जंगली जानवरों के आतंक के विरुद्ध संघर्ष

/jangali-janavaron-ke-aatank-ke-virudha-sangharsh

रामनगर (नैनीताल)/ 2 फरवरी को संयुक्त संघर्ष समिति द्वारा आयोजित महापंचायत में जंगली जानवरों से सुरक्षा में लापरवाही बरतने वाले कार्बेट रिजर्व के अधिकारियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने की मांग को लेकर 5 मार्च को दिन में कोतवाली के समक्ष प्रदर्शन करने तथा टाइगर के हमले में मारे गए प्रेम राम की विधवा को नौकरी दिए जाने आदि मांगों को लेकर कार्बेट टाइगर रिजर्व निदेशक का घेराव करने का निर्णय लिया गया।
    
ग्राम सांवल्दे पूर्वी में आयोजित महापंचायत में रामनगर तहसील के कोने-कोने से ग्रामीणों व जन प्रतिनिधियों ने बड़ी संख्या में पहुंचकर जंगली जानवरों व बंदरों से सुरक्षा के लिए संघर्ष तेज करने का निर्णय लिया। घोषणा की, कि पार्क प्रशासन द्वारा फरवरी माह में दर्ज किए गए फर्जी मुकदमे में किसी भी ग्रामीण को गिरफ्तार करने पर उनके साथ बड़ी संख्या में ग्रामीण भी अपनी गिरफ्तारियां देंगे।
    
महापंचायत में टाइगर के हमले में घायल गणेश का इलाज कराने व मृतक प्रेम सिंह की पत्नी को नौकरी दिए जाने, ग्रामीणों पर कार्बेट प्रशासन द्वारा लगाए फर्जी मुकदमे वापस लिए जाने, कार्बेट नेशनल पार्क में उसकी धारण क्षमता से अधिक टाइगर व हिंसक जानवरों को हटाए जाने, मृतकों को 25 लाख व घायलों को 10 लाख मुआवजा व सरकारी खर्च पर इलाज कराने आदि मांगों को लेकर संघर्ष तेज करने का निर्णय लिया गया। 
    
वक्ताओं ने जनप्रतिनिधियों को उक्त मांगों का तत्काल समाधान प्रस्तुत न किए जाने पर उनके खिलाफ विरोध प्रदर्शन करने की चेतावनी भी दी।
    
5 मार्च को कोतवाली पर टाइगर से ग्रमीणों को सुरक्षा प्रदान करने में लापरवाही बरतने के लिए जिम्मेदार निदेशक कार्बेट टाइगर रिजर्व साकेत बडौला, उपनिदेशक राहुल मिश्रा व रेंज अधिकारी भानुप्रकाश हर्बोला आदि के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता व भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की सुसंगत धाराओं में मुकदमा दर्ज करने की मांग को लेकर प्रदर्शन किया तथा प्रेम बल्लभ जोशी की तहरीर दर्ज करने व रेंज अधिकारी भानु प्रकाश हर्बाला द्वारा 5 नामजद व 50 अन्य के खिलाफ दर्ज फर्जी मुकदमे को तत्काल रद्द करने की मांग को लेकर रामनगर कोतवाल को ज्ञापन भी सौंपा गया।
    
रामनगर कोतवाल ने ग्रामीणों को मामले की जांच कर निष्पक्ष कार्रवाई का आश्वासन दिया।
    
इससे पहले दिन में 11 बजे कार्बेट पार्क के सीमावर्ती क्षेत्रों से बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने जंगली जानवरों व बंदरों से सुरक्षा की मांग को लेकर कार्बेट टाइगर रिजर्व कार्यालय पर धरना दिया। निदेशक साकेत बडोला के एक बार पुनः अपने कार्यालय पर नहीं उपस्थिति होने पर ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से उनका एक दिन का वेतन काटने की मांग की।
    
महेश जोशी के संचालन में हुई सभा को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने पार्क प्रशासन पर तानाशाही का आरोप लगाते हुए कहा कि लिखित, मौखिक व फोन द्वारा सूचना देने के बावजूद भी उन्हें सुरक्षा नहीं दी जा रही है। टाइगर, लेपर्ड व अन्य हिंसक जानवर उनके घरों में आ रहे हैं। कार्यालय में समस्या लेकर आने पर आला अधिकारी मौके से नदारद हो जाते हैं और धरना देने पर फर्जी मुकदमे दर्ज करा दिये जाते हैं। वक्ताओं ने कहा कि टाइगर व लेपर्ड आदि हिंसक जानवरों की संख्या उत्तराखंड में बहुत अधिक हो गई है। अतः इनकी संख्या को सीमित करने के लिए इनकी बैलेंस हंटिंग करवाई जाए अथवा इन्हें यहां से हटाकर दूसरे देशों को भेजा जाए।
    
धरने पर ज्ञापन लेने आए पार्क वार्डन द्वारा टाइगर को उसकी मां ने शिकार करना सिखाया है, कहने पर ग्रामीणों ने इसे उकसावे पूर्ण बताते हुए कहा कि हमलों में मरने वाले गरीब ग्रामीण हैं यदि ये हमला किसी अधिकारी या उसके परिजनों के ऊपर होता तब भी क्या वे इसी तरह का असंवेदनशील बयान देते।
    
महापंचायत व धरने में तारा बेलबाल, भुवन आर्य, बालम थापा, समिति के संयोजक ललित उप्रेती, उपपा नेता प्रभात ध्यानी, नवीन अधिकारी, पीसी जोशी, कैसर राना, महिला एकता मंच की ललिता रावत, समाजवादी लोक मंच के मुनीष कुमार, प्रगतिशील महिला एकता केंद्र की तुलसी छिम्वाल, इंकलाबी मजदूर केंद्र के भुवन, आइसा के सुमित एवं  एडवोकेट पूरन पांडे इत्यादि समेत सैकड़ों की संख्या में ग्रामीणों ने भागीदारी की। -रामनगर संवाददाता

आलेख

/west-asia-mein-badalata-shakti-santulan-samajhautaa-gyapan-ke-baad-ki-sthiti

अमरीकी साम्राज्यवादी और इजरायली शासक सोचते थे कि ईरान के शीर्ष नेतृत्व का सफाया करने के बाद ईरानी जनता अपनी सत्ता के विरुद्ध उठ खड़ी होगी और इसका फायदा उठाते हुए अमरीकी साम्राज्यवादी अपनी किसी कठपुतली को सत्ता में स्थापित कर देंगे। लेकिन ऐसा नहीं हुआ। ईरानी अवाम अपनी सत्ता के समर्थन में मजबूती से खड़ी हो गई। यहां से अमरीकी साम्राज्यवादियों को समझ में आ गया कि वे ईरान पर कब्जा नहीं कर सकते।

/war-anay-sadhanon-se-politics-ka-hi-jaari-roop-hai

अमेरिकी साम्राज्यवादी पश्चिम एशिया में और सारी दुनिया में अपनी साम्राज्यवादी जकड़न को खत्म नहीं होने देना चाहेंगे। वे इसके खिलाफ हर संभव प्रयास करेंगे। एक हमले में मुंह की खाने के बाद वे सबक लेकर आगे हमला करने से तौबा नहीं करेंगे। यह उनकी साम्राज्यवादी फितरत के खिलाफ होगा। यानी वे ईरान पर काबू पाने के लिए दूसरे तरीकों की खोज में लग जायेंगे।

/emerjency-tab-aur-ab

पिछले दस-बारह सालों में हिन्दू फासीवादियों ने इस अनौपचारिक आपातकाल की शैली को काफी विकसित किया है। कहां किस छेद का इस्तेमाल करना है, इसमें उन्होंने महारत हासिल की है। इनके इस कृत्य में न्यायपालिका की सहभागिता से यह काम और आसान हो गया है। मतदाता सूची का विशेष गहन पुनर्रीक्षण इस सबका विशिष्ट उदाहरण है।

/piketi-ka-global-justice-project-samraajyavad-ki-pairokari

जैसा कि इंटरव्यू के शीर्षक से स्पष्ट है कि पिकेटी एक ऐसी दुनिया का ख्वाब परोसते हैं जिसमें बगैर पर्यावरण को नुकसान पहुंचाये ज्यादातर लोग खुशहाल बन सकते हैं। इस सुन्दर दुनिया को हासिल करने के लिए वे किसी वर्ग संघर्ष बढ़ाने या क्रांति की वकालत नहीं करते। बल्कि वे कुछ नुस्खे सुझाते हैं जिस पर चल कर मौजूदा पूंजीवादी-साम्राज्यवादी दुनिया को ही खुशनुमा बनाया जा सकता है। 

/amerika-dwaara-iran-par-naya-hamala-isake-doorgami-result

अमरीकी साम्राज्यवादी वर्चस्व को बढ़ाने में पश्चिम एशिया में दृढ़ स्तम्भ इजरायल रहा है। 1979 से पहले ईरान का शासक शाह रजा पहलवी  भी इस क्षेत्र में अमरीका का लठैत रहा है। 1979 में रजा पहलवी का तख्ता उलटने के बाद जो इस्लामी सत्ता आयी, वह लगातार अमरीकी साम्राज्यवाद की वर्चस्ववादी नीतियों का विरोध करती रही थी। यह सत्ता इजरायल द्वारा फिलिस्तीनियों को उजाड़े जाने और उनकी जमीनों पर यहूदी बस्तियां बसाने का विरोध करती रही है।