चुनाव

चोर कभी उस जगह नहीं जाता जहां उसने चोरी की है

भाजपा, कश्मीर को छोड़कर शेष पूरे देश में धारा-370 को खत्म करने का श्रेय लेते घूम रही है। दावा कर रही है कि मोदी राज में जम्मू-कश्मीर के हालात एकदम बदल गये हैं। आतंकवाद पर

‘‘काशी का अविनाशी’’ और मुजरा

जैसे-जैसे राजनीति अपने पतन की ओर बढ़ती है वैसे-वैसे उसकी भाषा ज्यादा सड़कछाप, ज्यादा गाली-गलौच वाली हो जाती है। प्रपंच उसका गहना होता है और उत्तेजना फैलाना मुख्य कारोबार बन

युवा मतदाता की उदासीनता

यह कहा जा रहा है कि वर्तमान चुनावों में युवा मतदाता, खासकर पहली बार वोट डालने की उम्र में पहुंच रहा मतदाता चुनावों के प्रति उदासीनता दिखा रहा है। मतदान के कम होने में उसक

देवदूत और चुनाव आयोग

आखिरकार फकीर को विचित्र अनुभूति हो ही गई कि नरेन्द्र दामोदर दास मोदी नाम का व्यक्ति जैवीय नहीं है बल्कि उसे तो परमात्मा ने भेजा है। कि वह तो देवदूत है। देवदूत को अपने भीत

चोर मचाये शोर

यह भारत में चल रहे आम चुनाव का सबसे ज्यादा मजेदार मौका था जब प्रधानमंत्री मोदी ने राहुल गांधी और कांग्रेस पार्टी पर अम्बानी-अडाणी से ‘‘टैम्पो भर’’ कर काला धन पाने का आरोप

‘‘आम चुनाव का परिणाम अनिश्चित’’

9 मई को भारत के शेयर बाजार में हाहाकार मच गया। बाम्बे स्टॉक एक्सचेंज का सूचकांक जिसे सेंसेक्स के नाम से जाना जाता है एक हजार अंक से ज्यादा गिर गया और यही हाल निफ्टी का भी

इतिहास के लुटेरे

एक मई को यानी ऐन अंतर्राष्ट्रीय मजदूर दिवस को देश के सत्ताधारी हिन्दू फासीवादियों की पार्टी भाजपा ने इंस्टाग्राम पर अपने आधिकारिक खाते से एक एनिमेशन वीडियो डाला। इसमें दि

कश्मीर में भाजपा का डर

लोकसभा चुनाव की सरगर्मियां जोरों पर है। मोदी-शाह अपने चुनाव प्रचार में कश्मीर घाटी से धारा-370 हटाने को अपनी उपलब्धि के बतौर पेश कर रहे हैं। वे पूरे देश में कांग्रेस नेतृ

नख-दंत विहीन मिशन और मिशनरी

आजकल बहुत कम नेता हैं जो अपने राजनीतिक जीवन का कोई लक्ष्य या मिशन घोषित करते हैं। सबका लक्ष्य होता है सत्ता के शीर्ष पर पहुंचना पर वे उसे घोषित नहीं कर सकते। नरेन्द्र मोद

आलेख

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अठारहवीं सदी के इंग्लैण्ड में होने वाले चुनावी भ्रष्टाचार पर गूगल से ‘सर्च’ करने पर उसका ए आई स्वतः ही यह जवाब हाजिर कर देता हैः 

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एस.आई.आर. प्रक्रिया के दौरान बड़े पैमाने पर मतदाताओं की कटौती की गई। अब तक 13 करोड़ से ज्यादा मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटा दिए गए। जबकि 5-6 करोड़ लोगों को संदेह की आड़ में नोटिस भेजे गए। 13 करोड़ में से 70 प्रतिशत वो लोग थे जिन्हें स्थानांतरित या अनुपस्थित बता दिया गया। इस तरह बड़े स्तर पर मनमानी छंटनी की जा रही है। इसमें सबसे बड़ी संख्या अल्पसंख्यक, दलित, आदिवासी, महिलाओं और मलिन बस्तियों में रहने वालों की है।

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इस मजदूर आंदोलन की विचारधारा मार्क्सवाद का यह स्पष्ट कहना था कि महान फ्रांसीसी क्रांति के जमाने से ही पूंजीपति वर्ग ने अपने समाज के लिए जो आदर्श घोषित कर रखा है- स्वतंत्रता, समता, बंधुत्व का आदर्श- वह पूंजीवाद की निजी सम्पत्ति के कारण कभी भी हासिल नहीं किया जा सकता। पूंजी के रूप में निजी सम्पत्ति के रहते स्वतंत्रता का मतलब होगा बाजार में खरीद-बेच की स्वतंत्रता, समता का मतलब होगा बाजार में खरीददार व विक्रेता की समता तथा बंधुत्व का मतलब होगा खरीद-बेच की व्यवस्था पर सहमति।

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गाजापट्टी में इजरायल की कत्लेआम करने की मुहिम जारी है। इजरायली यहूदी नस्लवादी न तो किसी समझौते को मान रहे हैं और न ही वे अपनी विनाश लीला को रोक रहे हैं। वे नस्लीय सफाये की मुहिम चला रहे हैं। इसके जवाब में हमास और अन्य प्रतिरोध संगठन इजरायली कब्जाकारी सेना पर प्रहार कर रहे हैं। 

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अपने व्यापक नुकसान को देखते हुए अमरीकी साम्राज्यवादियों ने अप्रैल महीने में युद्ध विराम किया और फिर पाकिस्तान की मध्यस्थता में एक ज्ञापन समझौता किया। इस ज्ञापन समझौते में अधिकांशतः ईरान की मांगें स्वीकार की गयीं। यह वस्तुतः अमरीका की पराजय थी। इस समझौते के थोड़े ही दिनों बाद अमरीका ने इसका उल्लंघन शुरू कर दिया। इजरायल ने एक भी दिन इस समझौते को नहीं माना।