इजरायल मत जाओ !

मजदूर भाईयो! 
    
इजरायल जाने का आपका फैसला ठीक नहीं है। किसी और वक्त में आप इजरायल जाते (या गये हुए होते तो) तो भी ठीक होता। इस वक्त तो इजरायल ने फिलिस्तीन खासकर गाजापट्टी में भीषण हमला बोला हुआ है। पूरी दुनिया कह रही है कि इजरायल के शासक अपनी फौज के दम पर फिलिस्तीनियों का नरसंहार कर रहे हैं। तैंतीस हजार से ज्यादा लोग मारे जा चुके हैं। मारे जाने वालों में आधे से अधिक औरतें और बच्चे हैं। 76,000 से ज्यादा लोग घायल हैं जिनमें से कई जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे हैं। बीस लाख लोग विस्थापित हो चुके हैं। करीब पन्द्रह हजार बच्चे मारे गये हैं। 
    
इजरायल की क्रूर सेनाओं ने निर्दोष औरतों और मासूम बच्चों के अलावा 140 पत्रकारों को मार डाला है। और ऐसे ही सैकड़ों राहतकर्मी मारे गये हैं। गाजा पट्टी को पूरी तरह से तबाह कर दिया गया है। अब आप सोचो कि यह सब क्या है। गाजा पट्टी महज 42-43 किमी लम्बी और कहीं 5 किमी तो कहीं 12 किमी चौड़ी है। इस छोटे से इलाके में करीब 23 लाख लोग रहते हैं जिसमें से करीब एक लाख लोग या तो मारे जा चुके हैं या फिर घायल हो चुके हैं। 
    
फिलिस्तीनी अपनी आधे से ज्यादा जमीन इजरायलियों के हाथों खो चुके हैं और इजरायल और उसके आका अमेरिका का बस चले तो वे सम्पूर्ण फिलिस्तीन पर कब्जा कर लें। वे जार्डन नदी के पश्चिम किनारे से लेकर भू-मध्य सागर में कहीं भी फिलिस्तीनियों को नहीं रहने देना चाहते हैं। फिलिस्तीनी अपनी आजादी की लड़ाई लड़ रहे हैं जैसे कभी हमने अपनी आजादी की लड़ाई लड़ी थी। 
    
हम मजदूरों ने हमेशा नारा लगाया है, ‘दुनिया के मजदूरों एक हों!’ हमने यह भी नारा लगाया है कि ‘उत्पीड़ित राष्ट्रों का दमन बंद करो!’ ‘उनको आजाद करो!। हमने नारा लगाया है; ‘साम्राज्यवाद मुर्दाबाद!’ ‘पूंजीवाद मुर्दाबाद!’
    
हम हमेशा कहते रहे हैं कि दुनिया में शोषण-उत्पीड़न से मुक्ति और शांति-भाईचारा स्थापित करने के लिए जरूरी है कि मजदूर-मेहनतकशों का राज हो। समाजवाद की पताका पूरी दुनिया में फहरे। 
    
जब आपको फिलीस्तीन की उत्पीड़ित जनता के साथ खड़ा होना चाहिए तब आप इजरायल जा रहे हो। किसलिए जा रहे हो इजरायल?
    
क्या आपका कोई महान उद्देश्य है इजरायल जाने का? नहीं बिल्कुल नहीं। 
    
आप इजरायल महज इसलिए जा रहे हो ताकि आपको ऊंची-बेहतर मजदूरी मिल सके। आप इसलिए जा रहे हो ताकि कुछ बड़ी आमदनी हो तो आप अपने परिवार की मदद कर सके। घर ठीक करवा सको। बहन-बेटी की शादी ठीक से करा सको। बच्चों को अच्छे स्कूल में पढ़ा सको। बूढ़े मां-बाप का इलाज करा सको। 
    
सबको मालूम है कि अगर भारत में ही रहते हुए यह सम्भव होता तो आप कभी विदेश नहीं जाते। अपना देश सबको प्यारा लगता है। अपनी जमीन से कौन है जिसे प्यार नहीं होता है। 
    
आप कह सकते हैं कि आप मजबूर हैं इसलिए आप अपनी जान जोखिम में डालकर इजरायल जा रहे हो। कोई नहीं जानता कि जिस नीति पर इजरायल के शासक चल रहे हैं और अमेरिका उनको चला रहा है इसका अंजाम क्या होगा। इजरायल ही नहीं पूरा पश्चिम एशिया युद्ध के मुहाने पर खड़ा है। इजरायल गाजा पट्टी, बेस्ट बैंक ही नहीं लेबनान, सीरिया में तबाही फैला रहा है। और यही कारण है कि इजरायल भी अपने कर्मों की सजा पा रहा है। दूसरों पर युद्ध थोपने वाला खुद युद्ध के दुष्परिणामों से नहीं बच सकता है। इजरायल के भीतर बहुत तनाव हैं और वहां भी कभी भी जनता का गुस्सा फूट पड़ सकता है। 
    
फिलिस्तीन के अधिकांश हिस्से को हड़पने वाला इजरायल सिर्फ युद्ध और युद्ध के जरिये ही अपना अस्तित्व कायम रख सकता है। ऐसा ही वहां का धूर्त, क्रूर और भ्रष्ट प्रधानमंत्री नेतन्याहू सोचता है। जबकि आसान तरीका है कि फिलिस्तीन को उनकी जमीन लौटा दी जाए। 1948 का समझौता लागू हो और दोनों देश एक-दूसरे के साथ शांति, बराबरी और परस्पर सम्मान के साथ रहें। नेतन्याहू और उसके जैसे धूर्तों के रहते कभी वहां शांति नहीं आ सकती है। जिस हमास को खत्म करने की ये बात करते हैं उसी हमास को कभी इन्हीं धूर्त इजरायली व अमेरिकी शासकों ने पाला-पोसा था। 
    
भारत के मजदूर भाइयो! आप इजरायल मत जाओ। जो जा चुके हैं उन्हें वापस बुलाओ। इजरायल में जाकर काम करने का, मेहनत करने का मतलब इजरायल के शासकों के हाथ मजबूत करना है। युद्ध को जारी रखना है। शांति को कायम न होने देना है। हमें धूर्त शासकों द्वारा दिये गये घृणित सिद्धान्त ‘‘आपदा में अवसर ढूंढो’’ पर नहीं चलना चाहिए। हम मनुष्य हैं कोई मुर्दाखोर गिद्ध या सियार नहीं हैं। 
    
एक बात यह है कि इजरायल को भारतीय मजदूर क्यों चाहिए। क्या इससे पहले वहां मजदूर काम नहीं करते थे। करते थे। और वे मजदूर फिलिस्तीनी मजदूर होते थे। वे गाजा पट्टी और वेस्ट बैंक से इजरायली पास पर मजदूरी करने सुबह इजरायल आते थे और शाम को लौट जाते थे। उन्हें बहुत दमन-उत्पीड़न व अपमान झेलना पड़ता था। जब से इजरायल ने युद्ध छेड़ा है तब से उनका आना बंद कर दिया गया है। फिलिस्तीनी मजदूर तब से बेकार है। भूखों मर रहे हैं। वहां अकाल के जैसे हालात हैं। 
    
एक तरफ इजरायल फिलिस्तीनियों का नरसंहार कर रहा है और दूसरी तरफ उन्हें अपने द्वारा पैदा किये अकाल से मार रहा है। फिलिस्तीनियों को दाने-दाने को मोहताज बना दिया गया है। उनको बूंद-बूंद पानी को तरसा दिया गया है। उनके घरों को बम मार-मार कर नष्ट कर दिया गया है। फिलिस्तीन जन भूखे-प्यासे, बेघर होकर कहां जायें? आसमान से हर ओर से आग बरस रही है। 
    
फिलिस्तीन पर अत्याचार की कीमत इजरायल के मजदूर-मेहनतकश आम जन भी चुका रहे हैं। उन्हें इजरायली शासकों ने युद्ध के चारे में बदल दिया है और ठीक यही काम आप मजदूरों के साथ वे करना चाहते हैं। भारत के वर्तमान शासक इजरायली शासकों का पीठ पीछे से समर्थन कर रहे हैं। वे आपको ऐसी जगह भेज रहे हैं जहां के शासक जब अपनी जनता की जान की परवाह नहीं करते, फिलिस्तीनियों की परवाह नहीं करते हैं तो आपकी परवाह भला क्यों करेंगे। 
    
मत जाओ इजरायल! वहां जाना मतलब युद्ध अपराध में शामिल होना है। अपने ही मजदूर भाइयों के खिलाफ होना है। रोटी तो अपने देश में मिल जायेगी पर विदेश जाकर अपने ही मजदूर भाइयों की रोटी छीनना कितना जायज है। 

क्षोभ, दुख और गुस्से से भरा एक भारतीय मजदूर

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