अप्रासंगिक होती न्याय प्रणाली
बीते कुछ समय से ड्रोन द्वारा चोरी की अफवाह या हकीकत सोशल मीडिया पर छाई हुई है। उत्तर प्रदेश के कुछ शहरों में हत्या और लूटपाट की खबरों में कितनी सच्चाई है यह तो तथ्यों की
बीते कुछ समय से ड्रोन द्वारा चोरी की अफवाह या हकीकत सोशल मीडिया पर छाई हुई है। उत्तर प्रदेश के कुछ शहरों में हत्या और लूटपाट की खबरों में कितनी सच्चाई है यह तो तथ्यों की
साथियो,
मैं कोई नेता नहीं-
बस तुम्हारा एक साथी हूं,
एक मजदूर,
जिसके हाथों की दरारों में
इस देश की नींव बसी है।
तुम जादू की तरह गायब हो गये
चप्पे-चप्पे पर कैमरे लगे हैं लेकिन
दिल्ली पुलिस तुम्हें ढूंढ नहीं पायी
उमर खालिद तुम जेल में बंद हो
बरेली के परसा खेड़ा औद्योगिक क्षेत्र में स्थित एक इलेक्ट्रिकल फैक्टरी के मजदूरों से बातचीत करने पर पता चलता है कि मालिक मजदूरों के खिलाफ क्या-क्या तिकड़में करता है।
एक तरफ दस फुट ऊंची दीवार, और दूसरी तरफ इस्पात फैक्टरी और एक तरफ दलित मजदूर बस्ती। नीला आसमान अक्सर शाम को धूल के बादलों से रंग बदल लेता। फैक्टरियों से निकलने वाले सीवर और
सभी साथियों व पाठकों को लाल सलाम। साथियों मेरा नाम पूरन है। मैं गुड़गांव में रहता हूं। साथियो मैं बात कर रहा हूं आज के केन्द्रीय ट्रेड यूनियनों के बारे में। साथियो जब मैं
उन्माद एक खतरनाक व नकारात्मक शब्द है। किसी भी प्रकार का (धार्मिक, नस्ल, राष्ट्र, जातीय) उन्माद देश समाज के लिए खतरनाक है। संघी/भाजपाई इस उन्माद को पूरे देश में फैलाने में
इजरायल द्वारा गाजा में 18 महीनों से जारी युद्ध में अभी तक 54,000 लोग मारे जा चुके हैं जिसमें अधिकांश संख्या में महिलाएं व बच्चे हैं। अब इजरायली शासक गाजा को मिटा डालने पर
अठारहवीं सदी के इंग्लैण्ड में होने वाले चुनावी भ्रष्टाचार पर गूगल से ‘सर्च’ करने पर उसका ए आई स्वतः ही यह जवाब हाजिर कर देता हैः
एस.आई.आर. प्रक्रिया के दौरान बड़े पैमाने पर मतदाताओं की कटौती की गई। अब तक 13 करोड़ से ज्यादा मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटा दिए गए। जबकि 5-6 करोड़ लोगों को संदेह की आड़ में नोटिस भेजे गए। 13 करोड़ में से 70 प्रतिशत वो लोग थे जिन्हें स्थानांतरित या अनुपस्थित बता दिया गया। इस तरह बड़े स्तर पर मनमानी छंटनी की जा रही है। इसमें सबसे बड़ी संख्या अल्पसंख्यक, दलित, आदिवासी, महिलाओं और मलिन बस्तियों में रहने वालों की है।
इस मजदूर आंदोलन की विचारधारा मार्क्सवाद का यह स्पष्ट कहना था कि महान फ्रांसीसी क्रांति के जमाने से ही पूंजीपति वर्ग ने अपने समाज के लिए जो आदर्श घोषित कर रखा है- स्वतंत्रता, समता, बंधुत्व का आदर्श- वह पूंजीवाद की निजी सम्पत्ति के कारण कभी भी हासिल नहीं किया जा सकता। पूंजी के रूप में निजी सम्पत्ति के रहते स्वतंत्रता का मतलब होगा बाजार में खरीद-बेच की स्वतंत्रता, समता का मतलब होगा बाजार में खरीददार व विक्रेता की समता तथा बंधुत्व का मतलब होगा खरीद-बेच की व्यवस्था पर सहमति।
गाजापट्टी में इजरायल की कत्लेआम करने की मुहिम जारी है। इजरायली यहूदी नस्लवादी न तो किसी समझौते को मान रहे हैं और न ही वे अपनी विनाश लीला को रोक रहे हैं। वे नस्लीय सफाये की मुहिम चला रहे हैं। इसके जवाब में हमास और अन्य प्रतिरोध संगठन इजरायली कब्जाकारी सेना पर प्रहार कर रहे हैं।
अपने व्यापक नुकसान को देखते हुए अमरीकी साम्राज्यवादियों ने अप्रैल महीने में युद्ध विराम किया और फिर पाकिस्तान की मध्यस्थता में एक ज्ञापन समझौता किया। इस ज्ञापन समझौते में अधिकांशतः ईरान की मांगें स्वीकार की गयीं। यह वस्तुतः अमरीका की पराजय थी। इस समझौते के थोड़े ही दिनों बाद अमरीका ने इसका उल्लंघन शुरू कर दिया। इजरायल ने एक भी दिन इस समझौते को नहीं माना।