अंकिता भंडारी हत्याकांड के दोषियों को उम्र कैद

अंकिता भंडारी हत्याकांड उत्तराखंड में एक बहुत चर्चित मामला रहा है। ऋषिकेश के वंतरा रिजॉर्ट में अंकिता रेशेपनिस्ट के तौर पर काम करती थी। 19 साल की अंकिता की हत्या कर दी गई थी। पुलिस ने हत्या के मामले में भाजपा नेता के बेटे पुलकित आर्य और तीन अन्य को दोषी ठहराया था।

आज दिनांक 30 जून को कोटद्वार से सेशन कोर्ट में 2 साल की लंबी सुनवाई के बाद कोर्ट ने तीनों दोषियों (मालिक पुलकित आर्य, रिजॉर्ट के प्रबंधक सौरभ भास्कर और सहायक प्रबंधक अंकित उर्फ पुलकित गुप्ता) को आरोपी माना और उन्हें आज उम्र कैद की सजा हुई और 50-50 हजार का जुर्माना लगाया गया।

आज फैसले की तारीख को देखते हुए सामाजिक संगठन, इंसाफ पसंद नागरिकों द्वारा प्रदर्शन किया गया। प्रदर्शनकारी अपराधियों के लिए फांसी की मांग कर रहे थे।

कोटद्वार पुलिस प्रशासन ने पूरे शहर को पुलिस छावनी में बदल दिया था। कोर्ट जाने वाले हर रास्ते पर पुलिस ने भारी पुलिस बल तैनात कर दिया था और जगह-जगह पुलिस बैरिकेडिंग लगा दी गई थी।

बैरिकेडिंग के पास लोगों ने जबरदस्त नारेबाजी की और सरकार व पुलिस के इस व्यवहार पर नाराजगी व्यक्त की। प्रदर्शनकरियो ने कई बार पुलिस बैरिकेडिंग को तोड़ने का प्रयास किया लेकिन पुलिस ने उन्हें रोक लिया।

गौरतलब है 18 सितम्बर 2022 को अंकिता भंडारी जो पुलकित आर्य के होटल में रिसेप्शनिस्ट का काम करती थी अचानक गायब हो गयी और फिर उसकी लाश चीला नहर में पाई जाती है। पता चलता है कि पुलकित आर्य अंकिता भंडारी से वीआईपी लोगों के लिए अपने शरीर को बेचने के लिए दबाव बना रहा था। मना करने पर पुलकित आर्य और उसके दो अन्य सहयोगियों ने अंकिता भंडारी की हत्या करके उसकी लाश को चीला नहर में फेंक दिया।

पुलकित आर्य भाजपा नेता विनोद आर्य का बेटा है। शुरू से ही इस मामले में सत्ता का जोर दिखता रहा है। सबसे पहले तो कार्रवाई के नाम पर सबूत की जगह होटल के कमरे पर ही बुलडोजर चलाकर सबूत नष्ट करने का आरोप स्थानीय लोग लगाते रहे। हत्याकांड का विरोध और न्याय की मांग कर रहे लोगों पर पुलिस का उत्पीड़न जारी रहा। पूरी कार्रवाई में ऐसा प्रतीत होता रहा कि प्रशासन सत्ता के दबाव में मामले को शांत कर देना चाहता है। घटना की लगातार रिपोर्टिंग कर रहे पत्रकार को भी पुलिस ने प्रताड़ित किया।

लेकिन अंकिता भंडारी हत्याकांड पूरे उत्तराखंड में एक चर्चित मामला बन गया। लोग इस घटना से क्षुब्ध और आक्रोशित थे। समय-समय पर पूरे प्रदेश में अलग-अलग जगह पर लगातार धरना प्रदर्शन होते रहे।

आज इस मामले में कोर्ट का फैसला आया है लेकिन कई सारे सवाल बने ही रहेंगे। रसूखदार भाजपा नेताओं का इन अपराधों में शामिल होना और पुलिस प्रशासन पर मामले को रफा दफा करने का दबाव पैदा होना भी एक ज्वलंत सवाल बना हुआ है।

इसके अलावा उत्तराखंड में ही रुद्रपुर में एक नर्स के साथ बलात्कार और उसके बाद उसकी हत्या का सवाल मौजूद है। मज़दूर महिलाओं के साथ आये दिन फैक्टरी और आते जाते समय यौन हिंसा का सवाल मौजूद है।

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