कुत्तों का शोकगीत

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चले गए मालिक हमारे अलविदा ! 
टाटा मालिक ! 
दुखी हैं हम सब कुत्ते दुनियां के कुत्ते 
फ्रांस, अमेरिका, ब्रिटेन के कुत्ते
मसलन 2005 में पैदा हुए सलवा जुडूम के पिल्ले
कुत्ते जो टूट पड़े थे 
गरीब आदिवासियों पर अपने गिरोह के मुखिया कुत्ते के आदेश पर जिन्होंने फाड़ डाले थे नग्न आदिवासी महिलाओं के स्तन और
मूत दिया था
संविधान के पन्नों पर !
जैसे 18 जुलाई 2012 के बाद
मारुति सुजुकी के
जापानी मालिक के कुत्तों ने किया। 
नोंच डाले थे
आदिवासी बच्चों के कोमल शरीर
ताकि मालिक खोद सके धरती का सीना और आदिवासी गांव
सूअरों से भी तेज थूथन से
और निकाल ले सोना, चांदी, हीरे, मोती
मालिक बड़े दयालु हैं खुश होने पर 
पार्टियों के मुख्य कुत्तों के गले में डालते हैं सुन्दर सोने के पट्टे
दुनिया के मालिक जानते हैं 
कुत्तों की कीमत इसीलिए खोलते हैं दिल्ली मुंबई में फाइव स्टार कुत्ता अस्पताल ! 
मालिक सचमुच पशु प्रेमी होते हैं
चाहे भारतीय कुत्ते हों 
(या जैसा साथी लेनिन कहते थे) 
ड्यूमा (संसद) के रूसी सूअर ! 
            -उमेश चन्दोला
 

आलेख

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अमरीकी साम्राज्यवादी और इजरायली शासक सोचते थे कि ईरान के शीर्ष नेतृत्व का सफाया करने के बाद ईरानी जनता अपनी सत्ता के विरुद्ध उठ खड़ी होगी और इसका फायदा उठाते हुए अमरीकी साम्राज्यवादी अपनी किसी कठपुतली को सत्ता में स्थापित कर देंगे। लेकिन ऐसा नहीं हुआ। ईरानी अवाम अपनी सत्ता के समर्थन में मजबूती से खड़ी हो गई। यहां से अमरीकी साम्राज्यवादियों को समझ में आ गया कि वे ईरान पर कब्जा नहीं कर सकते।

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अमेरिकी साम्राज्यवादी पश्चिम एशिया में और सारी दुनिया में अपनी साम्राज्यवादी जकड़न को खत्म नहीं होने देना चाहेंगे। वे इसके खिलाफ हर संभव प्रयास करेंगे। एक हमले में मुंह की खाने के बाद वे सबक लेकर आगे हमला करने से तौबा नहीं करेंगे। यह उनकी साम्राज्यवादी फितरत के खिलाफ होगा। यानी वे ईरान पर काबू पाने के लिए दूसरे तरीकों की खोज में लग जायेंगे।

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पिछले दस-बारह सालों में हिन्दू फासीवादियों ने इस अनौपचारिक आपातकाल की शैली को काफी विकसित किया है। कहां किस छेद का इस्तेमाल करना है, इसमें उन्होंने महारत हासिल की है। इनके इस कृत्य में न्यायपालिका की सहभागिता से यह काम और आसान हो गया है। मतदाता सूची का विशेष गहन पुनर्रीक्षण इस सबका विशिष्ट उदाहरण है।

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जैसा कि इंटरव्यू के शीर्षक से स्पष्ट है कि पिकेटी एक ऐसी दुनिया का ख्वाब परोसते हैं जिसमें बगैर पर्यावरण को नुकसान पहुंचाये ज्यादातर लोग खुशहाल बन सकते हैं। इस सुन्दर दुनिया को हासिल करने के लिए वे किसी वर्ग संघर्ष बढ़ाने या क्रांति की वकालत नहीं करते। बल्कि वे कुछ नुस्खे सुझाते हैं जिस पर चल कर मौजूदा पूंजीवादी-साम्राज्यवादी दुनिया को ही खुशनुमा बनाया जा सकता है। 

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अमरीकी साम्राज्यवादी वर्चस्व को बढ़ाने में पश्चिम एशिया में दृढ़ स्तम्भ इजरायल रहा है। 1979 से पहले ईरान का शासक शाह रजा पहलवी  भी इस क्षेत्र में अमरीका का लठैत रहा है। 1979 में रजा पहलवी का तख्ता उलटने के बाद जो इस्लामी सत्ता आयी, वह लगातार अमरीकी साम्राज्यवाद की वर्चस्ववादी नीतियों का विरोध करती रही थी। यह सत्ता इजरायल द्वारा फिलिस्तीनियों को उजाड़े जाने और उनकी जमीनों पर यहूदी बस्तियां बसाने का विरोध करती रही है।