नीट धांधली पर आक्रोशित छात्र
NEET (राष्ट्रीय पात्रता प्रवेश परीक्षा) 2024 का 4 जून को रिजल्ट जारी हुआ। रिजल्ट जारी होने से एक दिन पहले ही परीक्षा में धांधली के आरोप सामने आ गए थे। बिहार में दो लोगों
NEET (राष्ट्रीय पात्रता प्रवेश परीक्षा) 2024 का 4 जून को रिजल्ट जारी हुआ। रिजल्ट जारी होने से एक दिन पहले ही परीक्षा में धांधली के आरोप सामने आ गए थे। बिहार में दो लोगों
हरिद्वार/ दिनांक 27 मई को स्नो पैक कम्पनी नियर अम्बेडकर चौक, बाहदराबाद औद्योगिक क्षेत्र, हरिद्वार में सुबह 8.30 बजे भगवान दयाल नामक मजदूर की मशीन में इमर
जब देश के मुखिया को खुद के बायोलाजिकल की जगह दैवीय होने का भ्रम होने लगे तो फिर देश में कोई भी चमत्कार संभव है। ऐसा ही एक चमत्कार चुनावी वोटिंग मशीन ईवीएम ने कर दिखाया है
हरिद्वार/ शिवम् आटो कम्पनी सिडकुल हरिद्वार के डेसो चौक वाले क्षेत्र में स्थित है जो हीरो व महेंद्रा के लिए पुर्जे निर्माण करती है। इसमें लगभग 800 के आस-प
आजकल चुनाव आयोग पर बहुत उंगली उठायी जा रही है। मतदान के निशान वाली उंगली आज चुनाव आयोग पर उठ रही है कि वह चुनाव का डाटा नहीं दे रहा है। कितने वोट पड़े और टोटल वोट कितने थे
यह कविता मैंने लगभग चार वर्ष पूर्व लिखी थी। अक्सर हम जैसे लोग जो समाज में बुनियादी तब्दीली करना चाहते हैं, वे अपने नेताओं को, शिक्षकों को, सिद्धान्तकारों को या रणनीति
कभी-कभी कुछ रोचक घटनाएं हो जाती हैं। चुनावों के दौरान मोदी ने टीवी समाचार चैनलों तथा अखबारों को धड़ाधड़ साक्षात्कार दिये। इन्हीं में से किसी में उनसे यह पूछ लिया गया कि उन्
मेरा नाम श्याम सिंह है। मैं राजीव नगर फरीदाबाद में रहता हूं और परमालपुर कैमूर बिहार का स्थाई निवासी हूं। Talbrose आटोमोटिव components Ltd फरीदाबाद 14/1 में काम करने क
चुनाव परिणाम 4 जून को आयेंगे। उससे पहले ‘नागरिक’ का अंक प्रकाशित हो चुका होगा। सभी की उत्सुकता इस बात में स्वाभाविक रूप से होगी कि आम चुनाव का परिणाम क्या होगा। और उस चुन
अमरीकी साम्राज्यवादी और इजरायली शासक सोचते थे कि ईरान के शीर्ष नेतृत्व का सफाया करने के बाद ईरानी जनता अपनी सत्ता के विरुद्ध उठ खड़ी होगी और इसका फायदा उठाते हुए अमरीकी साम्राज्यवादी अपनी किसी कठपुतली को सत्ता में स्थापित कर देंगे। लेकिन ऐसा नहीं हुआ। ईरानी अवाम अपनी सत्ता के समर्थन में मजबूती से खड़ी हो गई। यहां से अमरीकी साम्राज्यवादियों को समझ में आ गया कि वे ईरान पर कब्जा नहीं कर सकते।
अमेरिकी साम्राज्यवादी पश्चिम एशिया में और सारी दुनिया में अपनी साम्राज्यवादी जकड़न को खत्म नहीं होने देना चाहेंगे। वे इसके खिलाफ हर संभव प्रयास करेंगे। एक हमले में मुंह की खाने के बाद वे सबक लेकर आगे हमला करने से तौबा नहीं करेंगे। यह उनकी साम्राज्यवादी फितरत के खिलाफ होगा। यानी वे ईरान पर काबू पाने के लिए दूसरे तरीकों की खोज में लग जायेंगे।
पिछले दस-बारह सालों में हिन्दू फासीवादियों ने इस अनौपचारिक आपातकाल की शैली को काफी विकसित किया है। कहां किस छेद का इस्तेमाल करना है, इसमें उन्होंने महारत हासिल की है। इनके इस कृत्य में न्यायपालिका की सहभागिता से यह काम और आसान हो गया है। मतदाता सूची का विशेष गहन पुनर्रीक्षण इस सबका विशिष्ट उदाहरण है।
जैसा कि इंटरव्यू के शीर्षक से स्पष्ट है कि पिकेटी एक ऐसी दुनिया का ख्वाब परोसते हैं जिसमें बगैर पर्यावरण को नुकसान पहुंचाये ज्यादातर लोग खुशहाल बन सकते हैं। इस सुन्दर दुनिया को हासिल करने के लिए वे किसी वर्ग संघर्ष बढ़ाने या क्रांति की वकालत नहीं करते। बल्कि वे कुछ नुस्खे सुझाते हैं जिस पर चल कर मौजूदा पूंजीवादी-साम्राज्यवादी दुनिया को ही खुशनुमा बनाया जा सकता है।
अमरीकी साम्राज्यवादी वर्चस्व को बढ़ाने में पश्चिम एशिया में दृढ़ स्तम्भ इजरायल रहा है। 1979 से पहले ईरान का शासक शाह रजा पहलवी भी इस क्षेत्र में अमरीका का लठैत रहा है। 1979 में रजा पहलवी का तख्ता उलटने के बाद जो इस्लामी सत्ता आयी, वह लगातार अमरीकी साम्राज्यवाद की वर्चस्ववादी नीतियों का विरोध करती रही थी। यह सत्ता इजरायल द्वारा फिलिस्तीनियों को उजाड़े जाने और उनकी जमीनों पर यहूदी बस्तियां बसाने का विरोध करती रही है।