नवयुवक केतन की हत्या के विरोध में जातिवाद का पुतला दहन!

Published
Tue, 06/16/2026 - 10:52
/navyuvak-ketan-ki-hatya-ke-virodha-mein-jaativaad-ka-putala-dahan

हल्द्वानी/ 8 जून को टिहरी जिले के देवल गांव में कक्षा 12 के छात्र नवयुवक केतन लाल की जातीय दंभ के कारण निर्मम हत्या कर दी गयी। इस घटना से साफ है कि जातीय नफरत हमारे समाज में बहुत गहराई तक मौजूद है। परिवर्तनकामी छात्र संगठन के आह्वान पर 14 जून को बुद्ध पार्क, तिकोनिया में सभा आयोजित कर जातिवाद का पुतला दहन किया गया। सभा का संचालन परिवर्तनकामी छात्र संगठन के महेश ने किया।
    
वक्ताओं ने कहा कि केतन लाल को हत्या करने के इरादे से साजिशन रात में बुलाया गया। उसको रात भर बुरी तरह से मारा-पीटा गया। उसके शरीर में कील ठोंकना, नाखून उखाड़ना, जलाने के निशान जातीय नफरत को बयां करते हैं। केतन के मित्र दिवाकर डिमरी को भी पीट-पीट कर बुरी तरह घायल किया गया। केतन का उच्च जाति की लड़की से मित्रता व बात करने पर हत्या करना ‘आनर किलिंग’ (सम्मान के नाम पर हत्या) का मामला भी है। उत्तराखंड में 2023 में 123 और 2024 में 114 जातीय हिंसा कि दर्ज घटनाएं बताती हैं कि यहां जातीय नफरत की जड़ें बहुत गहरी हैं। उत्तराखंड में ही इससे पूर्व सम्मान के नाम पर जगदीश और टिहरी में शादी में, कुर्सी में साथ बैठकर खाना खाने के नाम पर दलित युवक की हत्या कर दी थी। चंपावत में टैक्सी चालक की पिटाई का मामला भी सामने आ रहा है। इस तरह की कई घटनाएं मौजूद हैं। समाज आज आधुनिक युग में पहुंच गया है। फिर भी समय-समय पर जातीय उत्पीड़न की घटनाएं दिखाती हैं कि समाज में जातीय सोच कितने गहरे तक जड़ जमाए हुए है। 
    
अन्य वक्ताओं ने कहा कि एनसीआरबी के आंकड़े 2024 में देशभर में 55,698 मामले बताते हैं। बड़ी संख्या में तो मामले दर्ज भी नहीं हो पाते हैं। इतनी बड़ी संख्या में जातीय हिंसा के मामले सामाजिक बुराई के साथ ही राजनीतिक असफलता को दिखाते हैं। हाथरस से लेकर देश भर में इनकी असंख्य उत्पीड़न की घटनाएं हैं। सभी सरकारों के रिकार्ड इस मामले में खराब हैं। भाजपा शासन में इनमें ज्यादा उग्रता आयी है। संघ-भाजपा की सोच वर्ण-जाति व्यवस्था का प्राचीन गौरव के नाम पर गुणगान करती है। यह जातीय भेदभाव को ज्यादा खतरनाक स्तर पर पहुंचा रही है। 
    
वक्ताओं ने कहा कि नौजवान जातीय बंदिशों से पार जाकर दोस्ती और प्रेम करते हैं। नौजवानों से यह उम्मीद होती है कि वे बढ़-चढ़कर सामाजिक बुराइयों के खिलाफ खड़े हों। बराबरी और बेहतर समाज की चाह रखने वाले प्रगतिशील, न्यायप्रिय  छात्र-नौजवानों सहित समाज के नागरिक जातीय भेदभाव को खत्म करने के लिए आगे आएं। कार्यक्रम का समापन ‘हजारों सालों से गुलामी बेड़ियां’ गीत के साथ किया गया।
    
सभा और पुतला दहन में परिवर्तनकामी छात्र संगठन, क्रांतिकारी लोक अधिकार संगठन, भीम आर्मी, आजाद समाज पार्टी, मूल निवासी संघ, अम्बेडकर मिशन, क्रांतिकारी किसान मंच और सामाजिक कार्यकर्ता आदि शामिल रहे।

हरिद्वार/ इसी तरह हरिद्वार में भी 14 जून 2026 को विभिन्न सामाजिक संगठनों द्वारा बीएचईएल सेक्टर चार चौराहे पर विरोध प्रदर्शन कर सवर्ण मानसिकता व जातिवाद का पुतला दहन किया गया।         

विरोध प्रदर्शन व पुतला दहन में भेल मजदूर ट्रेड यूनियन के अध्यक्ष राज किशोर, क्रांतिकारी लोक अधिकार संगठन के संयोजक नासिर अहमद, किर्बी श्रमिक कमेटी के कृष्णा मुरारी, नरेश, भुवन, फूड्स श्रमिक यूनियन के देवेन्द्र, परिवर्तनकामी छात्र संगठन के तरुण, जय प्रकाश, अवधेश, नीशू आदि उपस्थित रहे।     -विशेष संवाददाता

आलेख

/west-asia-mein-badalata-shakti-santulan-samajhautaa-gyapan-ke-baad-ki-sthiti

अमरीकी साम्राज्यवादी और इजरायली शासक सोचते थे कि ईरान के शीर्ष नेतृत्व का सफाया करने के बाद ईरानी जनता अपनी सत्ता के विरुद्ध उठ खड़ी होगी और इसका फायदा उठाते हुए अमरीकी साम्राज्यवादी अपनी किसी कठपुतली को सत्ता में स्थापित कर देंगे। लेकिन ऐसा नहीं हुआ। ईरानी अवाम अपनी सत्ता के समर्थन में मजबूती से खड़ी हो गई। यहां से अमरीकी साम्राज्यवादियों को समझ में आ गया कि वे ईरान पर कब्जा नहीं कर सकते।

/war-anay-sadhanon-se-politics-ka-hi-jaari-roop-hai

अमेरिकी साम्राज्यवादी पश्चिम एशिया में और सारी दुनिया में अपनी साम्राज्यवादी जकड़न को खत्म नहीं होने देना चाहेंगे। वे इसके खिलाफ हर संभव प्रयास करेंगे। एक हमले में मुंह की खाने के बाद वे सबक लेकर आगे हमला करने से तौबा नहीं करेंगे। यह उनकी साम्राज्यवादी फितरत के खिलाफ होगा। यानी वे ईरान पर काबू पाने के लिए दूसरे तरीकों की खोज में लग जायेंगे।

/emerjency-tab-aur-ab

पिछले दस-बारह सालों में हिन्दू फासीवादियों ने इस अनौपचारिक आपातकाल की शैली को काफी विकसित किया है। कहां किस छेद का इस्तेमाल करना है, इसमें उन्होंने महारत हासिल की है। इनके इस कृत्य में न्यायपालिका की सहभागिता से यह काम और आसान हो गया है। मतदाता सूची का विशेष गहन पुनर्रीक्षण इस सबका विशिष्ट उदाहरण है।

/piketi-ka-global-justice-project-samraajyavad-ki-pairokari

जैसा कि इंटरव्यू के शीर्षक से स्पष्ट है कि पिकेटी एक ऐसी दुनिया का ख्वाब परोसते हैं जिसमें बगैर पर्यावरण को नुकसान पहुंचाये ज्यादातर लोग खुशहाल बन सकते हैं। इस सुन्दर दुनिया को हासिल करने के लिए वे किसी वर्ग संघर्ष बढ़ाने या क्रांति की वकालत नहीं करते। बल्कि वे कुछ नुस्खे सुझाते हैं जिस पर चल कर मौजूदा पूंजीवादी-साम्राज्यवादी दुनिया को ही खुशनुमा बनाया जा सकता है। 

/amerika-dwaara-iran-par-naya-hamala-isake-doorgami-result

अमरीकी साम्राज्यवादी वर्चस्व को बढ़ाने में पश्चिम एशिया में दृढ़ स्तम्भ इजरायल रहा है। 1979 से पहले ईरान का शासक शाह रजा पहलवी  भी इस क्षेत्र में अमरीका का लठैत रहा है। 1979 में रजा पहलवी का तख्ता उलटने के बाद जो इस्लामी सत्ता आयी, वह लगातार अमरीकी साम्राज्यवाद की वर्चस्ववादी नीतियों का विरोध करती रही थी। यह सत्ता इजरायल द्वारा फिलिस्तीनियों को उजाड़े जाने और उनकी जमीनों पर यहूदी बस्तियां बसाने का विरोध करती रही है।