इंटरार्क मजदूरों का संघर्ष जारी - जनसुनवाई का ऐलान

रुद्रपुर/ जिला प्रशासन की मध्यस्थता में सम्पन्न हुए समझौता दिनांक 15 दिसम्बर 2022 को लागू कराने को इंटरार्क मजदूरों का आंदोलन जारी है। विदित हो कि वर्ष 2022 में इंटरार्क कंपनी सिडकुल पंतनगर एवं किच्छा जिला ऊधमसिंह नगर (उत्तराखंड) में कार्यरत मजदूरों का व्यापक एवं जुझारू आंदोलन हुआ था। इस आंदोलन में मजदूरों के परिवारों की महिलाओं एवं बच्चों की सशक्त भूमिका एवं किसान यूनियनों की व्यापक भागीदारी से यह आंदोलन पूरे ही क्षेत्र में बहुत अधिक चर्चित हुआ। और मजदूरों द्वारा उठाये गए जुझारू कदमों व व्यापक प्रचार से पूरे ही क्षेत्र की मजदूर-मेहनतकश जनता का भौतिक व भावनात्मक जुड़ाव इस आंदोलन के साथ कायम हो गया था जो कि कंपनी मालिक व शासन-प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बन गया था। 
    
मामले की गंभीरता को समझते हुए उक्त मसले के समाधान हेतु तत्कालीन जिलाधिकारी द्वारा अपरजिलाधिकारी प्रशासन एवं नजूल की अध्यक्षता में जिला स्तरीय कमेटी का गठन किया गया। जिसमें SP क्राइम, सिडकुल पंतनगर के क्षेत्रीय प्रबंधक एवं सहायक श्रमायुक्त को भी शामिल किया था। उक्त चारों अधिकारियों के नेतृत्व में कंपनी प्रबंधन व श्रमिक प्रतिनिधियों के मध्य त्रिपक्षीय समझौता दिनांक 15 दिसम्बर 2022 को सम्पन्न हुआ था। जिसके बिंदु संख्या-(3) में साफ-साफ लिखा है कि आंदोलन के दौरान दोनों कंपनियों से निलंबित किये गए सभी 64 मजदूरों का निलंबन समाप्त कर उन्हें कार्य पर बहाल किया जायेगा जिनमें से 34 मजदूरों की कंपनी द्वारा घरेलू जांच कराई जायेगी। किन्तु किसी भी मजदूर को घरेलू जांच के दौरान एवं जांच के पश्चात नौकरी से बर्खास्त नहीं किया जायेगा। समझौते के बिंदु संख्या-7 व 8 में 2 वर्ष की वेतन वृद्धि की बात दर्ज है।                                               
    
कंपनी मालिक द्वारा करीब डेढ़ माह पूर्व उक्त 34 मजदूरों में से 11 मजदूरों की एकतरफा घरेलू जांच कराई गई और उन्हें दोषी घोषित करते हुये नौकरी से बर्खास्त कर उक्त समझौते का घोर उल्लंघन किया गया। उक्त 34 मजदूरों में से 11 बर्खास्त मजदूरों के अलावा शेष मजदूरों को भी अभी तक उनकी सिडकुल पंतनगर एवं किच्छा स्थित मूल नियोजक कंपनी में कार्य पर बहाल नहीं किया गया है। बल्कि हाईकोर्ट के हस्तक्षेप के पश्चात उनके राज्य से बाहर स्थानांतरण पर रोक लगा वर्क फ्राम होम के नाम पर कार्यबहाली की गई है। उन्हें विगत 3 माह से कंपनी पूरा वेतन तो दे रही है किंतु कोई कार्य नहीं करा रही है, जो कि एक गहरी साजिश का ही हिस्सा है। उक्त समझौते के तहत उनकी वेतन वृद्धि भी नहीं की गई है। जबकि दोनों कंपनियों में कार्यरत करीब 1000 मजदूरों की वर्ष 2022-2023 व वर्ष 2023-2024 हेतु 2 वर्ष के लिए 3000-3600 रुपये तक की वेतन वृद्धि की गई है ताकि कंपनी में कार्यरत मजदूर बाहर वाले मजदूरों का साथ छोड़ दें और खुद को आंदोलन से दूर कर लें। हालांकि कंपनी मालिक की उक्त साजिश फिलहाल विफल होती प्रतीत हो रही है। क्योंकि सभी मजदूर पूरे जुझारूपन व जोशोखरोश से अपने परिवार की महिलाओं व बच्चों संग आंदोलन में शामिल हो रहे हैं।                     
    
समझौते के उक्त उल्लंघन पर खासकर 11 मजदूरों को बर्खास्त करने की घटना से मजदूर बहुत अधिक आक्रोशित हैं और सड़कों पर उतरकर निरंतर संघर्ष कर रहे हैं। इसी क्रम में 21 जुलाई 2023 को दोनों कंपनियों के मजदूरों द्वारा अपनी यूनियनों के नेतृत्व में कुमाऊं मंडलायुक्त, नैनीताल के कार्यालय के समक्ष अपने परिवारों की महिलाओं, बच्चों व ट्रेड यूनियनों एवं सामाजिक संगठनों के साथियों संग मिलकर जोरदार प्रदर्शन किया गया। उस दिन मजदूरों के प्रदर्शन को रोकने को प्रशासन द्वारा बहुत कोशिश की गई। आधे रास्ते में ज्योलीकोट पर पुलिस द्वारा प्रदर्शनकारियों की बसों को जबरन रोक दिया और नैनीताल में चल रहे मेले का हवाला दिया और बसों को आगे ले जाने से मना कर दिया। इंकलाबी मजदूर केंद्र के कार्यकर्ताओं की सलाह पर मजदूरों, महिलाओं ने पैदल मार्च निकालते हुए नैनीताल कूच करने का निर्णय लिया और सभी प्रदर्शनकारी नारेबाजी करते हुए पैदल मार्च निकालते हुए नैनीताल को ओर को चल पड़े। इससे प्रशासन दबाव में आया और बसों को आगे ले जाने की अनुमति दे दी। इसके पश्चात नैनीताल शहर से तीन-चार किलोमीटर दूर फिर से बसों को रोक दिया गया। वहां से नारेबाजी करते हुए पदयात्रा निकालते हुए सभी प्रदर्शनकारी कुमाऊं कमिश्नरी पहुंचे।                          
    
कुमाऊं कमिश्नरी पर प्रदर्शनकारियों द्वारा जोरदार प्रदर्शन किया गया। कुमाऊं आयुक्त की अनुपस्थिति में अतिरिक्त आयुक्त (एडिशनल कमिश्नर) के माध्यम से कुमाऊं आयुक्त को ज्ञापन प्रेषित किया और तत्काल हस्तक्षेप कर समझौते को लागू कराने की मांग की। साथ ही चेतावनी दी कि समझौता लागू न कराने की स्थिति में 7 अक्टूबर 2023 को हल्द्वानी में कुमाऊं आयुक्त द्वारा जनसुनवाई के लिए लगाए जाने वाले साप्ताहिक जनता दरबार के समानान्तर महिलाओं के नेतृत्व में इंटरार्क मजदूर संगठन के बैनर तले हल्द्वानी शहर स्थित बुद्धपार्क में मजदूरों, महिलाओं, अन्य ट्रेड यूनियनों व सामाजिक संगठनों संग मिलकर ‘जन न्याय सुनवाई’ के तहत जनसुनवाई की जायेगी और उक्त प्रकरण के समाधान हेतु प्रस्ताव पारित कर अंतिम निर्णय लिया जायेगा। और तत्पश्चात सभी प्रदर्शनकारी महिलाओं के नेतृत्व में पदयात्रा निकालते हुए मानव श्रृंखला बनाकर जनता दरबार चला रहे मंडलायुक्त के समक्ष उपस्थित होंगे। और महिलाओं के नेतृत्व में हुए उक्त जन न्याय सुनवाई के दौरान लिए गए निर्णय के अनुसार अग्रिम कार्यवाही करेंगे।                 
    
किंतु इसके अगले दिन पता चला कि 7 व 8 अक्टूबर 2023 को उत्तराखंड सरकार द्वारा हल्द्वानी के डठ इंटर कालेज के प्रांगण में अन्न (मिलेट्स) महोत्सव का आयोजन किया जा रहा है जिसमें केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह भी अतिथि के रूप में उपस्थित रहेंगे। ऐसे में मंडलायुक्त कुमाऊं द्वारा आयोजित जनता दरबार का आयोजन करना संभव न होगा।                              
    
ऐसी स्थिति में दोनों यूनियनों द्वारा कार्यक्रम में कुछ बदलाव किया गया और मजदूरों के परिवारों की महिलाओं द्वारा 26 सितंबर 2023 को जिलाधिकारी कार्यालय में प्रदर्शन किया और जिलाधिकारी के माध्यम से केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह को ज्ञापन प्रेषित किया और पूरे मसले से अवगत कराया गया। साथ ही यह सवाल भी उठाया गया कि उनके गृह मंत्रालय एवं उत्तराखंड में भाजपा की डबल इंजन की सरकार के मातहत कार्यरत ऊधमसिंह नगर जिला प्रशासन एवं मंडल प्रशासन में बैठे आई ए एस अफसर व आला अधिकारी जिला प्रशासन की मध्यस्थता में हुए उक्त समझौते को आखिर क्यों लागू नहीं करा पा रहे हैं और एक प्राइवेट कंपनी के समक्ष क्यों आत्मसमर्पण कर चुके हैं? उन्हें चेतावनी दी गई कि उक्त सवालों के उत्तर तलाशने के लिए एवं समझौते को लागू कराने को 7 अक्टूबर 2023 को महिलाओं के नेतृत्व में बुद्धपार्क हल्द्वानी में जन न्याय सुनवाई की जायेगी। और तत्पश्चात महिलाओं के नेतृत्व में सभी प्रदर्शनकारी पदयात्रा निकालते हुये मानव श्रृंखला बनाते हुए अन्न महोत्सव में उपस्थित केंद्रीय गृहमंत्री के समक्ष उपस्थित होंगे और समझौते को लागू कराने को पुरजोर आवाज उठाएंगे। जिलाधिकारी द्वारा महिलाओं को आश्वासन दिया गया कि इसकी नौबत नहीं आएगी और इससे पहले ही मसले को हल करा दिया जाएगा। अभी तक के अनुभव से तो इसकी संभावना नहीं दिखती है कि जिला प्रशासन इस दौरान मसले को हल कराएगा। इसलिए मजदूरों व महिलाओं को मानकर चलना चाहिए कि 7 अक्टूबर के उक्त प्रदर्शन की तैयारियों पर विघ्न बाधा डालकर आंदोलन को कमजोर करने को प्रशासन द्वारा कई चालें चली जायेंगी और मसले को हल कराने को तमाम झुनझुने पकड़ाये जाएंगे। किन्तु मजदूरों को इससे सावधान रहना चाहिए और यह बात गांठ बांधकर रखनी चाहिए कि उन्हें व्यापक एवं जुझारू संघर्ष के द्वारा ही कुछ हासिल होगा। इसलिए अपना सारा जोर और ध्यान 7 अक्टूबर के उक्त कार्यक्रम एवं अपने आंदोलन को व्यापक एवं उग्र बनाने की ओर ही केंद्रित करना चाहिए। इस दौरान श्रम भवन रुद्रपुर में ALC की मध्यस्थता में निरन्तर त्रिपक्षीय वार्ताएं चल रही हैं। किंतु कार्यवाही के नाम पर निल बटा सन्नाटा छाया हुआ है। विगत 2 वार्ताओं से तो प्रबंधन प्रतिनिधि वार्ता में ही नहीं पहुंचे हैं। इसके पश्चात ALC ने 23 सितम्बर 2023 को कंपनी प्रबंधन को समझौते को लागू करने को लिखित नोटिस भेजा है। अगली वार्ता 29 सितम्बर 2023 को रखी गई है। 
        -रुद्रपुर संवाददाता

आलेख

/west-asia-mein-badalata-shakti-santulan-samajhautaa-gyapan-ke-baad-ki-sthiti

अमरीकी साम्राज्यवादी और इजरायली शासक सोचते थे कि ईरान के शीर्ष नेतृत्व का सफाया करने के बाद ईरानी जनता अपनी सत्ता के विरुद्ध उठ खड़ी होगी और इसका फायदा उठाते हुए अमरीकी साम्राज्यवादी अपनी किसी कठपुतली को सत्ता में स्थापित कर देंगे। लेकिन ऐसा नहीं हुआ। ईरानी अवाम अपनी सत्ता के समर्थन में मजबूती से खड़ी हो गई। यहां से अमरीकी साम्राज्यवादियों को समझ में आ गया कि वे ईरान पर कब्जा नहीं कर सकते।

/war-anay-sadhanon-se-politics-ka-hi-jaari-roop-hai

अमेरिकी साम्राज्यवादी पश्चिम एशिया में और सारी दुनिया में अपनी साम्राज्यवादी जकड़न को खत्म नहीं होने देना चाहेंगे। वे इसके खिलाफ हर संभव प्रयास करेंगे। एक हमले में मुंह की खाने के बाद वे सबक लेकर आगे हमला करने से तौबा नहीं करेंगे। यह उनकी साम्राज्यवादी फितरत के खिलाफ होगा। यानी वे ईरान पर काबू पाने के लिए दूसरे तरीकों की खोज में लग जायेंगे।

/emerjency-tab-aur-ab

पिछले दस-बारह सालों में हिन्दू फासीवादियों ने इस अनौपचारिक आपातकाल की शैली को काफी विकसित किया है। कहां किस छेद का इस्तेमाल करना है, इसमें उन्होंने महारत हासिल की है। इनके इस कृत्य में न्यायपालिका की सहभागिता से यह काम और आसान हो गया है। मतदाता सूची का विशेष गहन पुनर्रीक्षण इस सबका विशिष्ट उदाहरण है।

/piketi-ka-global-justice-project-samraajyavad-ki-pairokari

जैसा कि इंटरव्यू के शीर्षक से स्पष्ट है कि पिकेटी एक ऐसी दुनिया का ख्वाब परोसते हैं जिसमें बगैर पर्यावरण को नुकसान पहुंचाये ज्यादातर लोग खुशहाल बन सकते हैं। इस सुन्दर दुनिया को हासिल करने के लिए वे किसी वर्ग संघर्ष बढ़ाने या क्रांति की वकालत नहीं करते। बल्कि वे कुछ नुस्खे सुझाते हैं जिस पर चल कर मौजूदा पूंजीवादी-साम्राज्यवादी दुनिया को ही खुशनुमा बनाया जा सकता है। 

/amerika-dwaara-iran-par-naya-hamala-isake-doorgami-result

अमरीकी साम्राज्यवादी वर्चस्व को बढ़ाने में पश्चिम एशिया में दृढ़ स्तम्भ इजरायल रहा है। 1979 से पहले ईरान का शासक शाह रजा पहलवी  भी इस क्षेत्र में अमरीका का लठैत रहा है। 1979 में रजा पहलवी का तख्ता उलटने के बाद जो इस्लामी सत्ता आयी, वह लगातार अमरीकी साम्राज्यवाद की वर्चस्ववादी नीतियों का विरोध करती रही थी। यह सत्ता इजरायल द्वारा फिलिस्तीनियों को उजाड़े जाने और उनकी जमीनों पर यहूदी बस्तियां बसाने का विरोध करती रही है।