पत्र

एक कविता

/ek-kavita

खुद ही घोषित कर देने से कौन गुरु स्वीकारेगा
लहरा दोगे ज्ञान का परचम तब ही जग पहचानेगा

परसाखेड़ा औद्योगिक क्षेत्र के मजदूरों की दुर्दशा

/parasakheda-industrial-kshetra-ke-majadooron-ki-durdasaa

बरेली के परसा खेड़ा औद्योगिक क्षेत्र में स्थित एक इलेक्ट्रिकल फैक्टरी के मजदूरों से बातचीत करने पर पता चलता है कि मालिक मजदूरों के खिलाफ क्या-क्या तिकड़में करता है। 
    

ऊष्मा और नमी

/heat-and-humidity

एक तरफ दस फुट ऊंची दीवार, और दूसरी तरफ इस्पात फैक्टरी और एक तरफ दलित मजदूर बस्ती। नीला आसमान अक्सर शाम को धूल के बादलों से रंग बदल लेता। फैक्टरियों से निकलने वाले सीवर और

केन्द्रीय ट्रेड यूनियनों के बारे में दो शब्द

/central-trade-union-ke-baare-mein-do-sabd

सभी साथियों व पाठकों को लाल सलाम। साथियों मेरा नाम पूरन है। मैं गुड़गांव में रहता हूं। साथियो मैं बात कर रहा हूं आज के केन्द्रीय ट्रेड यूनियनों के बारे में। साथियो जब मैं

राष्ट्रीय सुरक्षा के बहाने अभिव्यक्ति की आजादी पर हमला

/national-security-ke-bahane-abhivaykti-ki-ajadi-par-hamala

उन्माद एक खतरनाक व नकारात्मक शब्द है। किसी भी प्रकार का (धार्मिक, नस्ल, राष्ट्र, जातीय) उन्माद देश समाज के लिए खतरनाक है। संघी/भाजपाई इस उन्माद को पूरे देश में फैलाने में

दुनिया में भयावह होती स्थिति

/duniyaa-mein-bhayaavah-hoti-sthiti

इजरायल द्वारा गाजा में 18 महीनों से जारी युद्ध में अभी तक 54,000 लोग मारे जा चुके हैं जिसमें अधिकांश संख्या में महिलाएं व बच्चे हैं। अब इजरायली शासक गाजा को मिटा डालने पर

घर बनाते बनाते

/ghar-banate-banate

2 BHK 3 BHK के होर्डिंग सड़कों पर लगे हुए हैं। एक मुस्कुराता हुआ इंसानी जोडा और उनके साथ दो बच्चे खेलते हुए। ऐसा ही विज्ञापन होता है अखबारों में, मकान बेचने वाले पम्फलेट म

नियति

फैक्टरी में काम करने से पहले गंगादीन एक गैस प्लांट में लोडिंग अनलोडिंग का काम करते थे। भरे हुए गैस सिलेण्डरों को लाइन से उठाकर ट्रक में लोड करने का एक निश्चित समय होता था

रामा विजन के बहाने

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पुरानी बात है, किच्छा में एक फैक्टरी होती थी ‘रामा विजन’, इस फैक्टरी में ब्लैक एण्ड व्हाइट पिक्चर ट्यूब बनती थी। ब्लैक एण्ड व्हाईट टेलीविजन ही उस समय चलन में थे। अभी रंगी

आलेख

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अमरीकी साम्राज्यवादी और इजरायली शासक सोचते थे कि ईरान के शीर्ष नेतृत्व का सफाया करने के बाद ईरानी जनता अपनी सत्ता के विरुद्ध उठ खड़ी होगी और इसका फायदा उठाते हुए अमरीकी साम्राज्यवादी अपनी किसी कठपुतली को सत्ता में स्थापित कर देंगे। लेकिन ऐसा नहीं हुआ। ईरानी अवाम अपनी सत्ता के समर्थन में मजबूती से खड़ी हो गई। यहां से अमरीकी साम्राज्यवादियों को समझ में आ गया कि वे ईरान पर कब्जा नहीं कर सकते।

/war-anay-sadhanon-se-politics-ka-hi-jaari-roop-hai

अमेरिकी साम्राज्यवादी पश्चिम एशिया में और सारी दुनिया में अपनी साम्राज्यवादी जकड़न को खत्म नहीं होने देना चाहेंगे। वे इसके खिलाफ हर संभव प्रयास करेंगे। एक हमले में मुंह की खाने के बाद वे सबक लेकर आगे हमला करने से तौबा नहीं करेंगे। यह उनकी साम्राज्यवादी फितरत के खिलाफ होगा। यानी वे ईरान पर काबू पाने के लिए दूसरे तरीकों की खोज में लग जायेंगे।

/emerjency-tab-aur-ab

पिछले दस-बारह सालों में हिन्दू फासीवादियों ने इस अनौपचारिक आपातकाल की शैली को काफी विकसित किया है। कहां किस छेद का इस्तेमाल करना है, इसमें उन्होंने महारत हासिल की है। इनके इस कृत्य में न्यायपालिका की सहभागिता से यह काम और आसान हो गया है। मतदाता सूची का विशेष गहन पुनर्रीक्षण इस सबका विशिष्ट उदाहरण है।

/piketi-ka-global-justice-project-samraajyavad-ki-pairokari

जैसा कि इंटरव्यू के शीर्षक से स्पष्ट है कि पिकेटी एक ऐसी दुनिया का ख्वाब परोसते हैं जिसमें बगैर पर्यावरण को नुकसान पहुंचाये ज्यादातर लोग खुशहाल बन सकते हैं। इस सुन्दर दुनिया को हासिल करने के लिए वे किसी वर्ग संघर्ष बढ़ाने या क्रांति की वकालत नहीं करते। बल्कि वे कुछ नुस्खे सुझाते हैं जिस पर चल कर मौजूदा पूंजीवादी-साम्राज्यवादी दुनिया को ही खुशनुमा बनाया जा सकता है। 

/amerika-dwaara-iran-par-naya-hamala-isake-doorgami-result

अमरीकी साम्राज्यवादी वर्चस्व को बढ़ाने में पश्चिम एशिया में दृढ़ स्तम्भ इजरायल रहा है। 1979 से पहले ईरान का शासक शाह रजा पहलवी  भी इस क्षेत्र में अमरीका का लठैत रहा है। 1979 में रजा पहलवी का तख्ता उलटने के बाद जो इस्लामी सत्ता आयी, वह लगातार अमरीकी साम्राज्यवाद की वर्चस्ववादी नीतियों का विरोध करती रही थी। यह सत्ता इजरायल द्वारा फिलिस्तीनियों को उजाड़े जाने और उनकी जमीनों पर यहूदी बस्तियां बसाने का विरोध करती रही है।