मजदूर संघर्ष

झूठे मुकदमों के विरोध में प्रदर्शन

हल्द्वानी/ हल्द्वानी के बहुचर्चित रेलवे बनाम बनभूलपुरा अवाम मामले में बस्ती बचाओ संघर्ष समिति के कार्यकर्ताओं पर लगाए झूठे मुकदमों के विरोध में 15 मार्च को बुद्ध पार्क, हल्द्वानी म

23 मार्च : शहीदी दिवस पर विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन

भगतसिंह, सुखदेव और राजगुरू हमारे देश के वो अमर बलिदानी हैं, जो 23 मार्च, 1931 के दिन हंसते-हंसते फांसी के फंदों पर झूल गये थे। अपने देश और समाजवाद के महान उद्देश्य के लिये कुर्बान होने वाले ये महान

पेरिस कम्यून के अवसर पर विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन

आज से 152 साल पहले 18 मार्च, 1871 के दिन पेरिस के मजदूरों ने पूंजीपतियों के स्वर्ग पर धावा बोलते हुये पेरिस कम्यून की स्थापना की थी। यह दुनिया में मजदूरों का पहला राज था, जो कि 72 दिनों तक कायम रहा

प्रबंधन की तानाशाही के खिलाफ बेलसोनिका मजदूर परिवारों का प्रदर्शन

गुड़गांव/ हरियाणा के मानेसर में ऑटो पार्ट्स बनाने वाली बेलसोनिका कंपनी का प्रबंधन लगातार कंपनी में मजदूर विरोधी नीतियां लागू कर रहा है। बेलसोनिका मजदूर यूनियन पिछले दो वर्षों से लगा

उत्तर प्रदेश में बिजली कर्मियों की हड़ताल

विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति उत्तर प्रदेश के आह्वान पर 16 मार्च से 72 घंटे की हड़ताल शुरू हुई। भाजपा सरकार मुकदमों, बर्खास्तगी का आतंक पैदा कर हड़ताल समाप्त करवाने में सफल रही है। हड़ताल से प

इटली में फासीवादी हमले के खिलाफ प्रदर्शन

इटली के फ्लोरेंस में शनिवार 4 मार्च को एक जोरदार प्रदर्शन हुआ। यह प्रदर्शन उस फासीवादी हमले के खिलाफ था जो 18 फ़रवरी को फ्लोरेंस के एक हाईस्कूल में हुआ था। इस प्रदर्शन में युवा, अध्यापक और मज़दूर शाम

यूनियन का ‘‘जे’’ फार्म के रजिस्ट्रेशन को लेकर संघर्ष जारी

पंतनगर/ बजाज मोटर कर्मकार यूनियन, पन्तनगर उधम सिंह नगर, उत्तराखंड के नियमित चुनाव दिनांक 26 जून 2022 को आहूजा धर्मशाला में हुए जिसमें तमाम पदाधिकारियों का निर्विरोध चुनाव हुआ। जिसम

राजा बिस्किट के मजदूरों का कम्पनी गेट पर धरना जारी

हरिद्वार/ उत्तराखंड के हरिद्वार जनपद में सिडकुल में बहुचर्चित राजा बिस्किट कंपनी में 17 साल काम कराने के बाद मालिक और प्रबंधन स्थाई कर्मचारियों को बाहर करना चाह रहे हैं। मजदूरों के

खिरिया बाग (आजमगढ़) में किसान-मजदूर महापंचायत

आजमगढ़/ पूंजीपति वर्ग की सबसे बड़ी हितैषी भाजपा की केन्द्र सरकार व राज्य सरकारें लगातार किसान विरोधी, मजदूर विरोधी, कानून व योजनायें बनाने और उन्हें लागू करने में लगी हुयी हैं। इसी क

आलेख

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अमरीकी साम्राज्यवादी और इजरायली शासक सोचते थे कि ईरान के शीर्ष नेतृत्व का सफाया करने के बाद ईरानी जनता अपनी सत्ता के विरुद्ध उठ खड़ी होगी और इसका फायदा उठाते हुए अमरीकी साम्राज्यवादी अपनी किसी कठपुतली को सत्ता में स्थापित कर देंगे। लेकिन ऐसा नहीं हुआ। ईरानी अवाम अपनी सत्ता के समर्थन में मजबूती से खड़ी हो गई। यहां से अमरीकी साम्राज्यवादियों को समझ में आ गया कि वे ईरान पर कब्जा नहीं कर सकते।

/war-anay-sadhanon-se-politics-ka-hi-jaari-roop-hai

अमेरिकी साम्राज्यवादी पश्चिम एशिया में और सारी दुनिया में अपनी साम्राज्यवादी जकड़न को खत्म नहीं होने देना चाहेंगे। वे इसके खिलाफ हर संभव प्रयास करेंगे। एक हमले में मुंह की खाने के बाद वे सबक लेकर आगे हमला करने से तौबा नहीं करेंगे। यह उनकी साम्राज्यवादी फितरत के खिलाफ होगा। यानी वे ईरान पर काबू पाने के लिए दूसरे तरीकों की खोज में लग जायेंगे।

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पिछले दस-बारह सालों में हिन्दू फासीवादियों ने इस अनौपचारिक आपातकाल की शैली को काफी विकसित किया है। कहां किस छेद का इस्तेमाल करना है, इसमें उन्होंने महारत हासिल की है। इनके इस कृत्य में न्यायपालिका की सहभागिता से यह काम और आसान हो गया है। मतदाता सूची का विशेष गहन पुनर्रीक्षण इस सबका विशिष्ट उदाहरण है।

/piketi-ka-global-justice-project-samraajyavad-ki-pairokari

जैसा कि इंटरव्यू के शीर्षक से स्पष्ट है कि पिकेटी एक ऐसी दुनिया का ख्वाब परोसते हैं जिसमें बगैर पर्यावरण को नुकसान पहुंचाये ज्यादातर लोग खुशहाल बन सकते हैं। इस सुन्दर दुनिया को हासिल करने के लिए वे किसी वर्ग संघर्ष बढ़ाने या क्रांति की वकालत नहीं करते। बल्कि वे कुछ नुस्खे सुझाते हैं जिस पर चल कर मौजूदा पूंजीवादी-साम्राज्यवादी दुनिया को ही खुशनुमा बनाया जा सकता है। 

/amerika-dwaara-iran-par-naya-hamala-isake-doorgami-result

अमरीकी साम्राज्यवादी वर्चस्व को बढ़ाने में पश्चिम एशिया में दृढ़ स्तम्भ इजरायल रहा है। 1979 से पहले ईरान का शासक शाह रजा पहलवी  भी इस क्षेत्र में अमरीका का लठैत रहा है। 1979 में रजा पहलवी का तख्ता उलटने के बाद जो इस्लामी सत्ता आयी, वह लगातार अमरीकी साम्राज्यवाद की वर्चस्ववादी नीतियों का विरोध करती रही थी। यह सत्ता इजरायल द्वारा फिलिस्तीनियों को उजाड़े जाने और उनकी जमीनों पर यहूदी बस्तियां बसाने का विरोध करती रही है।