पीड़िता ही दोषी

/piditaa-hi-doshi

स्त्री विरोधी सोच किस कदर हमारे समाज में पसरी हुई है इसका एक हालिया उदाहरण गुजरात से सामने आया है। स्त्री विरोधी सोच कोई गुपचुप तरीके से जाहिर नहीं की गयी बल्कि चौराहे-सड़कों पर खुलेआम बैनर लगाकर बताई गयी।
    
गुजरात में यातायात पुलिस द्वारा ‘‘प्रायोजित’’ पोस्टर चिपकाये गये। यह पोस्टर महिला सुरक्षा के नाम पर चिपकाये गये। महिलाओं को संबोधित करते हुए इन पोस्टरों में लिखा था- ‘‘देर रात पार्टियों और सुनसान जगह पर जाने से रेप और गैंगरेप हो सकता है’’।
    
पोस्टर की यह बात तब है जब कुछ ही समय पहले गुजरात सरकार ने ‘गरवा उत्सव’ में महिलाओं के बेखौफ देर रात आने-जाने पर अपनी पीठ थपथपाई थी। गुजरात सरकार ने अपनी ही संस्थाओं द्वारा जारी उन आंकड़ों को झुठला दिया जिसमें उन्होंने गुजरात में बढ़ रही यौन हिंसा की तस्वीर बयां की थी। इसमें बताया गया था कि गुजरात में पिछले तीन सालों में बलात्कार की 6,500 घटनाएं और सामूहिक बलात्कार की 36 घटनाएं घटी हैं।
    
महिला सुरक्षा के नाम पर लगाये गये ये पोस्टर बता देते हैं कि सरकारी तंत्र में किस कदर स्त्री विरोधी सोच मौजूद है। महिलाओं को सुरक्षा देने में नाकाम यह तंत्र महिलाओं के खिलाफ अपराधों के लिए स्वयं महिलाओं को ही दोषी बता रहा है। महिलाओं की सुरक्षा के नाम पर यह महिलाओं की आजादी, बराबरी को ही खत्म कर देना चाहता है।
    
सोशल मीडिया में इन पोस्टरों के विरोध को देखते हुए यातायात पुलिस ने इनसे पूरी तरह से पल्ला झाड़ लिया है। और कहा कि यह पोस्टर बिना उसकी जानकारी के एक स्वयं सेवी संस्था ‘‘सतर्कता’’ द्वारा लगाये गये हैं।

आलेख

/west-asia-mein-badalata-shakti-santulan-samajhautaa-gyapan-ke-baad-ki-sthiti

अमरीकी साम्राज्यवादी और इजरायली शासक सोचते थे कि ईरान के शीर्ष नेतृत्व का सफाया करने के बाद ईरानी जनता अपनी सत्ता के विरुद्ध उठ खड़ी होगी और इसका फायदा उठाते हुए अमरीकी साम्राज्यवादी अपनी किसी कठपुतली को सत्ता में स्थापित कर देंगे। लेकिन ऐसा नहीं हुआ। ईरानी अवाम अपनी सत्ता के समर्थन में मजबूती से खड़ी हो गई। यहां से अमरीकी साम्राज्यवादियों को समझ में आ गया कि वे ईरान पर कब्जा नहीं कर सकते।

/war-anay-sadhanon-se-politics-ka-hi-jaari-roop-hai

अमेरिकी साम्राज्यवादी पश्चिम एशिया में और सारी दुनिया में अपनी साम्राज्यवादी जकड़न को खत्म नहीं होने देना चाहेंगे। वे इसके खिलाफ हर संभव प्रयास करेंगे। एक हमले में मुंह की खाने के बाद वे सबक लेकर आगे हमला करने से तौबा नहीं करेंगे। यह उनकी साम्राज्यवादी फितरत के खिलाफ होगा। यानी वे ईरान पर काबू पाने के लिए दूसरे तरीकों की खोज में लग जायेंगे।

/emerjency-tab-aur-ab

पिछले दस-बारह सालों में हिन्दू फासीवादियों ने इस अनौपचारिक आपातकाल की शैली को काफी विकसित किया है। कहां किस छेद का इस्तेमाल करना है, इसमें उन्होंने महारत हासिल की है। इनके इस कृत्य में न्यायपालिका की सहभागिता से यह काम और आसान हो गया है। मतदाता सूची का विशेष गहन पुनर्रीक्षण इस सबका विशिष्ट उदाहरण है।

/piketi-ka-global-justice-project-samraajyavad-ki-pairokari

जैसा कि इंटरव्यू के शीर्षक से स्पष्ट है कि पिकेटी एक ऐसी दुनिया का ख्वाब परोसते हैं जिसमें बगैर पर्यावरण को नुकसान पहुंचाये ज्यादातर लोग खुशहाल बन सकते हैं। इस सुन्दर दुनिया को हासिल करने के लिए वे किसी वर्ग संघर्ष बढ़ाने या क्रांति की वकालत नहीं करते। बल्कि वे कुछ नुस्खे सुझाते हैं जिस पर चल कर मौजूदा पूंजीवादी-साम्राज्यवादी दुनिया को ही खुशनुमा बनाया जा सकता है। 

/amerika-dwaara-iran-par-naya-hamala-isake-doorgami-result

अमरीकी साम्राज्यवादी वर्चस्व को बढ़ाने में पश्चिम एशिया में दृढ़ स्तम्भ इजरायल रहा है। 1979 से पहले ईरान का शासक शाह रजा पहलवी  भी इस क्षेत्र में अमरीका का लठैत रहा है। 1979 में रजा पहलवी का तख्ता उलटने के बाद जो इस्लामी सत्ता आयी, वह लगातार अमरीकी साम्राज्यवाद की वर्चस्ववादी नीतियों का विरोध करती रही थी। यह सत्ता इजरायल द्वारा फिलिस्तीनियों को उजाड़े जाने और उनकी जमीनों पर यहूदी बस्तियां बसाने का विरोध करती रही है।