दिल्ली विस्फोट : मोदी सरकार की विफलता
दिल्ली विस्फोट में 13 निर्दोष लोगों की जान जा चुकी है। सरकार ने इस विस्फोट पर अपनी खुफिया विफलता स्वीकारने के बजाय हमेशा की तरह ‘दोषी बख्शे नहीं जायेंगे’ का राग छेड़ने का
दिल्ली विस्फोट में 13 निर्दोष लोगों की जान जा चुकी है। सरकार ने इस विस्फोट पर अपनी खुफिया विफलता स्वीकारने के बजाय हमेशा की तरह ‘दोषी बख्शे नहीं जायेंगे’ का राग छेड़ने का
संघी ठीक इसी वैज्ञानिक पद्धति को नकारते हैं या उसका मन माफिक इस्तेमाल करते हैं। वे अच्छी तरह जानते हैं कि आज की वैज्ञानिक पद्धति के द्वारा वेदों में आधुनिक विज्ञान को नहीं ढूंढा जा सकता। इसी तरह आज की वैज्ञानिक पद्धति से प्राचीन भारत में परमाणु बम, मिसाइल या हवाई जहाज के अस्तित्व को नहीं प्रमाणित किया जा सकता। इसीलिए वे अपनी सुविधानुसार इस वैज्ञानिक पद्धति को नकारते हैं या तोड़ते-मरोड़ते हैं। और कोई चारा न होने पर ये सापेक्षिकतावादी या संदेहवादी रुख अख्तियार कर लेते हैं। आधुनिक विज्ञान और वैज्ञानिक पद्धति को संदेह के दायरे में लाकर ये अपनी बेसिर-पैर की बातों को जायज ठहराने का प्रयास करते हैं।
दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ की अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद की नवनिर्वाचित संयुक्त सचिव दीपिका झा द्वारा अम्बेडकर कालेज के एक प्रोफेसर सुजीत कुमार को थप्पड़ मारने की घट
कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) ने ईपीएफ में कर्मचारियों के जमा पैसों के निकासी के नियमों में कुछ ऐसे बदलाव किये हैं, जिससे करीब 7 करोड़ ईपीएफ अंशधारकों में चिंता और ब
चुनाव आयोग बिहार में विशेष गहन पुनरीक्षण कराने के बाद अब इसे पूरे देश पर थोपने को उतारू है। इस सम्बन्ध में 28 अक्टूबर से 7 फरवरी तक 12 राज्यों में एस आई आर की घोषणा चुनाव
हिंदू फासीवादी मोदी सरकार एवं भाजपा शासित राज्य सरकारों में हर तरह से जनवाद और लोकतंत्र का गला घोंटा जा रहा है। जनता को फासीवादी आतंक के साये में जीने मजबूर किया जा रहा ह
देश और देश के अलग-अलग राज्यों में अपराधों को बताने के लिए सरकारी संस्थाएं हर साल एक रिपोर्ट तैयार करती हैं और उस रिपोर्ट को जारी करती हैं ताकि देश में अपराधों की स्थिति क
9 अक्टूबर 2025 को तालिबानी विदेश मंत्री आमीर खान मुत्ताकी पहली बार भारत दौरे पर आये हैं। ये महोदय 7 दिन तक भारत में रहेगें और अलग-अलग राज्यों में घूमेंगे। ये उसी तालिबानी
बात 1917 की है। अमेरिका के न्यूयार्क शहर में एक प्रदर्शनी का आयोजन किया गया जिसमें मूर्तिकार अपनी कलाकृतियां प्रदर्शित कर सकते थे। एक अनोखी कलाकृति ने इस प्रदर्शनी में सब
अठारहवीं सदी के इंग्लैण्ड में होने वाले चुनावी भ्रष्टाचार पर गूगल से ‘सर्च’ करने पर उसका ए आई स्वतः ही यह जवाब हाजिर कर देता हैः
एस.आई.आर. प्रक्रिया के दौरान बड़े पैमाने पर मतदाताओं की कटौती की गई। अब तक 13 करोड़ से ज्यादा मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटा दिए गए। जबकि 5-6 करोड़ लोगों को संदेह की आड़ में नोटिस भेजे गए। 13 करोड़ में से 70 प्रतिशत वो लोग थे जिन्हें स्थानांतरित या अनुपस्थित बता दिया गया। इस तरह बड़े स्तर पर मनमानी छंटनी की जा रही है। इसमें सबसे बड़ी संख्या अल्पसंख्यक, दलित, आदिवासी, महिलाओं और मलिन बस्तियों में रहने वालों की है।
इस मजदूर आंदोलन की विचारधारा मार्क्सवाद का यह स्पष्ट कहना था कि महान फ्रांसीसी क्रांति के जमाने से ही पूंजीपति वर्ग ने अपने समाज के लिए जो आदर्श घोषित कर रखा है- स्वतंत्रता, समता, बंधुत्व का आदर्श- वह पूंजीवाद की निजी सम्पत्ति के कारण कभी भी हासिल नहीं किया जा सकता। पूंजी के रूप में निजी सम्पत्ति के रहते स्वतंत्रता का मतलब होगा बाजार में खरीद-बेच की स्वतंत्रता, समता का मतलब होगा बाजार में खरीददार व विक्रेता की समता तथा बंधुत्व का मतलब होगा खरीद-बेच की व्यवस्था पर सहमति।
गाजापट्टी में इजरायल की कत्लेआम करने की मुहिम जारी है। इजरायली यहूदी नस्लवादी न तो किसी समझौते को मान रहे हैं और न ही वे अपनी विनाश लीला को रोक रहे हैं। वे नस्लीय सफाये की मुहिम चला रहे हैं। इसके जवाब में हमास और अन्य प्रतिरोध संगठन इजरायली कब्जाकारी सेना पर प्रहार कर रहे हैं।
अपने व्यापक नुकसान को देखते हुए अमरीकी साम्राज्यवादियों ने अप्रैल महीने में युद्ध विराम किया और फिर पाकिस्तान की मध्यस्थता में एक ज्ञापन समझौता किया। इस ज्ञापन समझौते में अधिकांशतः ईरान की मांगें स्वीकार की गयीं। यह वस्तुतः अमरीका की पराजय थी। इस समझौते के थोड़े ही दिनों बाद अमरीका ने इसका उल्लंघन शुरू कर दिया। इजरायल ने एक भी दिन इस समझौते को नहीं माना।