ट्रंप ने राजधानी को कब्जे में लिया

12 अगस्त को डोनाल्ड ट्रंप ने अपने तुगलकी फरमान के सिलसिले में एक नया फरमान जोड़़ दिया। डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिकी कानूनों के एक आपातकालीन प्रावधान के आधार पर राजधानी वाशिंगटन डी.सी. की सुरक्षा व्यवस्था करने वाली महानगरीय पुलिस को केन्द्र के मातहत कर दिया और यहां नेशनल गार्ड को लगा दिया। ऐसा करने के पीछे डोनाल्ड ट्रंप ने कारण बताया कि वाशिंगटन डी.सी. में अपराध, खून-खराबा इत्यादि बढ़ रहे हैं जिसे रोकने के लिए यह कदम उठाया गया है। ट्रंप ने यह भी इरादा जाहिर किया कि न्यूयार्क सिटी, शिकागो और बाल्टीमोर में भी नेशनल गार्ड तैनात किए जाएंगे। इन सभी स्थानों का प्रशासन विपक्षी डेमोक्रेटिक पार्टी के जन प्रतिनिधियों के हाथों में है। इससे पहले ट्रंप ने लास एंजिल्स में भी नेशनल गार्ड की तैनाती की थी। यहां पर नेशनल गार्ड ने अप्रवासियों की धर-पकड़ मनमर्जी से करनी शुरू कर दी थी, जिसका तीखा विरोध भी हुआ था।

वाशिंगटन डी.सी. में भी नेशनल गार्ड की तैनाती का विरोध हो रहा है। यहां तक कि वाशिंगटन डी.सी. के मेयर ने भी ट्रंप के इस फैसले का विरोघ किया है। मेयर ने इसे अपने अधिकार क्षेत्र में राष्ट्रपति का गैर जरूरी हस्तक्षेप बताया। इस फैसले का विरोध करने वाले तमाम लोग राष्ट्रपति के इस कदम को निरंकुशतावादी बता रहे हैं। इनका कहना है कि वाशिंगटन डी.सी. में अपराध मौजूदा समय में पिछले कई सालों के न्यूनतम स्तर पर हैं। इसलिए राष्ट्रपति द्वारा दिया जा रहा तर्क सरासर झूठ है।

आज पूरी दुनिया में लोकतंत्र का ठेकेदार होने का दावा करने वाली अमेरिकी सरकार खुद एक के बाद दूसरे लोकतंत्र की हत्या करने वाले आरोपों का सामना कर रही है। अमेरिकी साम्राज्यवादियों के मुखौटे उतरने का समय आने वाला है।

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अठारहवीं सदी के इंग्लैण्ड में होने वाले चुनावी भ्रष्टाचार पर गूगल से ‘सर्च’ करने पर उसका ए आई स्वतः ही यह जवाब हाजिर कर देता हैः 

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एस.आई.आर. प्रक्रिया के दौरान बड़े पैमाने पर मतदाताओं की कटौती की गई। अब तक 13 करोड़ से ज्यादा मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटा दिए गए। जबकि 5-6 करोड़ लोगों को संदेह की आड़ में नोटिस भेजे गए। 13 करोड़ में से 70 प्रतिशत वो लोग थे जिन्हें स्थानांतरित या अनुपस्थित बता दिया गया। इस तरह बड़े स्तर पर मनमानी छंटनी की जा रही है। इसमें सबसे बड़ी संख्या अल्पसंख्यक, दलित, आदिवासी, महिलाओं और मलिन बस्तियों में रहने वालों की है।

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इस मजदूर आंदोलन की विचारधारा मार्क्सवाद का यह स्पष्ट कहना था कि महान फ्रांसीसी क्रांति के जमाने से ही पूंजीपति वर्ग ने अपने समाज के लिए जो आदर्श घोषित कर रखा है- स्वतंत्रता, समता, बंधुत्व का आदर्श- वह पूंजीवाद की निजी सम्पत्ति के कारण कभी भी हासिल नहीं किया जा सकता। पूंजी के रूप में निजी सम्पत्ति के रहते स्वतंत्रता का मतलब होगा बाजार में खरीद-बेच की स्वतंत्रता, समता का मतलब होगा बाजार में खरीददार व विक्रेता की समता तथा बंधुत्व का मतलब होगा खरीद-बेच की व्यवस्था पर सहमति।

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गाजापट्टी में इजरायल की कत्लेआम करने की मुहिम जारी है। इजरायली यहूदी नस्लवादी न तो किसी समझौते को मान रहे हैं और न ही वे अपनी विनाश लीला को रोक रहे हैं। वे नस्लीय सफाये की मुहिम चला रहे हैं। इसके जवाब में हमास और अन्य प्रतिरोध संगठन इजरायली कब्जाकारी सेना पर प्रहार कर रहे हैं। 

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अपने व्यापक नुकसान को देखते हुए अमरीकी साम्राज्यवादियों ने अप्रैल महीने में युद्ध विराम किया और फिर पाकिस्तान की मध्यस्थता में एक ज्ञापन समझौता किया। इस ज्ञापन समझौते में अधिकांशतः ईरान की मांगें स्वीकार की गयीं। यह वस्तुतः अमरीका की पराजय थी। इस समझौते के थोड़े ही दिनों बाद अमरीका ने इसका उल्लंघन शुरू कर दिया। इजरायल ने एक भी दिन इस समझौते को नहीं माना।