फासीवाद / साम्प्रदायिकता,

सुलगते लद्दाख पर मोदी मौन

प्रधानमंत्री मोदी ने जिस तरह मणिपुर के मुद्दे पर मौन व अकर्मण्यता का परिचय दिया ठीक यही सब अब लद्दाख के मुद्दे पर भी हो रहा है। लद्दाख की जनता सड़कों पर है और प्रसिद्ध साम

भारत में राष्ट्र विरोधी, मानवता विहीन एवं धार्मिक रूप से कट्टर नागरिकता संशोधन अधिनियम 2019 लागू हो गया है -शम्सुल इस्लाम

नागरिकता (संशोधन) अधिनियम, 2019 (सीएए) जो अफगानिस्तान, बांग्लादेश और पाकिस्तान से (31 दिसंबर, 2014 को या उससे पहले) धार्मिक उत्पीड़न का सामना करते हुए भारत में आने वाले हिंदुओं, सिखों, बौद्धों, ईसाइ

सांप कहो, या श्रीमान सांप कहो, वह तुम्हें काट डालेगा

कुछ लोग ऐसा सोचते हैं कि वह अगर सांप को श्रीमान सांप कहेंगे तो वह काटेगा नहीं। भला सांप कब से ऐसा करने लगे कि कोई अगर उसके प्रति सम्मान दिखाये या भद्रता-नम्रता का प्रदर्श

रामराज्य : न्यायपालिका और न्यायाधीश

रामराज्य के बारे में हिन्दू फासीवादी बताते हैं कि यह सुशासन और सुराज की व्यवस्था है जिसमें राजा और रंक में कोई भेद नहीं है। यह समग्र राजनीतिक व्यवस्था है जिसमें सामाजिक ज

यह ‘नये भारत’ की असली तस्वीर है

बीते दिनों 8 मार्च को दिल्ली के इंद्रलोक इलाके में एक तस्वीर रातों रात चर्चा का विषय बन गयी। यहां नमाज के लिए सड़क पर सजदे में झुके युवकों को एक पुलिसकर्मी लात मारकर खदेड़त

इण्टरनेट बैन : सामूहिक दण्ड

भारत में इण्टरनेट पर पाबंदी (बैन) की घटनाएं तेजी से बढ़ती जा रही हैं। केन्द्र व राज्य सरकारें जब मर्जी आये तब इण्टरनेट को बंद कर देती हैं। यह बंदी कुछेक दिनों से लेकर महीन

मशीन ने झूठ नहीं बोला

पिछले दिनों गजब हो गया। गूगल के जैमिनी ए आई मशीन से मोदी के बारे में पूछा गया तो उसने मोदी को ‘‘फासीवादी’’ बता दिया। क्यों हैं मोदी फासीवादी तो इसका जवाब था कि ‘भाजपा की

संदेशखाली : तृणमूल का अत्याचार और भाजपा की नौटंकी

आजकल पं.बंगाल का संदेशखाली राष्ट्रीय मीडिया में चर्चा का मुद्दा बना हुआ है। ऐसा होना स्वाभाविक भी है। संघ-भाजपा की चाटुकारिता में लीन मीडिया विपक्षी दल के शासन तले होने व

हल्द्वानी हिंसा के पीड़ितों की मदद के लिए आगे आयें !

8 फरवरी को उत्तराखण्ड के हल्द्वानी शहर के बनभूलपुरा इलाके में हुई हिंसा की असलियत क्रमशः परत दर परत खुलकर सामने आ रही है। जिससे यह साफ नजर आ रहा है कि 8 फरवरी की घटना के लिए शासन-प्रशासन की मनमाने

आलेख

/punjivadi-jantantra-and-chunavi-corruption

अठारहवीं सदी के इंग्लैण्ड में होने वाले चुनावी भ्रष्टाचार पर गूगल से ‘सर्च’ करने पर उसका ए आई स्वतः ही यह जवाब हाजिर कर देता हैः 

/election-aayog-hindu-fascist-and-loktantra

एस.आई.आर. प्रक्रिया के दौरान बड़े पैमाने पर मतदाताओं की कटौती की गई। अब तक 13 करोड़ से ज्यादा मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटा दिए गए। जबकि 5-6 करोड़ लोगों को संदेह की आड़ में नोटिस भेजे गए। 13 करोड़ में से 70 प्रतिशत वो लोग थे जिन्हें स्थानांतरित या अनुपस्थित बता दिया गया। इस तरह बड़े स्तर पर मनमानी छंटनी की जा रही है। इसमें सबसे बड़ी संख्या अल्पसंख्यक, दलित, आदिवासी, महिलाओं और मलिन बस्तियों में रहने वालों की है।

/uddharak-ideology-ki-talaas

इस मजदूर आंदोलन की विचारधारा मार्क्सवाद का यह स्पष्ट कहना था कि महान फ्रांसीसी क्रांति के जमाने से ही पूंजीपति वर्ग ने अपने समाज के लिए जो आदर्श घोषित कर रखा है- स्वतंत्रता, समता, बंधुत्व का आदर्श- वह पूंजीवाद की निजी सम्पत्ति के कारण कभी भी हासिल नहीं किया जा सकता। पूंजी के रूप में निजी सम्पत्ति के रहते स्वतंत्रता का मतलब होगा बाजार में खरीद-बेच की स्वतंत्रता, समता का मतलब होगा बाजार में खरीददार व विक्रेता की समता तथा बंधुत्व का मतलब होगा खरीद-बेच की व्यवस्था पर सहमति।

/war-and-diplomacy-uthal-puthal-se-bhari-duniyaa

गाजापट्टी में इजरायल की कत्लेआम करने की मुहिम जारी है। इजरायली यहूदी नस्लवादी न तो किसी समझौते को मान रहे हैं और न ही वे अपनी विनाश लीला को रोक रहे हैं। वे नस्लीय सफाये की मुहिम चला रहे हैं। इसके जवाब में हमास और अन्य प्रतिरोध संगठन इजरायली कब्जाकारी सेना पर प्रहार कर रहे हैं। 

/amerika-ka-iran-par-operation-d-day-hatasha-ka-parinam

अपने व्यापक नुकसान को देखते हुए अमरीकी साम्राज्यवादियों ने अप्रैल महीने में युद्ध विराम किया और फिर पाकिस्तान की मध्यस्थता में एक ज्ञापन समझौता किया। इस ज्ञापन समझौते में अधिकांशतः ईरान की मांगें स्वीकार की गयीं। यह वस्तुतः अमरीका की पराजय थी। इस समझौते के थोड़े ही दिनों बाद अमरीका ने इसका उल्लंघन शुरू कर दिया। इजरायल ने एक भी दिन इस समझौते को नहीं माना।