सोशल मीडिया से दूरी बनाती मुस्लिम महिलाएं

हाल ही में बेबाक कलेक्टिव द्वारा मुबंई में प्रेस कांफ्रेस कर एक रिपोर्ट जारी की गयी। 6 राज्यों में 18 गहन साक्षात्कार के बाद रिपोर्ट तैयार की गयी।

रिपोर्ट बताती है कि मुसलमानों के खिलाफ समाज की तरह सोशल मीडिया में माहौल बनाया जा रहा है। सोशल मीडिया में मुस्लिम महिलाओं के खिलाफ बेहद अपमानजनक, भद्दी, अश्लील पोस्टों की भरमार है। सोशल मीडिया में हत्या, रेप की धमकियां आम बात हो गयी हैं।

किसी राजनीतिक अभियान के समय इस तरह की पोस्टों की संख्या कई गुना बढ़ जाती है। जैसे सीएए आंदोलन और कश्मीर में धारा 370 हटाये जाने के बाद।

इन सब का ही परिणाम है कि मुस्लिम महिलाएं सोशल मीडिया से दूरी बना रही हैं। कई महिलाएं तो पूरी तरह से ही दूरी बना ले रही हैं।

मुस्लिम महिलाओं के खिलाफ अश्लील, अपमानजन पोस्ट भारत में पसरे मर्दवाद के साथ-साथ देश में बढते हिन्दू फासीवादी के कारण भी है।

रिपोर्ट यह भी कहती है कि पिछले दस सालों में इस तरह की पोस्टों में तेजी से वृद्धि हुई है।

गौरतलब है कुछ साल पहले बुल्ली बाई, सुल्ली डील एप्प चर्चा में आये। इन एपों में मुस्लिम महिलाओं की फोटो इंटरनेट से उठाकर उन पर भद्दी अश्लील पोस्ट लिखी जाती थी। इन्हें नीलाम किया जाता था। महिलाओं के खिलाफ अश्लील भद्दी पोस्टों से मनोरंजन करने वाले विकृति मानसिकता के लोग अकारण ही नहीं हैं। यह समाज में मुसलमानों के खिलाफ बनाये जा रहे माहौल के कारण है।

सोशल मीडिया से मिलने वाली ‘सीमित स्वतंत्रता’ से मुस्लिम महिलाएं खुद को अलग और सीमित कर रही हैं। यह समाज में बढ़ते फासीवाद का परिणाम है जिसकी कीमत मुस्लिम महिलाएं भी चुका रही हैं।

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