विविध

गिरफ्तार मजदूरों और मजदूर कार्यकर्ताओं को बिना शर्त रिहा करने की मांग

गुड़गांव/ मानेसर (गुड़गांव) और नोएडा (उत्तर प्रदेश) उत्तराखंड में हुए मजदूर आन्दोलन और उसके दमन के खिलाफ मजदूर अधिकार संघर्ष अभियान (मासा) ने दिनांक 21 जून

बैरागीवाला घटनाक्रम को साम्प्रदायिक रंग देने की कोशिश

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(क्रांतिकारी लोक अधिकार संगठन, चेतना आंदोलन, उत्तराखंड महिला मंच, इंसानियत मंच, सी पी आई, सी पी एम, सी पी आई एम एल-लिबरेशन, मजदूर संघर्ष संगठन, तंजीम ए रहनुमा ए मिल्ल

सेवा सुरक्षा, सम्मान और अधिकारों को लेकर भोजनमाताओं का प्रदर्शन

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भीमताल/ 30 जून 2026 को प्रगतिशील भोजनमाता संगठन, उत्तराखण्ड के आह्वान पर आज बड़ी संख्या में भोजनमाताओं ने अपनी वर्षों पुरानी समस्याओं और न्यायोचित मांगों

योगी सरकार की निरंकुशता

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उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के 30 जून को बरेली दौरे के मद्देनजर इंकलाबी मजदूर केंद्र के शहर सचिव ध्यान चंद्र मौर्या एवं आटो रिक्शा टेम्पो चालक वेलफेयर एसोस

श्रमिक संयुक्त मोर्चा के कार्यकारी अध्यक्ष के खिलाफ गुंडा एक्ट की कार्यवाही के विरोध में प्रेस वार्ता

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रुद्रपुर/ ऊधमसिंह नगर के जिलाधिकारी द्वारा जिले के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक की रिपोर्ट के आधार पर श्रमिक संयुक्त मोर्चा ऊधमसिंह नगर के कार्यकारी अध्यक्ष एवं

नवयुवक केतन की हत्या के विरोध में जातिवाद का पुतला दहन!

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हल्द्वानी/ 8 जून को टिहरी जिले के देवल गांव में कक्षा 12 के छात्र नवयुवक केतन लाल की जातीय दंभ के कारण निर्मम हत्या कर दी गयी। इस घटना से साफ है कि जातीय

जीवटता और जिंदगी की मिसाल: कामरेड लक्ष्मी पंत को लाल सलाम

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अत्यंत दुःख के साथ सूचित करना पड़ रहा है कि प्रगतिशील महिला एकता केन्द्र की वरिष्ठ कामरेड लक्ष्मी पंत 13 जून की सुबह हमें छोड़कर इस संसार से चली गयीं। वे 73 वर्ष की थीं। उम

मजदूर आंदोलन के दौरान जेल अनुभव

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मानेसर औद्योगिक इलाके में पिछले 2 अप्रैल से ठेका मजदूरों के संघर्ष शुरू हुये थे। ये संघर्ष स्वतः स्फूर्त थे। ठेका मजदूरों के इस आंदोलन की मुख्यतः मांगें न्यूनतम वेतन में

आलेख

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अमरीकी साम्राज्यवादी और इजरायली शासक सोचते थे कि ईरान के शीर्ष नेतृत्व का सफाया करने के बाद ईरानी जनता अपनी सत्ता के विरुद्ध उठ खड़ी होगी और इसका फायदा उठाते हुए अमरीकी साम्राज्यवादी अपनी किसी कठपुतली को सत्ता में स्थापित कर देंगे। लेकिन ऐसा नहीं हुआ। ईरानी अवाम अपनी सत्ता के समर्थन में मजबूती से खड़ी हो गई। यहां से अमरीकी साम्राज्यवादियों को समझ में आ गया कि वे ईरान पर कब्जा नहीं कर सकते।

/war-anay-sadhanon-se-politics-ka-hi-jaari-roop-hai

अमेरिकी साम्राज्यवादी पश्चिम एशिया में और सारी दुनिया में अपनी साम्राज्यवादी जकड़न को खत्म नहीं होने देना चाहेंगे। वे इसके खिलाफ हर संभव प्रयास करेंगे। एक हमले में मुंह की खाने के बाद वे सबक लेकर आगे हमला करने से तौबा नहीं करेंगे। यह उनकी साम्राज्यवादी फितरत के खिलाफ होगा। यानी वे ईरान पर काबू पाने के लिए दूसरे तरीकों की खोज में लग जायेंगे।

/emerjency-tab-aur-ab

पिछले दस-बारह सालों में हिन्दू फासीवादियों ने इस अनौपचारिक आपातकाल की शैली को काफी विकसित किया है। कहां किस छेद का इस्तेमाल करना है, इसमें उन्होंने महारत हासिल की है। इनके इस कृत्य में न्यायपालिका की सहभागिता से यह काम और आसान हो गया है। मतदाता सूची का विशेष गहन पुनर्रीक्षण इस सबका विशिष्ट उदाहरण है।

/piketi-ka-global-justice-project-samraajyavad-ki-pairokari

जैसा कि इंटरव्यू के शीर्षक से स्पष्ट है कि पिकेटी एक ऐसी दुनिया का ख्वाब परोसते हैं जिसमें बगैर पर्यावरण को नुकसान पहुंचाये ज्यादातर लोग खुशहाल बन सकते हैं। इस सुन्दर दुनिया को हासिल करने के लिए वे किसी वर्ग संघर्ष बढ़ाने या क्रांति की वकालत नहीं करते। बल्कि वे कुछ नुस्खे सुझाते हैं जिस पर चल कर मौजूदा पूंजीवादी-साम्राज्यवादी दुनिया को ही खुशनुमा बनाया जा सकता है। 

/amerika-dwaara-iran-par-naya-hamala-isake-doorgami-result

अमरीकी साम्राज्यवादी वर्चस्व को बढ़ाने में पश्चिम एशिया में दृढ़ स्तम्भ इजरायल रहा है। 1979 से पहले ईरान का शासक शाह रजा पहलवी  भी इस क्षेत्र में अमरीका का लठैत रहा है। 1979 में रजा पहलवी का तख्ता उलटने के बाद जो इस्लामी सत्ता आयी, वह लगातार अमरीकी साम्राज्यवाद की वर्चस्ववादी नीतियों का विरोध करती रही थी। यह सत्ता इजरायल द्वारा फिलिस्तीनियों को उजाड़े जाने और उनकी जमीनों पर यहूदी बस्तियां बसाने का विरोध करती रही है।