फासीवाद

उत्तराखण्ड : संघ की नई प्रयोगशाला

/uttaraakhand-sangh-ki-nai-prayogsaalaa

जब पुलिस खुद अपराध को संघी धार्मिक चश्मे से देखने लगे। जब प्रशासन से लेकर सरकार के मुखिया धार्मिक अल्पसंख्यकों को अपराधी ठहराने में जुटे हों तब संघ-भाजपा के लिए समूचे प्र

मजदूरों-मेहनतकशों सावधान !

/majadooron-mehanatakason-saavadhaan

आरएसएस-भाजपा की पूरी विचारधारा, सोच, राजनीति झूठ और फरेब से भरी है। इनका राष्ट्रवाद फर्जी सिद्धान्तों पर खड़ा है। और यह राष्ट्रवाद मजदूरों-मेहनतकशों के हितों के स्थान पर देशी-विदेशी पूंजी और भारतीय समाज के घोर प्रतिक्रियावादी तत्वों की रक्षा करता है। इनके राष्ट्रवाद की जो कोई गहराई से छानबीन करेगा वह पायेगा कि इसमें जातिवाद, नस्लवाद, मर्दवाद, धार्मिक पाखण्ड-प्रपंच, अन्य धर्मों के प्रति गहरी घृणा व आक्रामकता कूट-कूट कर भरी है। सरल शब्दों में इनके राष्ट्रवाद का मतलब- पाकिस्तान-बांग्लादेश के साथ रात-दिन अलग-अलग ढंग से मुसलमानों को गाली देना है।   

भइया ! इसे कहते हैं अक्ल बेचकर खाना

/bhaiyaa-ise-kahate-hain-akl-bechakar-khaanaa

अक्ल बेचकर कोई खायेगा तो इसका परिणाम क्या निकलेगा। दुनिया भर के पूंजीवादी नेताओं का यही हाल है। क्या हमारा देश और क्या इटली। हमारे देश में एक ओर बलात्कारियों के लिए आये द

खुशबूदार, जायकेदार बिरयानी और मुंह में लार व जुबान से जहर वाले

/khusaboodar-jaayakedaar-birayani-aur-munh-men-laar-v-jubaan-se-jahar-vaale

बिरयानी का नाम सुनते ही कईयों की भूख खुल जाती है। मुंह में लार आने लगती है। बिरयानी चाहे कैसी भी हो ‘‘कच्ची’’ या ‘‘पक्की’’ या फिर वह मांसाहारी हो अथवा शाकाहारी या फिर वह

बिच्छू घास जो सीधी भी लगती है और उल्टी भी

/bichoo-ghaas-jo-sidhi-bhi-lagati-hai-aur-ulti-bhi

पहाड़ों में एक घास होती है जो दोनों ओर लगती है। सीधी भी उल्टी भी। इस घास को छूने या पकड़़ने से बिजली का करेण्ट सा लगता है। खुजली होती है और खुजली आसानी से मिटती नहीं है। बच

नवादा : दलितों के साथ यह हिंसा कब रुकेगी?

/navaadaa-daliton-ke-saath-yah-hinsaa-kaba-rukegi

18 सितम्बर को बिहार के नवादा जिले में दबंगों ने 80 महादलितों के घर फूंक दिये। नवादा जिले के मुफस्सिल थाना क्षेत्र की कृष्णा नगर दलित बस्ती को दबंगां द्वारा न केवल आग के ह

एक देश एक चुनाव : फासीवादी परियोजना

/ek-des-ek-chunaav-phaaseevaadai-pariyojanaa-1

मोदी सरकार तेजी से एक देश एक चुनाव की ओर कदम बढ़ा रही है। हाल ही में उसने रामनाथ कोविंद की अध्यक्षता वाली समिति की सिफारिश को स्वीकार लिया। अब उम्मीद लगाई जा रही है कि अगल

वक्फ विधेयक : मुसलमानों पर संघी सरकार का एक और हमला

वक्फ सम्पत्ति कुप्रबंधन का हवाला दे वह इस सम्पत्ति को ही छीनने की मंशा से प्रेरित है

बीते दिनों मोदी सरकार ने वक्फ (संशोधन) विधेयक संसद में पेश किया। फिलहाल यह विधेयक संसदीय समिति के पास चला गया है। जहां मोदी सरकार इस विधेयक को पास कराने पर उतारू है वहीं

नये आपराधिक कानून : अधिक क्रूर-अधिक दमनकारी तंत्र की संहिता

तीन आपराधिक कानून ना तो ‘ऐतिहासिक’ हैं और ना ही ‘क्रांतिकारी’ और न ही ब्रिटिश गुलामी से मुक्ति दिलाने वाले

ये तीन आपराधिक कानून ना तो ‘ऐतिहासिक’ हैं और ना ही ‘क्रांतिकारी’ और न ही ब्रिटिश गुलामी से मुक्ति दिलाने वाले। इसी तरह इन कानूनों से न्याय की बोझिल, थकाऊ अमानवीय प्रक्रिया से जनता को कोई राहत नहीं मिलने वाली। न्यायालय में पड़े 4-5 करोड़ लंबित मामलों से भी छुटकारा नहीं मिलने वाला। ये तो बस पुराने कानूनों की नकल होने के साथ उन्हें और क्रूर और दमनकारी बनाने वाले हैं और संविधान में जो सीमित जनवादी और नागरिक अधिकार हासिल हैं ये कानून उसे भी खत्म कर देने वाले हैं।

फ्रांस-जर्मनी : दक्षिणपंथियों-नवफासीवादियों के बढ़ते कदम

फ्रांस का पूंजीपति वर्ग फासीवादी सरकार को स्वीकारने के बेहद करीब पहुंच चुका है

दक्षिणपंथी ताकतें पूरी दुनिया के पैमाने पर उभार पर हैं। शासक वर्ग का इनको समर्थन दिनोंदिन बढ़ता जा रहा है और इस समर्थन पर सवार हो अपने विभाजनकारी मुद्दों के जरिये ये जनता

आलेख

/punjivadi-jantantra-and-chunavi-corruption

अठारहवीं सदी के इंग्लैण्ड में होने वाले चुनावी भ्रष्टाचार पर गूगल से ‘सर्च’ करने पर उसका ए आई स्वतः ही यह जवाब हाजिर कर देता हैः 

/election-aayog-hindu-fascist-and-loktantra

एस.आई.आर. प्रक्रिया के दौरान बड़े पैमाने पर मतदाताओं की कटौती की गई। अब तक 13 करोड़ से ज्यादा मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटा दिए गए। जबकि 5-6 करोड़ लोगों को संदेह की आड़ में नोटिस भेजे गए। 13 करोड़ में से 70 प्रतिशत वो लोग थे जिन्हें स्थानांतरित या अनुपस्थित बता दिया गया। इस तरह बड़े स्तर पर मनमानी छंटनी की जा रही है। इसमें सबसे बड़ी संख्या अल्पसंख्यक, दलित, आदिवासी, महिलाओं और मलिन बस्तियों में रहने वालों की है।

/uddharak-ideology-ki-talaas

इस मजदूर आंदोलन की विचारधारा मार्क्सवाद का यह स्पष्ट कहना था कि महान फ्रांसीसी क्रांति के जमाने से ही पूंजीपति वर्ग ने अपने समाज के लिए जो आदर्श घोषित कर रखा है- स्वतंत्रता, समता, बंधुत्व का आदर्श- वह पूंजीवाद की निजी सम्पत्ति के कारण कभी भी हासिल नहीं किया जा सकता। पूंजी के रूप में निजी सम्पत्ति के रहते स्वतंत्रता का मतलब होगा बाजार में खरीद-बेच की स्वतंत्रता, समता का मतलब होगा बाजार में खरीददार व विक्रेता की समता तथा बंधुत्व का मतलब होगा खरीद-बेच की व्यवस्था पर सहमति।

/war-and-diplomacy-uthal-puthal-se-bhari-duniyaa

गाजापट्टी में इजरायल की कत्लेआम करने की मुहिम जारी है। इजरायली यहूदी नस्लवादी न तो किसी समझौते को मान रहे हैं और न ही वे अपनी विनाश लीला को रोक रहे हैं। वे नस्लीय सफाये की मुहिम चला रहे हैं। इसके जवाब में हमास और अन्य प्रतिरोध संगठन इजरायली कब्जाकारी सेना पर प्रहार कर रहे हैं। 

/amerika-ka-iran-par-operation-d-day-hatasha-ka-parinam

अपने व्यापक नुकसान को देखते हुए अमरीकी साम्राज्यवादियों ने अप्रैल महीने में युद्ध विराम किया और फिर पाकिस्तान की मध्यस्थता में एक ज्ञापन समझौता किया। इस ज्ञापन समझौते में अधिकांशतः ईरान की मांगें स्वीकार की गयीं। यह वस्तुतः अमरीका की पराजय थी। इस समझौते के थोड़े ही दिनों बाद अमरीका ने इसका उल्लंघन शुरू कर दिया। इजरायल ने एक भी दिन इस समझौते को नहीं माना।