रिपोर्ट

मालधन में अवैध शराब के धंधे के विरुद्ध महिलायें आक्रोशित

/maaladhan-mein-avaidha-sharab-ke-dhandhe-ke-viruddha-mahilayein-aakroshit

रामनगर/ उत्तराखंड में रामनगर के मालधन में पुलिस-प्रशासन और आबकारी विभाग की मिलीभगत से अवैध शराब का धंधा जमकर फल-फूल रहा है। इससे क्षेत्र की महिलाएं बेहद

इजरायल-अमेरिका गठजोड़ का पुतला दहन

/izarayal-amerika-gathjod-kaa-putalaa-dahan

लालकुंआ/ दिनांक 27 अगस्त को प्रगतिशील महिला एकता केंद्र  के कार्यकर्ताओं ने गाजा पट्टी पर इजरायली हमले के विरोध में इजराइल व अमेरिका के गठजोड़ का पुतला फू

15 अगस्त के अवसर पर विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन

/15-august-ke-awasar-par-vibhinna-programme-ka-ayojan

15 अगस्त, 1947 को भारत ब्रिटिश साम्राज्यवादियों से आजाद हुआ था। इस आजादी को हासिल करने के लिये देश के मजदूरों, किसानों, आदिवासियों, नौजवानों और महिलाओं ने बेमिसाल कुर्बान

शिक्षा का अधिकार और उत्तराखंड में क्लस्टर योजना पर गोष्ठी

/shikshaa-ka-adhikaar-aur-uttaraakhand-mein-cluster-yojana-par-goshthi

हल्द्वानी/ परिवर्तनकामी छात्र संगठन के आह्वान पर उत्तराखंड में क्लस्टर योजना लागू करने पर 15 अगस्त को हल्द्वानी के दमुवाढूंगा में ‘‘शिक्षा का अधिकार और क

भर्ती परीक्षा में गड़बड़ी पर आक्रोशित युवा

/entrance-exam-mein-gadabadi-par-akroshit-yuvaa

दिल्ली/ एसएससी (कर्मचारी चयन आयोग) द्वारा आयोजित परीक्षाओं में गड़बड़ियों के खिलाफ देशभर में छात्रों-शिक्षकों का असंतोष है। यह असंतोष सड़कों पर विरोध प्रदर्

वेतन भुगतान को संघर्षरत उपनल कर्मचारी

/salary-bhugatan-ko-sanghrshrat-upanal-emplyoee

हल्द्वानी/ उत्तराखण्ड सरकार द्वारा प्रदेश में स्वास्थ्य विभाग में पूरे पदों पर भर्तियां करने की जगह उसके विकल्प में आउअसोर्सिंग भर्तियां की जा रही हैं। स

काकोरी ट्रेन एक्शन के सौ साल पूरे होने पर विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन

/kakori-train-action-ke-sau-saal-poore-hone-par-vibhinna-programme

9 अगस्त, 1925 के दिन लखनऊ के निकट काकोरी में क्रांतिकारियों ने सरकारी खजाना लूट लिया था। इतिहास में यह घटना काकोरी ट्रेन एक्शन के नाम से प्रसिद्ध है जिसने कि अंग्रेजों की

उधमसिंह के शहादत दिवस पर विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन

/udhamsingh-ki-sahaadat-diwas-par-vibhinna-programme-ka-aayojan

उधमसिंह हमारे देश के अविस्मरणीय क्रांतिकारी थे जिन्होंने जलियांवाला बाग हत्याकांड के लिये सीधे तौर पर जिम्मेदार पंजाब के तत्कालीन गवर्नर जनरल ओ’डवायर को लंदन के एक सभागार

पंजाब : आदिवासी लोगों के कत्लेआम के खिलाफ प्रदर्शन

/punjab-aadivaasi-logon-ke-katleaam-ke-khilaf-protest

8 अगस्त को मोगा में पंजाब के दर्जनों जनवादी जनसंगठनों द्वारा आदिवासियों और उनके हितों के लिए संघर्षरत ताकतों के क्रूर कत्लेआम के खिलाफ रोषपूर्ण रैली और प्रदर्शन करके मांग

बांग्लाभाषी मजदूरों के उत्पीड़न का विरोध

/banglabhashi-majdooron-ke-utpidan-ka-virodha

गुड़गांव/ पिछले 15-20 दिनों से गुरुग्राम में हरियाणा पुलिस द्वारा सरेआम किसी भी बांग्लाभाषी लोगों को (जिनमें अधिकांश मुस्लिम समुदाय से हैं) बिना किसी आरोप के पकड़ा जा रहा है, धमकाया

आलेख

/west-asia-mein-badalata-shakti-santulan-samajhautaa-gyapan-ke-baad-ki-sthiti

अमरीकी साम्राज्यवादी और इजरायली शासक सोचते थे कि ईरान के शीर्ष नेतृत्व का सफाया करने के बाद ईरानी जनता अपनी सत्ता के विरुद्ध उठ खड़ी होगी और इसका फायदा उठाते हुए अमरीकी साम्राज्यवादी अपनी किसी कठपुतली को सत्ता में स्थापित कर देंगे। लेकिन ऐसा नहीं हुआ। ईरानी अवाम अपनी सत्ता के समर्थन में मजबूती से खड़ी हो गई। यहां से अमरीकी साम्राज्यवादियों को समझ में आ गया कि वे ईरान पर कब्जा नहीं कर सकते।

/war-anay-sadhanon-se-politics-ka-hi-jaari-roop-hai

अमेरिकी साम्राज्यवादी पश्चिम एशिया में और सारी दुनिया में अपनी साम्राज्यवादी जकड़न को खत्म नहीं होने देना चाहेंगे। वे इसके खिलाफ हर संभव प्रयास करेंगे। एक हमले में मुंह की खाने के बाद वे सबक लेकर आगे हमला करने से तौबा नहीं करेंगे। यह उनकी साम्राज्यवादी फितरत के खिलाफ होगा। यानी वे ईरान पर काबू पाने के लिए दूसरे तरीकों की खोज में लग जायेंगे।

/emerjency-tab-aur-ab

पिछले दस-बारह सालों में हिन्दू फासीवादियों ने इस अनौपचारिक आपातकाल की शैली को काफी विकसित किया है। कहां किस छेद का इस्तेमाल करना है, इसमें उन्होंने महारत हासिल की है। इनके इस कृत्य में न्यायपालिका की सहभागिता से यह काम और आसान हो गया है। मतदाता सूची का विशेष गहन पुनर्रीक्षण इस सबका विशिष्ट उदाहरण है।

/piketi-ka-global-justice-project-samraajyavad-ki-pairokari

जैसा कि इंटरव्यू के शीर्षक से स्पष्ट है कि पिकेटी एक ऐसी दुनिया का ख्वाब परोसते हैं जिसमें बगैर पर्यावरण को नुकसान पहुंचाये ज्यादातर लोग खुशहाल बन सकते हैं। इस सुन्दर दुनिया को हासिल करने के लिए वे किसी वर्ग संघर्ष बढ़ाने या क्रांति की वकालत नहीं करते। बल्कि वे कुछ नुस्खे सुझाते हैं जिस पर चल कर मौजूदा पूंजीवादी-साम्राज्यवादी दुनिया को ही खुशनुमा बनाया जा सकता है। 

/amerika-dwaara-iran-par-naya-hamala-isake-doorgami-result

अमरीकी साम्राज्यवादी वर्चस्व को बढ़ाने में पश्चिम एशिया में दृढ़ स्तम्भ इजरायल रहा है। 1979 से पहले ईरान का शासक शाह रजा पहलवी  भी इस क्षेत्र में अमरीका का लठैत रहा है। 1979 में रजा पहलवी का तख्ता उलटने के बाद जो इस्लामी सत्ता आयी, वह लगातार अमरीकी साम्राज्यवाद की वर्चस्ववादी नीतियों का विरोध करती रही थी। यह सत्ता इजरायल द्वारा फिलिस्तीनियों को उजाड़े जाने और उनकी जमीनों पर यहूदी बस्तियां बसाने का विरोध करती रही है।