4 लेबर कोड्स लागू होने का देशव्यापी विरोध

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मजदूर अधिकार संघर्ष अभियान (मासा) द्वारा संयुक्त किसान मोर्चा एवं केंद्रीय ट्रेड यूनियन फेडरेशनों के आह्वान पर मोदी सरकार द्वारा मजदूर विरोधी चार नये लेबर कोड्स लागू किये जाने के विरोध में 26 नवम्बर को देशव्यापी विरोध प्रदर्शन आयोजित किये एवं संयुक्त विरोध प्रदर्शनों में भागीदारी की गई। मासा, जो कि संघर्षशील एवं क्रांतिकारी मजदूर संगठनों का देशव्यापी साझा मंच है, ने 26 नवम्बर को प्रतिरोध दिवस के रूप में मनाया।
    
इन विरोध प्रदर्शनों के तहत मासा के घटक संगठनों ने दिल्ली-एन सी आर, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, हरियाणा और पंजाब से लेकर बिहार, बंगाल एवं दक्षिण भारत के कर्नाटक तक विभिन्न शहरों एवं औद्योगिक केंद्रों में नये लेबर कोड्स की प्रतियों को आग के हवाले किया। साथ ही, इन्हें तत्काल वापस लिये जाने की मांग के साथ जुलूस निकाले गये; सभायें की गईं एवं विभिन्न जगहों पर ज्ञापन भी दिये गये।
    
इसके अतिरिक्त हरियाणा के फरीदाबाद, गुड़गांव, नारनौल, गोहाना, उत्तराखण्ड के रामनगर, काशीपुर, देहरादून, उ.प्र. के बरेली, बलिया, मेरठ, शामली, मुजफ्फरनगर, बागपत, बिहार के पटना, रोहतास व लुधियाना (पंजाब) में भी मासा के आह्वान पर प्रदर्शन किये गये। -विशेष संवाददाताkurukshetramaurudrapurbareilyharidwar

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अमेरिकी साम्राज्यवादी पश्चिम एशिया में और सारी दुनिया में अपनी साम्राज्यवादी जकड़न को खत्म नहीं होने देना चाहेंगे। वे इसके खिलाफ हर संभव प्रयास करेंगे। एक हमले में मुंह की खाने के बाद वे सबक लेकर आगे हमला करने से तौबा नहीं करेंगे। यह उनकी साम्राज्यवादी फितरत के खिलाफ होगा। यानी वे ईरान पर काबू पाने के लिए दूसरे तरीकों की खोज में लग जायेंगे।

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पिछले दस-बारह सालों में हिन्दू फासीवादियों ने इस अनौपचारिक आपातकाल की शैली को काफी विकसित किया है। कहां किस छेद का इस्तेमाल करना है, इसमें उन्होंने महारत हासिल की है। इनके इस कृत्य में न्यायपालिका की सहभागिता से यह काम और आसान हो गया है। मतदाता सूची का विशेष गहन पुनर्रीक्षण इस सबका विशिष्ट उदाहरण है।

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जैसा कि इंटरव्यू के शीर्षक से स्पष्ट है कि पिकेटी एक ऐसी दुनिया का ख्वाब परोसते हैं जिसमें बगैर पर्यावरण को नुकसान पहुंचाये ज्यादातर लोग खुशहाल बन सकते हैं। इस सुन्दर दुनिया को हासिल करने के लिए वे किसी वर्ग संघर्ष बढ़ाने या क्रांति की वकालत नहीं करते। बल्कि वे कुछ नुस्खे सुझाते हैं जिस पर चल कर मौजूदा पूंजीवादी-साम्राज्यवादी दुनिया को ही खुशनुमा बनाया जा सकता है। 

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