फोर्ड : यूनियन का समझौता-मजदूर आक्रोशित

अमेरिका में लम्बे समय से चल रही आटो मजदूरों की हड़ताल को यूनियन नेतृत्व क्रमशः समाप्त करने की ओर बढ़ रहा है। अमेरिकी आटो मजदूरां का ट्रेड यूनियन केन्द्र यूनाइटेड आटो वर्कर्स (न्।ॅ) का नेतृत्व वैसे तो इस कदर समझौतापरस्त व पूंजीपरस्त है कि वह हड़ताल करना ही नहीं चाह रहा था पर आटो मजदूरों की बढ़ती दुर्दशा से उपजे गुस्से से वह हड़ताल को मजबूर हुआ। 
    
हालांकि हड़ताल घोषित करने के बाद भी वह इसे सीमित ही बनाये रखने में लगा रहा। समूचे मजदूरों को हड़ताल पर उतार अमेरिका के समूचे आटो उद्योग को एक झटके में झटका देने के बजाय इसने कुछ प्लांटों के कुछ मजदूरों के हड़ताल व शेष के काम पर होने की नीति अपनायी पर उसकी इस नीति के बावजूद मजदूरों में लड़ने का इस कदर जज्बा था कि हड़ताल लम्बी खिंचती गयी और कुछ अन्य प्लांटों के मजदूर भी नेतृत्व के निर्देशों के उलट हड़ताल में शामिल होते गये। ऐसे में यूनियन नेतृत्व इस बात से घबरा उठा कि कहीं हड़ताल के लम्बा चलने से थकने के बजाय मजदूर अधिक व्यापक हड़ताल की ओर न बढ़ जायें। ऐसे में उसने समझौते के प्रयास तेज कर दिये। 
    
समझौते के प्रयासों के परिणामस्वरूप नेतृत्व ने फोर्ड कंपनी प्रबंधन से पहला समझौता कर फोर्ड मजदूरों को काम पर लौटने का आदेश दे दिया। यूनियन नेतृत्व ने समझौते का विस्तृत विवरण तक मजदूरों को देने की जरूरत नहीं समझी और इस समझौते को मजदूरों की जीत करार दिया। समझौते पर अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन ने भी खुशी जाहिर की। 
    
समझौते के तहत मजदूरों द्वारा मांगी गयी 40 प्रतिशत वेतन वृद्धि की मांग के उलट प्रबंधन 25 प्रतिशत वृद्धि पर सहमत हुआ। यह 25 प्रतिशत वेतन वृद्धि अगले 5 वर्षों में होनी है। प्रति वर्ष कितनी वृद्धि होगी, इसका यूनियन नेतृत्व ने खुलासा नहीं किया है। महंगाई दर को देखते हुए इस वृद्धि से यह भी निश्चित रूप से नहीं कहा जा सकता कि मजदूरों के वेतन में कोई वास्तविक वृद्धि होगी भी या नहीं। 
    
इसके अलावा ओबामा काल में बने टीयर सिस्टम को खत्म करने की मजदूर मांग कर रहे थे। टीयर सिस्टम के तहत नये मजदूरों को पहले कुछ वर्ष कम वेतन और कम सुविधाओं के तहत काम करना पड़ता है व दूसरे टीयर में जाने पर ही उन्हें सारी सुविधायें मिलती थीं। मजदूर सभी मजदूरों के लिए स्वास्थ्य सुरक्षा, पेंशन सुरक्षा के साथ इस टीयर व्यवस्था के खात्मे की मांग कर रहे थे। इस मसले पर समझौते में कुछ नहीं बदला गया। 
    
इसके अलावा इस संभावना को देखते हुए कि कई आटो संस्थान तेल की जगह बिजली आधारित संयंत्र में बदलेंगे व ढेरों मजदूरों को काम से निकाला जायेगा, मजदूर अपने रोजगार की सुरक्षा की मांग कर रहे थे। इस दिशा में भी प्रगति नहीं हुई है। 
    
इस तरह यू ए डब्ल्यू ने मजदूर हितों के साथ गद्दारी का परिचय देकर पूंजीपरस्ती का प्रदर्शन किया है। अब अगर फोर्ड मजदूर हड़ताल खत्म कर काम पर वापस लौट जाते हैं तो बाकी आटो कम्पनियों के और बुरे समझौते होने की संभावना है। 
    
ऐसे में अधिक संभावना इसी बात की है कि एक बार फिर पूंजीपरस्त यूनियन नेतृत्व क्रमशः समझौते करा हड़ताल समाप्त करा दे। पर एक छोटी संभावना इस बात की भी है कि इन समझौतों को मानने से इनकार कर मजदूर अपने नेतृत्व को किनारे लगा दें और नया नेतृत्व चुन संघर्ष तेज कर दें। मजदूरों का हित दूसरी संभावना के साथ जुड़ा है। 

आलेख

/west-asia-mein-badalata-shakti-santulan-samajhautaa-gyapan-ke-baad-ki-sthiti

अमरीकी साम्राज्यवादी और इजरायली शासक सोचते थे कि ईरान के शीर्ष नेतृत्व का सफाया करने के बाद ईरानी जनता अपनी सत्ता के विरुद्ध उठ खड़ी होगी और इसका फायदा उठाते हुए अमरीकी साम्राज्यवादी अपनी किसी कठपुतली को सत्ता में स्थापित कर देंगे। लेकिन ऐसा नहीं हुआ। ईरानी अवाम अपनी सत्ता के समर्थन में मजबूती से खड़ी हो गई। यहां से अमरीकी साम्राज्यवादियों को समझ में आ गया कि वे ईरान पर कब्जा नहीं कर सकते।

/war-anay-sadhanon-se-politics-ka-hi-jaari-roop-hai

अमेरिकी साम्राज्यवादी पश्चिम एशिया में और सारी दुनिया में अपनी साम्राज्यवादी जकड़न को खत्म नहीं होने देना चाहेंगे। वे इसके खिलाफ हर संभव प्रयास करेंगे। एक हमले में मुंह की खाने के बाद वे सबक लेकर आगे हमला करने से तौबा नहीं करेंगे। यह उनकी साम्राज्यवादी फितरत के खिलाफ होगा। यानी वे ईरान पर काबू पाने के लिए दूसरे तरीकों की खोज में लग जायेंगे।

/emerjency-tab-aur-ab

पिछले दस-बारह सालों में हिन्दू फासीवादियों ने इस अनौपचारिक आपातकाल की शैली को काफी विकसित किया है। कहां किस छेद का इस्तेमाल करना है, इसमें उन्होंने महारत हासिल की है। इनके इस कृत्य में न्यायपालिका की सहभागिता से यह काम और आसान हो गया है। मतदाता सूची का विशेष गहन पुनर्रीक्षण इस सबका विशिष्ट उदाहरण है।

/piketi-ka-global-justice-project-samraajyavad-ki-pairokari

जैसा कि इंटरव्यू के शीर्षक से स्पष्ट है कि पिकेटी एक ऐसी दुनिया का ख्वाब परोसते हैं जिसमें बगैर पर्यावरण को नुकसान पहुंचाये ज्यादातर लोग खुशहाल बन सकते हैं। इस सुन्दर दुनिया को हासिल करने के लिए वे किसी वर्ग संघर्ष बढ़ाने या क्रांति की वकालत नहीं करते। बल्कि वे कुछ नुस्खे सुझाते हैं जिस पर चल कर मौजूदा पूंजीवादी-साम्राज्यवादी दुनिया को ही खुशनुमा बनाया जा सकता है। 

/amerika-dwaara-iran-par-naya-hamala-isake-doorgami-result

अमरीकी साम्राज्यवादी वर्चस्व को बढ़ाने में पश्चिम एशिया में दृढ़ स्तम्भ इजरायल रहा है। 1979 से पहले ईरान का शासक शाह रजा पहलवी  भी इस क्षेत्र में अमरीका का लठैत रहा है। 1979 में रजा पहलवी का तख्ता उलटने के बाद जो इस्लामी सत्ता आयी, वह लगातार अमरीकी साम्राज्यवाद की वर्चस्ववादी नीतियों का विरोध करती रही थी। यह सत्ता इजरायल द्वारा फिलिस्तीनियों को उजाड़े जाने और उनकी जमीनों पर यहूदी बस्तियां बसाने का विरोध करती रही है।