भाजपा राज में यौन उत्पीड़नकारियों की बल्ले-बल्ले

यौन हिंसा-उत्पीड़न यहां तक कि बलात्कारियों को भाजपा राज में बहुत शह मिल रही है। भाजपा राज में ऐसे अपराधियों को सजा मिलना तो दूर वे तो राजनीति या कैरियर में विकास की अलग ही रफ्तार पकड़े हुए हैं। ऐसा ही ताजा मामला विकास बराला का है। हरियाणा के विकास बराला पर यौन उत्पीड़न का गंभीर मामला चल रहा है। फिलहाल वो जमानत पर हैं। विकास बराला भाजपा के एक बडे नेता सुभाष बराला का बेटा है जो कि वर्तमान में हरियाणा से राज्यसभा सदस्य हैं।

2017 से विकास बराला और उसके एक दोस्त पर एक आईएएस अधिकारी की बेटी के साथ यौन उत्पीड़न का गंभीर मामला चल रहा है। आरोप भी तय हो चुका है और ये जमानत पर हैं। इस गंभीर आरोप के बावजूद विकास बराला को हरियाणा राज्य सरकार द्वारा सहायक महाधिवक्ता (एएजी) बना दिया गया।

2017 में जब यौन उत्पीड़न की घटना घटी तो बताया जाता है कि शुरू में तो आईएएस की बेटी होने के कारण पुलिस ने मामले को गंभीरता से लिया और तुरंत गिरफ्तारी हो गयी। लेकिन जैसे ही पता चला कि यह तो भाजपा नेता का बेटा है तब पुलिस मामले को हलका करने और सबूतों से छेड़छाड करने लगी।

2017 में यह मामला काफी गरमाया और काफी विरोध हुआ। इसके बावजूद भाजपा खुल कर यौन उत्पीड़नकारियों के साथ खड़ी रही। उस समय केन्द्र और राज्य में भाजपा की सरकार थी। जिसे डबल इंजन की सरकार कहा जाता है। इस डबल इंजन की सरकार ने दोनों इंजन की ताकत मामले को दबाने और अपराधियों को बचाने में लगा दी।

क्योंकि उस समय सुभाष बराला हरियाणा राज्य के भाजपा अध्यक्ष के पद पर थे और उनके इस्तीफे के लिए दबाव बनने लगा। ऐसे में मुख्यमंत्री ने कहा कि बेटे की सजा बाप को नहीं मिलनी चाहिए। भाजपा के उपाध्यक्ष तो दो कदम आगे निकले और उन्होंने कहा कि लड़कियों को रात को बाहर निकलना ही नहीं चाहिए।

2017 से 2025 तक आठ साल हो गये लेकिन पीड़ित जन अभी भी न्याय की राह देख रहे हैं। दूसरी तरफ आरोपी एल.एल.बी. छात्र से राज्य का उप अधिवक्ता बन बना दिया गया। और आरोपी के पिता हरियाणा राज्य के भाजपा अध्यक्ष (2014 से 2020 तक) रहे इसके बाद 2024 में राज्यसभा के सदस्य बना दिये गये हैं।

इसलिए तो भाजपा राज में अपराधियों के हौसले बुलंद हैं। बस अपराधी भाजपा से किसी रूप में जुड़ा होना चाहिए।

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