हरिद्वार में मजदूर नेताओं पर लगाया गुंडा एक्ट, किया जिला बदर

Published
Sun, 11/01/2026 - 07:50
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मजदूर संगठनों का चौतरफा व्यापक विरोध प्रदर्शन

हरिद्वार/ 16 अक्टूबर को ए डी एम हरिद्वार ने अपने आदेश में इंकलाबी मजदूर केन्द्र के केंद्रीय उपाध्यक्ष पंकज बवाड़ी, केंद्रीय परिषद के सदस्य जय प्रकाश और पी पी आई डी के ललित कुमार को गुंडा एक्ट के तहत 4 माह के लिए जिला बदर कर दिया।         
    
इंकलाबी मजदूर केन्द्र के कार्यकर्ताओं पर गुंडा एक्ट लगाने के लिए पुलिस प्रशासन ने अप्रैल 2025 में एंकर पैनासोनिक के मजदूरों के वेतन वृद्धि आंदोलन में लगे मुकदमों को आधार बनाया। इस आंदोलन में पहला मुकदमा एंकर पैनासोनिक के प्रबंधन द्वारा 9 मजदूर नेताओं पर और दूसरा सिडकुल पुलिस द्वारा 11 मजदूर नेताओं पर फर्जी मुकदमा लगाया गया। इन फर्जी मुकदमों में अभी तक कोई बयान भी नहीं हुए हैं। 2026 में जब पूरे देश भर के कई राज्यों के ठेका मजदूर न्यूनतम वेतन बढ़ाने, 8 घंटे कार्यदिवस व ओवरटाइम के दुगुने भुगतान के लिए संघर्ष कर रहे थे, तब उसी कड़ी में 8 मई को हरिद्वार में कैंपस फुटवियर और 9 मई को हेमिल्टन कंपनी के ठेका मजदूर भी कंपनी से बाहर आये। इन दोनों कंपनियों के मजदूरों को इंकलाबी मजदूर केंद्र और संयुक्त संघर्षशील ट्रेड यूनियन मोर्चा हरिद्वार व यूथ कांग्रेस तथा पीपुल यूथ फ्रंट के नेताओं ने नेतृत्व दिया और श्रम विभाग के अधिकारी व अपर जिला अधिकारी की उपस्थिति में मजदूरों और प्रबंधन वर्ग के मध्य समझौता कराया। जिसमें इन श्रमिक प्रतिनिधियों के हस्ताक्षर भी मौजूद हैं। इसके बाद ही सिडकुल के पूंजीपतियों की तहरीर पर पुलिस द्वारा 10 मई को 22 मजदूरों और मजदूर नेताओं पर दो-दो फर्जी मुकदमे लगा दिये जाते हैं। जिसमें इंकलाबी मजदूर केंद्र के केंद्रीय उपाध्यक्ष पंकज बवाड़ी, केन्द्रीय परिषद सदस्य जय प्रकाश व प्रगतिशील महिला एकता केंद्र की महासचिव नीता शामिल हैं। 
    
2 मुकदमे 2025 में और 2 मुकदमे 2026 में दर्ज कर इन्हें आधार बना 13 मई को पंकज बवाड़ी और जय प्रकाश को गुंडा एक्ट का नोटिस भेजा गया, जिसकी 22 मई को पहली तारीख थी।         

लेकिन 12 मई को पी पी आई डी के ललित कुमार को जिला बदर कर दिया गया। ललित कुमार ने इसे हाईकोर्ट में चुनौती दी और इस पर तत्कालिक स्टे लग गया। हरिद्वार सिडकुल में मजदूरों के आंदोलन लगातर बढ़ती पर थे। एक ही दिन में 3-4 कंपनियों के मजदूर सड़कों पर आने लगे, स्पेशल आपरेशन ग्रुप (एस ओ जी) द्वारा इंकलाबी मजदूर केन्द्र के नेताओं को हिरासत में लेकर डराने-धमकाने का काम किया गया। एक दिन इमके के कार्यालय से इमके कार्यकर्ताओं व नेताओं पूरे दिन बाहर ही नहीं आने दिया गया। पुलिस के बड़े अधिकारी कहते रहे कि वे लोग मजदूर आंदोलन में न जायें। अंततः भारी पुलिस और अर्ध सैनिक बलों के दम पर मजदूरों के आक्रोश को दबाने में पुलिस प्रशासन सफल हुआ।
    
22 मई से 25 जुलाई तक गुंडा एक्ट पर तारीख लगी, पहली और दूसरी तारीख में विभिन्न मजदूर संगठनों और सामाजिक संगठनों व ट्रेड यूनियनों द्वारा इसका प्रतिरोध किया गया। कई स्तरों पर ज्ञापन देकर विरोध प्रदर्शन किये गए।
    
उपरोक्त दो माह में एडीएम द्वारा पुलिस से कोई साक्ष्य नहीं मांगे गये केवल मजदूर नेताओं का लिखित जवाब लिया गया। इसके बाद 3 माह तक कोई तारीख नहीं दी गयी। 
    
अचानक 14 अक्टूबर की रात 8ः30 बजे मजदूर नेताओं को फोन पर सूचना दी गई कि 15 अक्टूबर को सुनवायी है। अपने वकील को भेज देना। जब उन्होंने कहा कि वे शहर में नहीं हैं तो 16 अक्टूबर की तारीख दे दी गई। 16 अक्टूबर को वकील के बयानों को दर्ज भी नहीं किया, और न ही पुलिस की ओर से कोई साक्ष्य प्रस्तुत हुए। ऐसा लग रहा था कि निर्णय तैयार है, और ये केवल औपचारिकता का ढकोसला हो रहा है।
    
पी पी आई डी के ललित कुमार को भी 16 अक्टूबर को बुलाया गया। और तीनों मजदूर नेताओं को गुंडा एक्ट के तहत 4 माह के लिए जिला बदर का आदेश दे दिया गया। लेकिन यह आदेश उस समय उनको नहीं बताया गया। 23 अक्टूबर की सुबह जय प्रकाश को एस ओ जी द्वारा सादे कपड़ों में घर से थाने लाया गया, उनका फोन ले लिया गया। किसी भी व्यक्ति को फोन तक नहीं करने दिया और फिर शाम के समय अकेले चिड़ियापुर के जंगल में बीराने में छोड़ दिया गया। 23 अक्टूबर को ही नारसन के बार्डर पर ललित कुमार को भी जिला बदर किया गया। पंकज बवाड़ी के बाहर होने के कारण, सिडकुल पुलिस ने उनके घर पर जाकर, उनकी पत्नी को अपना पुलिसिया रुतवा दिखाकर परेशान किया।
    
हरिद्वार जिला प्रशासन व पुलिस प्रशासन के इस मजदूर विरोधी कृत्य के खिलाफ 24 अक्टूबर को जिला कलेक्ट्रेट में विभिन्न संगठनों के द्वारा विरोध प्रदर्शन कर ज्ञापन दिया गया।
    
26 अक्टूबर को हरिद्वार प्रेस क्लब में प्रेस कान्फ्रेंस के दौरान पंकज बवाड़ी ने मजदूर नेताओं का पक्ष रखा, और पुलिस प्रशासन और जिला प्रशासन के मजदूर विरोधी रवैये को और पूंजीपतियों के प्रति धामी सरकार की पक्षधरता को स्पष्ट रूप से रखा। पुलिस प्रशासन को कहा गया कि वे उन्हें प्रेस कान्फ्रेंस से जिला बदर करें न कि चोरों की तरह चोरी से रात में आकर जिला बदर करें।
    
पुलिस को पता था कि यदि वह पंकज को जिला बदर करने के लिए प्रेस कांफ्रेंस वाली जगह पर गयी तो उससे भी सवाल-जवाब किये जायेंगे इसलिए पुलिस ने प्रेस कान्फ्रेंस से पंकज को नहीं उठाया। प्रेस कांफ्रेंस के बाद मजदूर नेताओं को जिला बदर के फैसले के खिलाफ विभिन्न मजदूर व सामाजिक संगठनों द्वारा हरिद्वार के सिटी मजिस्ट्रेट कार्यालय पर विरोध प्रदर्शन किया गया। फिर सामूहिक रूप से सिडकुल थाने तक जुलूस निकाल कर प्रदर्शन किया गया और पुलिस प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की गई। लेकिन पुलिस तो पंकज को जिला बदर करने के आदेश पर अड़ी थी। जब जिला बदर के आदेश पर पुलिस ने पंकज से हस्ताक्षर करवाते समय यह पूछा गया कि वे कहां जाना चाहते हैं तो उन्होंने देहरादून जाने की इच्छा जताई। इस पर पुलिस ने सहमति जताते हुए पुलिस की गाड़ी में बैठने को कहा। लेकिन पुलिस अपने कहे से मुकर कर पंकज को भी चिड़ियापुर के जंगल में ही छोड़ने  गयी। पुलिस ने ऐसा करने का कारण ऊपरी आदेश का आना बताया। इस पर पुलिस से काफी नोंकझोक हुई। वहां मौजूद लोगों ने पुलिस से पूछा कि आदेश जिला बदर के हैं। आप पंकज को प्रदेश बदर क्यों कर रहे हैं? इस पर कोई उन्होंने कोई जवाब नहीं  दिया और उलटा लोगों को हरिद्वार में आने पर देख लेने की धमकी दी गयी। 
    
इंकलाबी मजदूर केन्द्र और संयुक्त संघर्षशील ट्रेड यूनियन मोर्चा द्वारा मजदूर नेताओं को जिला बदर किये जाने के खिलाफ आंदोलन चलाया जा रहा है। 28 अक्टूबर से हरिद्वार के मजदूरों के मध्य पर्चा निकालकर वितरित किया जा रहा है। पूरे शहर में पोस्टर चस्पा किए जा रहे हैं। 1 नवंबर को चिन्मय डिग्री काॅलेज के सामने एक विशाल मजदूर पंचायत का आयोजन का आह्वान किया जा रहा है।
    
इसके अलावा उत्तर प्रदेश के बरेली, मऊ, बलिया, हरियाणा के फरीदाबाद, गुड़गांव व दिल्ली तथा कुमाऊं मंडल के रामनगर, काशीपुर, रुद्रपुर, पंतनगर, लालकुआं शहरों में इस मजदूर विरोधी कार्यवाही का विरोध पुतले फूंक कर, विरोध सभाएं कर किया गया। गुंडा एक्ट को रद्द करने के लिए ज्ञापन भी दिए गए।
    
29 अक्टूबर को दिल्ली के उत्तराखंड भवन पर कई क्रांतिकारी संगठनों ने विरोध प्रदर्शन कर ज्ञापन दिया। इस कार्यवाही में हरिद्वार से जिला बदर किए दोनों मजदूर नेता पंकज व जय प्रकाश भी उपस्थित रहे।
    
1 नवंबर के बाद भी यदि धामी सरकार मजदूर नेताओं के जिला बदर के आदेश को रद्द नहीं करती है तो 15 नवंबर को पूरे देश से मजदूर संगठन हरिद्वार में मजदूर महापंचायत करेंगे, आंदोलन को और उग्र किया जायेगा। सड़क के संघर्ष के साथ कानूनी लड़ाई की तैयारी भी की जा रही है।
    
मजदूर आंदोलन दमन की कार्यवाही से रुकने के स्थान पर और तीव्र गति से आगे बढ़ रहा है।         -हरिद्वार संवाददाता

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