जब जंगी जहाज़ ओझल हो जाते हैं -महमूद दरवेश

जब जंगी जहाज ओझल हो जाते हैं, फाख्ता उड़ती हैं
उजली, उजली आसमान के गालों को पोंछते हुए
अपने आजाद डैनों से, वापस हासिल करते हुए वैभव और प्रभुसत्ता
वायु और क्रीड़ा की। ऊंचे और ऊंचे
फाख्ता उड़ती हैं, उजली, उजली। काश, कि आसमान
असली होता (एक आदमी ने गुजरते हुए दो बमों के बीच से मुझे कहा)
..........
एक हत्यारे से : अगर तुमने शिकार के चेहरे पर ध्यान दिया होता
और सोचा होता, तुम याद कर पाते गैस चैम्बर में अपनी मां को,
तुम खुद को आजाद कर पाते राइफल के विवेक से
और बदल देते अपना विचार : यह वह तरीका नहीं
जिससे पहचान वापस हासिल की जाती है!
...........
हमारे नुकसानात : दो शहीदों से आठ
हर रोज,
और दस जख्मी
और बीस घर
और पचास जैतून के दरख्त,
अलावा उस संरचनात्मक आघात के
जो होगा कविता को, नाटक और अधबनी पेंटिंग को
............
एक औरत ने एक बादल से कहा : मेरे प्यारे को ढांप लो
क्योंकि मेरे कपड़े तर हैं उसके ख़ून से!
..........
अगर तुम एक बारिश नहीं बनोगे, मेरे प्यारे
एक पेड़ हो जाओ
उर्वरता से तर.. पेड़ हो जाओ एक
और अगर तुम पेड़ नहीं बनोगे मेरे प्यारे
एक शिला बन जाओ
नमी से तर.. शिला बन जाओ एक
और अगर तुम शिला भी नहीं बन सकते मेरे प्यारे
एक चांद बन जाओ
आशिक की नींद में.. चांद बन जाओ एक

(ये वे बातें हैं वह जो एक औरत ने कहीं
अपने बेटे को दफ्न करते हुए)
  (साभार : कविता कोश)
 

आलेख

/janavad-ka-sawal-aur-majdoor-varg

मजदूर के पास पूंजी नहीं होती इसीलिए पूंजीवाद में उसकी कोई हैसियत नहीं होती। इतना ही नहीं, वह जिन्दा रहने के लिए पूंजीपति पर निर्भर होता है। वह पूंजीपति के लिए काम करता है और जिन्दा रहता है। इसके लिए वह पूंजीपति से जिन संबंधों में बंधता है वे उसे पूंजीपति का गुलाम बना देती हैं। इसीलिए मजदूर को उजरती गुलाम यानी मजदूरी करने वाला गुलाम कहा जाता है। स्वाभाविक है कि समाज में गुलाम व गुलाम मालिक की राजनीतिक-सामाजिक हैसियत एक नहीं हो सकती।

/punjivadi-jantantra-and-chunavi-corruption

अठारहवीं सदी के इंग्लैण्ड में होने वाले चुनावी भ्रष्टाचार पर गूगल से ‘सर्च’ करने पर उसका ए आई स्वतः ही यह जवाब हाजिर कर देता हैः 

/election-aayog-hindu-fascist-and-loktantra

एस.आई.आर. प्रक्रिया के दौरान बड़े पैमाने पर मतदाताओं की कटौती की गई। अब तक 13 करोड़ से ज्यादा मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटा दिए गए। जबकि 5-6 करोड़ लोगों को संदेह की आड़ में नोटिस भेजे गए। 13 करोड़ में से 70 प्रतिशत वो लोग थे जिन्हें स्थानांतरित या अनुपस्थित बता दिया गया। इस तरह बड़े स्तर पर मनमानी छंटनी की जा रही है। इसमें सबसे बड़ी संख्या अल्पसंख्यक, दलित, आदिवासी, महिलाओं और मलिन बस्तियों में रहने वालों की है।

/uddharak-ideology-ki-talaas

इस मजदूर आंदोलन की विचारधारा मार्क्सवाद का यह स्पष्ट कहना था कि महान फ्रांसीसी क्रांति के जमाने से ही पूंजीपति वर्ग ने अपने समाज के लिए जो आदर्श घोषित कर रखा है- स्वतंत्रता, समता, बंधुत्व का आदर्श- वह पूंजीवाद की निजी सम्पत्ति के कारण कभी भी हासिल नहीं किया जा सकता। पूंजी के रूप में निजी सम्पत्ति के रहते स्वतंत्रता का मतलब होगा बाजार में खरीद-बेच की स्वतंत्रता, समता का मतलब होगा बाजार में खरीददार व विक्रेता की समता तथा बंधुत्व का मतलब होगा खरीद-बेच की व्यवस्था पर सहमति।

/war-and-diplomacy-uthal-puthal-se-bhari-duniyaa

गाजापट्टी में इजरायल की कत्लेआम करने की मुहिम जारी है। इजरायली यहूदी नस्लवादी न तो किसी समझौते को मान रहे हैं और न ही वे अपनी विनाश लीला को रोक रहे हैं। वे नस्लीय सफाये की मुहिम चला रहे हैं। इसके जवाब में हमास और अन्य प्रतिरोध संगठन इजरायली कब्जाकारी सेना पर प्रहार कर रहे हैं।