वे अपनी विनाश लीला को रोक रहे हैं। वे नस्लीय सफाये की मुहिम चला रहे हैं। इसके जवाब में हमास और अन्य प्रतिरोध संगठन इजरायली कब्जाकारी सेना पर प्रहार कर रहे हैं।
अपने व्यापक नुकसान को देखते हुए अमरीकी साम्राज्यवादियों ने अप्रैल महीने में युद्ध विराम किया और फिर पाकिस्तान की मध्यस्थता में एक ज्ञापन समझौता किया। इस ज्ञापन समझौते में अधिकांशतः ईरान की मांगें स्वीकार की गयीं। यह वस्तुतः अमरीका की पराजय थी। इस समझौते के थोड़े ही दिनों बाद अमरीका ने इसका उल्लंघन शुरू कर दिया। इजरायल ने एक भी दिन इस समझौते को नहीं माना।